राजनीति

मोदी के आरक्षण के फैसले का असर हरियाणा के चुनावी समर में

टुडे न्यूज |चण्डीगढ

आगामी 2019 चुनावों के साथ जींद उपचुनाव के पूर्व भाजपा का नया दांव काफी असर दिखायेगा। बता दें कि हरियाणा में चल रही जाट और गैर जाट की राजनीति के बीच आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग को मिलने वाला दस फीसदी आरक्षण चुनावी समर में पूरा कमाल कर दिखाएगा। बता दें कि हरियाणा में तकरीबन ढाई करोड़ आबादी में से करीब एक करोड़ लोग दस फीसदी आरक्षण के दायरे में आएंगे। मगर जो फैसला आज भाजपा ले रही है, वह फैसला तो हरियाणा कि पिछली हुड्डा सरकार ने भी लिया था। हालांकि तब आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को दस फीसदी आरक्षण का लाभ दिया था, लेकिन सीमा से अधिक आरक्षण पर सवाल उठाते हुए न्यायपालिका ने उस पर रोक लगा रखी है।

मगर अब केंद्र की मोदी सरकार अब कानून बनाकर देशभर के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को दस फीसदी आरक्षण के दायरे में लाने जा रही है। इसका बड़ा फायदा उस हरियाणा को भी मिलेगा, जो आरक्षण की आग में कई बार झुलस चुका है। दस फीसदी आरक्षण के दायरे में जाट समेत उन छह जातियों के लोग भी आएंगे, जिन्हें लंबे समय से आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है। जाट आरक्षण की मांग को लेकर प्रदेश में हिंसक आंदोलन हो चुका है तथा 42 लोगों की मौत हो चुकी है।बता दें कि हरियाणा में भाजपा गैर जाट की राजनीति करती रही है। पांच निगमों के चुनाव में भाजपा ने गैर जाट प्रत्याशियों पर दांव खेला। जींद उप चुनाव में भी ऐसा ही होने वाला है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जाटों की नाराजगी से बचने के लिए पार्टी हालांकि कुछ टिकट उन्हें भी देगी, लेकिन भाजपा का फोकस एरिया गैर जाट मतदाता ही हैै।

आरक्षण का फैसला ऐतिहासिक

  • सवर्ण जातियों के गरीब परिवारों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का मोदी सरकार का फैसला ऐतिहासिक है। यह निर्णय पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत को चरितार्थ करता है। इससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को लाभ मिलेगा।

    मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा।

आरक्षण से लाखों परिवार होंगे लाभान्वित

  • सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे लगातार पिछड़ते जा रहे थे, उन्हें राहत मिलेगी। केंद्र सरकार के इस फैसले से हरियाणा में लाखों परिवार लाभान्वित होंगे। यह फैसला ऐतिहासिक और मील का पत्थर है।

सुभाष बराला, विधायक और अध्यक्ष हरियाणा भाजपा।

आरक्षण केवल चुनावी जुमला

  • हरियाणा में हमने जब सन 2013 में सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिया था, तब भाजपा ने इसका विरोध किया। भाजपा ने वर्ष 2013 के कांग्रेस के फैसले को 2014 में अपनी सरकार आने पर भी लागू नहीं किया। अदालत में भी भाजपा आरक्षण का विरोध करती रही। अब लोकसभा सत्र के आखिरी दिन ऐसा प्रस्ताव लाकर भाजपा ने सिर्फ चुनावी जुमला छोड़ा है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री, हरियाणा।

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