धर्मकर्म

नहाते समय भगवान के मंत्र या स्तुति नहीं बोलनी चाहिए, जानिए पूजा-पाठ के सामान्य नियम

पूजा-पाठ से जुड़े नियम और महत्वपूर्ण बातें कई लोगों को नहीं पता होती हैं। इसके कारण रोज घर में होने वाली पूजा-पाठ में अनजाने ही गलतियां होती हैं। इसके कारण पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता। कुछ गलतियों के कारण तो दोष भी लगता है। ग्रंथों के इन नियमों में देवी-देवताओं को चढ़ने वाले फूल, पत्र और पूजा करने की दिशा सहित अन्य महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। इसके अलावा किन बातों और कामों से बचना है ये भी बताया गया है।

क्या करें – एक हाथ से प्रणाम नहीं करना चाहिए। नहाते समय भगवान के मंत्र या स्तुति नहीं बोलनी चाहिए। जप करते समय जीभ या होंठ नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं। जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। पूजा करने के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए। देवी पूजा में लाल आसन और विष्णु आदी देवताओं की पूजा में पीले आसन का उपयोग करें। शिवजी की पूजा में कुशा का अासन उपयोग करना चाहिए। पूजा के आसन कंबल या कुश के होने चाहिए।

पूजा में घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें। सभी धार्मिक कार्यों में पत्नी को दाहिने भाग में बैठाकर धार्मिक क्रियाएं पूरी करनी चाहिए। ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें। पूर्व या उत्तर दिशा में मुख रखकर पूजा करनी चाहिए। किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।
क्या नहीं करें : संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सूर्यास्त के समय तुलसी तोड़ने से दोष लगता है। दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए। भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए। कुष्मांड को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं।

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