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3 तलाक से महिलाओं को मिली आज़ादी अब 498(A) खत्म करके पतियों को दे आजादी : मुल्ख राज मेहता

अर्चना त्रिपाठी | Hisar Today News

हाल में तीन तलाक को लेकर सरकार के फैसले से जहां मुस्लिम महिलाओं को सदियों से चले आ रहे जंजीरो से आज़ादी मिली ठीक उसी प्रकार महिलाओं द्वारा पुरुषों पर 498(A) के झुटे आरोप लगाने वाले कानून से पुरुषों को भी आज़ादी मिले ऐसी मांग मशहूर अधिवक्ता मुल्ख राज मेहता ने की है। उन्होंने 2010 में प्रीती गुप्ता वर्सेस झारखंड के मामले का हवाल देते हुए कहा कि “सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सभी केंद्र सरकार को कहा था कि आज कल कोर्ट में बड़ी संख्या में दहेज के मामले सामने आ रहे है। इनमें से काफी सारे आरोप फर्जी पाए गए है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 498A कानून में संशोधन करने की जरुरत है।

सरकार के इसी फैसले का हवाला देते हुए मुल्ख राज मेहता ने भी मांग रखी कि कई बार महिलाये अपने पतियों पर दहेज और मारपीट का झूठा आरोप लगाकर विभिन्न धाराओं के तहत अपने पतियों को फसाती है, जिसपर लगाम लगाना जरुरी है। क्योंकि दहेज की शिकायत आते ही पुलिस आदमी और लड़की के ससुरालवालों पर धारा 498, धारा 498A, धारा 406, धारा 506, धारा 323 के तहत मामला दर्ज करती है। सीआरपीसी 125 के तहत खर्चे का प्रिवेंशन ऑफ़ डोमेस्टिक वोइलेंस 2005, हिन्दू अडॉप्टेशन मेंटेनन्स एक्ट धारा 18 के तहत मामला दर्ज करती हैं। जिसके चलते बेगुनाह होते हुए भी पति और उसके बुजुर्ग मां-बाप को पुलिस काफी दिनों तक बंद रखती हंै और तो और बेगुनाह होते हुए भी कोई सुनवाई नहीं होती।

वकीलों को संयम बरतने की टिपण्णी पर मुल्ख राज मेहता ने कहा कि इस मामले में वकीलों का यह पेशा है केस लड़ना, इसके लिए उनके लिए यह नामुमकिन है कि हम इस मामले को न ले। यह नियम हम पर लागु नहीं हो सकता। उन्होंने हिसार का उदाहरण देते हुए बताया कि 6 साल पहले एक लड़की ने दूसरे से सम्बन्ध रखे जब इसका पता पति को चला तो उसने पति के खिलाफ ही झूठे केस लगाकर उसे 14 दिनों तक हिरासत में रखा और बाद में खुद 16 लाख लेकर पति की जान छोड़ी। इस वारदात का जिक्र करते हुए मुल्ख राज मेहता ने सरकार से गुजारिश करते हुए कहा कि जल्द ही पतियों को भी इस 498 A से मुक्ति मिलनी चाहिए। इसके लिए सरकार कानून में जल्द संशोधन करे।

498 A का हो संशोधन

मारपीट और दहेज़ के इल्जाम लगाने के बाद पति पर इस कानून के तहत गिरफ्तारी की जाती है। मुल्ख राज मेहता के अनुसार आज इस कानून का गैरइस्तेमल हो रहा है. इसलिए इस कानून को जमानती, और गैर संज्ञेय अपराध बना दिया जाना चाहिए। क्यूंकि इसमें पुलिस दबाव में कार्यवाई करते हुए गिरफ्तारियां करती है।

धारा 406 में हो संशोधन

ससुराल और पति पर स्त्री धन चोरी का आरोप

इस कानून में भी सरकार को संसोधन लाना चाहिए, क्यूंकि इसमें स्त्री धन के नाम पर पुलिस घर में पति के पैसे से लाये गए सामान को भी जब्त करके उसे स्त्री धन बताकर पति और उसके मां-बाप को फसाती है। यह कानून जमानती और गैर संज्ञेय अपराध बना देना चाहिए। वाईएस डोमेस्टिक वोइलेंस एक्ट 2005 में इसे लेकर अलग कानून है।

धारा 506 कानून का किया संसोधन फिर बदला जाए

मुल्ख राज मेहता के अनुसार जान से मारने की धमकी देने पर यह धारा लगाई जाती है। यह पहले जमानती अपराध था, मगर हरियाणा सरकार ने 1980 में इसमें संशोधन करके इसको गैर जमानती बना दिया। मगर आज इस कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए उन्होंने सरकार से मांग कि की इसे बदलकर जमानती और गैर संज्ञेय अपराध बना देना चाहिए। ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो।

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