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2019 लोकसभा चुनाव में दुष्यंत को भीतरघात का खतरा और कुलदीप जिंदल परिवार की मदद से लाएंगे भजनलाल का शासन

> हजका की कांग्रेस में विलय के बाद कुलदीप बिश्नोई की जीत होगी आसान
> सांसद दुष्यंत चौटाला को भीतरघात और पारिवारिक विवाद के चलते विश्वासघात का डर
> आप के पास नहीं कोई दमदार उम्मीदवार, हेलीकॉप्टर उम्मीदवार लेगा जगह

अर्चना त्रिपाठी | Hisar Today

2009 से 2014 तक हिसार लोकसभा सीट पर काबिज भजनलाल परिवार के लिए 2019 का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। क्यूंकि यह चुनाव न केवल स्वर्गीय चौधरी भजनलाल की विरासत को वापस लाने बल्कि पुराने हार का बदला लेने का भी चुनाव होगा। हिसार लोकसभा की सीट पर फतह करना सभी राजकीय दलों के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं। हाल में हिसार में अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे और विभिन्न विकासशील परियोजना और विश्वविख्यात महाविधालय और विद्यापीठ होने के कारण आगे चलकर इस लोकसभा को विशेष महत्व होगा। यही कारण है कि 2019 में होने वाली लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी यहां से अपना खाता खोलने की कोशिश करेगी, जबकि कांग्रेस यहां से स्वर्गीय चौधरी भजनलाल की विरासत को बचने और उसे गति देने का प्रयास करेगी जबकि इनेलो पिछली जित का सिलसिला बरकरार रखने में पूरी जान लगा देगी। तो चलिए आज हिसार टुडे आपको बताने जा रहा है कि 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कॉग्रेस किसे यहां से उम्मीदवारी प्रदान कर भाग्य आजमाने का मौका देती है।

जिंदल से करीबी आसान करेगी कुलदीप की जीत की राह

हिसार लोकसभा चुनाव की दमदार सीट की बात आये तो सबसे पहला नाम भजनलाल परिवार के दमदार प्रत्याशी कुलदीप बिश्नोई का ही लिया जाता है। अब चूंकि कुलदीप बिश्नोई हजका छोड़ कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो चुके है, ऐसे में कांग्रेस पार्टी आलाकमान राहुल गांधी की पहली पसंद भजनलाल परिवार ही है। इसलिए यह तो तय है कि पार्टी आलाकमान स्वर्गीय चौधरी भजनलाल परिवार से ही कोई मजबूत दावेदार लोकसभा चुनाव में खड़ा कर सकता है। वैसे कांग्रेस पूरी तरह से चाहेगी की कुलदीप बिश्नोई ही हिसार से लोकसभा चुनाव लड़े। हालांकि यह कुलदीप बिश्नोई पर ही निर्भर है की वो किसको चुनाव लड़ाते है। चर्चाये इस बात को लेकर है कि अगर कुलदीप लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए इक्छुक न हो तो सवाल ये उठ खड़ा होता है कि ऐसी स्थिति में वे अपने परिवार से किसे चुनावी मैदान में उतारते है? क्या वो चंद्रमोहन को चुनाव लड़ाते है, भव्य बिश्नोई को चुनाव लड़ते है, या फिर अपनी पत्नी विधायक रेणुका बिश्नोई को चुनाव में लड़ने के लिए खड़ा करते है ? हालांकि कांग्रेस में कुलदीप बिश्नोई के बाद जिसका सबसे बड़ा नाम सामने आता है वो है जिंदल परिवार। मगर क्या जिंदल परिवार, कुलदीप बिश्नोई के सामने अपनी दावेदारी के साथ मुकाबला करने के लिए तैयार है ? उन्हें चुनौती देने को तैयार है ? यह सबसे बड़ा सवाल है। हालांकि ऐसा कम ही जान पड़ता है कि जिंदल परिवार अपनी दावेदारी प्रस्तुत करे।

वैसे जिंदल परिवार में पृथवी जिंदल, रतन जिंदल, सावित्री जिंदल एवं नवीन जिंदल जैसे मजबूत दावेदार है, इनमें से कोई भी अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर सकता है। गौतलब है कि अगर हिसार लोकसभा सीट पर बात की जाए तो जीत उसी उम्मीदवार की निश्चित है जिसके पास जिंदल परिवार का समर्थन और ताकत हो। वैसे चर्चा है कि हिसार लोकसभा से जिंदल परिवार चुनाव शायद ही लड़े। वैसे यह भी बात गौरतलब है कि आज से पहले तक भजनलाल परिवार और जिंदल परिवार के बिच काफी तल्खी थी। यह परिवार एक दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते थे। मगर आज इन दोनों परिवार के बीच यह तल्खी ख़त्म होते दिखाई देती है। हाल में सावित्री जिंदल बिश्नोई मंदिर पहुंची। बता दे कि आज तक बिश्नोई परिवार ने जिंदल परिवार को कभी भी बिश्नोई मंदिर नहीं बुलाया था , मगर हाल में कुलदीप बिश्नोई ने सावित्री जिंदल को बाकायदा उन्हें बुलाया और उन्हें मान सम्मान दिए . जिससे देखकर लगता है जिंदल परिवार शायद ही कुलदीप बिश्नोई को चुनाव में चुनौती देगा। जिंदल परिवार यह चाहेगा कि कांग्रेस का उम्मीदवार यहां से बने। ऐसे में कांग्रेस से भजनलाल परिवार के अलावा दूसरा कोई मजबूत दावेदार नहीं है। गौरतलब है कि पिछले बार लोकसभा चुनाव में इनेलो के दुष्यंत चौटाला को 494478 मत जबकि कुलदीप को हजका पार्टी में रहते हुए 462631 मत मिले थे। ऐसे में अगर कुलदीप कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ते है तो उनके लिए हजका और कांग्रेस के संयुक्त वोट जादुई करिश्मा करेगी और वह रेकॉर्ड मार्जिन से जित कर आएंगे।

जयप्रकाश माने जा रहे कांग्रेस पार्टी के हिसार से मजबूत दावेदार

वैसे कांग्रेस पार्टी से हिसार लोकसभा सीट से 3 बार सांसद जयप्रकाश भी कांग्रेस पार्टी से टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। गौतलतब है कि जयप्रकाश ने एक बार जनता दल, एक बार हरियाणा विकास पार्टी और एक बार कांग्रेस पार्टी से हिसार लोकसभा चुनाव सीट जीती थी, इसलिए वह भी कांग्रेस की दावेदारी प्रस्तुत कर सकती है। इतना ही नहीं संपत सिंह भी कांग्रेस पार्टी से टिकट से दावेदारी मांग सकते है। हालांकि इनमें से कुलदीप को चुनौती देने का कोई मादा नहीं रखता जो कुलदीप बिश्नोई को चुनौती दे सकता है।

दुष्यंत चौटाला को भीतरघात का डर, हिसार से इनेलो के सबसे मजबूत दावेदार

गोहान रैली में जिस हिसाब से परिवार का आपसी मनमुटाव, सभा में जबरदस्त हूटिंग, दुष्यंत और अभय चौटाला के बीच मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने को लेकर दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के बिच हुए टकराव के बाद अब हिसार लोकसभा सीट पर हो सकता है पारिवारिक मतभेद के चलते दुष्यंत बड़ा निर्णय नहीं लेते हुए इसी लोकसभा सीट से दुबारा भाग्य आजमा सकते है। वैसे चर्चाये यह भी है कि इस लोकसभा सीट से यहां से दुष्यंत चौटाला की माँ नौना चौटाला को चुनाव लड़ा सकती है। जबकि हो सकता है पार्टी को विस्तार देने के लिए अपनी लोकप्रियता के दम पर पार्टी उन्हें किसी और लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका देकर एक अनोखा प्रयोग कर सकते है। वैसे जिस हिसाब से दुष्यंत चौटाला साढ़े 4 साल से जिस प्रकार हिसार लोकसभा में सक्रीय है। यहां के लोगो के साथ उन्होंने अच्छा संबंध बना रखा है। उसे देखकर उन्हें उपयुक्त सांसद के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में उम्मीद कम है कि दुष्यंत चौटाला कही और से चुनाव लड़े। इतना ही नहीं चौटाला परिवार के अंदर आपसी कलह है, उनको देखकर लगता है कि दुष्यंत को भीतरघात अर्थात परिवार के लोगो से विश्वासघात का डर है, ऐसे में वह सेफ सीट से ही चुनाव लड़ना चाहेंगे। वैसे इसकी गुंजाइशे ज्यादा है की लोकसभा चुनाव में इनेलो पार्टी कार्यकर्ताओं के भीतरघात के चलते दुष्यंत के लिए चुनाव जितना मुश्किल हो सकता है।

आप लाएगी “हेलीकॉप्टर उम्मीदवार”

फिलहाल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले। फिलहाल आप की बात करे तो हिसार से राकेश अग्रवाल का नाम सबसे चर्चित चेहरा है। राकेश अग्रवाल के मामले में कहा जाता है कि वह केजरीवाल के बेहद करीब और उनके गुड बुक में है। वैसे आप के पास हिसार लोकसभा के लिए अभी फ़िलहाल चर्चित चेहरा नहीं है। ऐसे में हो सकता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हो सकता है कि यहां से वे “हेलीकॉप्टर उम्मीदवार” उतारेंगे। वैसे सही मायने में देखा जाए तो आप के पास ऐसा कोई नाम नहीं जो इतने बड़े बाहुबली को टक्कर दे सके।वैसे अगर देखा जाए तो हिसार बेहद गंभीर सीट है और यहां से हल्का उम्मीदवार खड़ा करना मानो वोट कटुआ के तौर पर देखा जाएगा।

मायावती भाजपा की “बी टीम”, चुनाव में इनेलो को पड़ेगा भारी

राजकीय पंडितो का मानना है कि भाजपा ने मायावती को “बी टीम” के तौर पर खड़ा किया है। उसे जिम्मेदारी दी गयी है कि कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ करने के लिए वह हर राज्य की प्रादेशिक पार्टी से गठबंधन करे। वैसे राजकीय पंडितो का मानना है कि अभय चौटाला परिवार का भारतीय जनता पार्टी से अच्छे संबंध है। अभय चौटाला और भाजपा राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह के बिच अच्छे संबंध है। इतना ही नहीं उनके मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भी बेहद अच्छे संबंध है। सूत्रों का मानना है कि भाजपा ने मायावती को उपमुख्यमंत्री बनाने की डील के तहत अपनी रणनीति बना रखी है। जिसके तहत उन्हें हर राज्य की प्रादेशिक पार्टी से गठबंधन करने के आदेश दिए गए है। इस रणनीति के तहत मायावती ने छत्तीसगढ़ में अजित जोगी के साथ हाथ मिला लिया। दरअसल अजित जोगी भाजपा से गठबंधन करना चाहता थे , मगर कांग्रेस का वोट काटने के लिए अमित शाह ने उनसे गठबंधन नहीं किया। इतना ही नहीं हरियाणा में भी मायावती ने अजित जोगी की भांति नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला से गठबंधन किया। मायावती का इनेलो से गठबंधन करने से भाजपा को सबसे ज्यादा फायदा होगा। एक तरफ दलित मतदाता को लगेगा कांग्रेस को वोट देने से अच्छा वह अपना वोट इनेलो दे। इस कदम से कांग्रेस को भारी नुकसान तो होगा, साथ इनेलो को फायदा भी होगा मगर भाजपा को बहुत ज्यादा फायदा हो रह है। वैसे मायावती बेहद चालक महिला मानी जाती है, अगर ऐन मौके में मायावती ने इनेलो का दामन छोड़ भाजपा से हाथ मिला लिया तो जहा कांग्रेस को नुकसान तो होगा , इनेलो को भरी नुक्सान होगा।

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