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पितृदोष समाप्ति हेतु

Hisar Today

कुंडली में जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं तो कालसर्प दोष बनता है। इस दोष की वजह से कार्यों में आसानी से सफलता नहीं मिल पाती है। जीवन के हर क्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हिसार के ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप लाट्‌टा के अनुसार, कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए कुछ आसान उपाय किए जा सकते हैं। ये उपाय अगर श्राद्ध पक्ष में किए जाएं तो और ज्यादा फायदा हो सकता है।

ये उपाय इस प्रकार हैं…
श्राद्ध पक्ष में किसी भी दिन नवनाग स्तोत्र का पाठ करें। अगर आप नहीं कर सकते तो किसी योग्य ब्राह्मण से करवाएं…
अनंतं वासुकि शेषं पद्मनाभं च कंबलं ।
शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा ।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।

पूजा स्थान पर कालसर्प यंत्र की स्थापना करें

श्राद्ध पक्ष में किसी भी दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद सफेद फूल, बताशे, कच्चा दूध, सफेद कपड़ा, चावल व सफेद मिठाई बहते हुए जल में प्रवाहित करें और कालसर्प दोष की शांति के लिए शेषनाग से प्रार्थना करें। श्राद्ध पक्ष के दौरान किसी भी दिन अपने पूजा स्थान पर कालसर्प यंत्र की स्थापना करें और प्रतिदिन विधि-विधान पूर्वक इसकी पूजा करें। इस उपाय से भी कालसर्प दोष से राहत मिलती है।श्राद्ध पक्ष में शिव मंदिर जाकर तांबे का नाग चढ़ाएं। इसके बाद वहां बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिवजी से कालसर्प दोष मुक्ति के लिए प्रार्थना करें। श्राद्ध पक्ष में किसी गरीब को काला कंबल व काली उड़द की दाल का दान करें।

काशी को मोक्ष की नगरी कही जाती है। ऐसी मान्यता है कि यहीं से भगवान शिव ने सृष्टि रचना का प्रारम्भ किया था । कहते हैं यहां जो इंसान अंतिम सांस लेता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है इसीलिए कई लोग अपने अंतिम समय में काशी में ही आकर बस जाते हैं। मोक्ष नगरी काशी में चेतगंज थाने के पास पिशाच मोचन कुंड है। ऐसी मान्यता है कि यहां त्रिपिंडी श्राद्ध करने से पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु से मरने के बाद व्याधियों से मुक्ति मिल जाती है। इसीलिये पितृ पक्ष के दिनों पिशाच मोचन कुंड पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है।

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