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दुर्गा सप्तशती के मंत्र का जाप करते समय ना करें ये गलतियां

Hisar Today 

मां दुर्गा की आराधना का पर्व नवरात्रि 10 अक्टूबर 2018 बुधवार से शुरू हो रहा है। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के लिए तमाम मंत्रों, स्तोत्रों तथा साधना विधि का उल्लेख किया गया है। लेकिन सर्वाधिक मान्यता प्राप्त और अचूक स्तोत्र दुर्गा सप्तशती माना जाता है।मार्कंडेय ऋषि ने इसकी रचना की थी। इसका एक-एक श्लोक एक महामंत्र है और केवल उस मंत्र का पाठ करने से ही तमाम मनोकामनाओं की पूर्ति हो जाती है। दुर्गा सप्तशती बिना नियमों की जानकारी के नहीं पढ़ना चाहिए।

दुर्गा सप्तशती के मंत्र जाप करते समय बरतें सावधानी

अपनी आवश्यकता अनुसार मंत्र का चुनाव करें। नवरात्रि में मंत्र जाप की शुरुआत करें। कम से कम रोज तीन माला मंत्र जाप करें और लगातार नौ दिनों तक करे। इस दौरान सात्विक रहें। अगर उपवास रखें तो और भी उत्तम होगा। मंत्र जाप लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से करें।

दुर्गा सप्तशती के विशेष मंत्र :-
ऐश्वर्य प्राप्ति और भय मुक्ति के लिए मंत्र
ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः। शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै॥
सर्व कल्याण का मंत्र
सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुस्ते॥
सर्व विघ्ननाशक का मंत्र
सर्वबाधा प्रशमनं त्रेलोक्याखिलेशवरी।
एवमेय त्वया कार्यमस्माद्वैरि विनाशनम्॥
बाधा मुक्ति और धन, पुत्र प्राप्ति के लिए मंत्र
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः। मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय॥
सौभाग्य प्राप्ति का चमत्कारिक मंत्र
देहि मे सौभाग्यमारोग्यं देहि में परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

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