टुडे न्यूज़राजनीतिहरियाणा

बिश्नोई समाज की पहचान पर्यावरण और जीव रक्षा करने वालों की : कुलदीप बिश्नोई

Today News | जोधपुर

अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के संरक्षक कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि आज पूरे विश्व में पर्यावरण संरक्षण की बातें हो रही हैं। पेड़ों को बचाने, ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने और जलवायु परिवर्तन को लेकर विश्व में बड़े-बड़े सम्मेलन हो रहे हैं, लेकिन गुरू जंभेश्वर भगवान ने आज से 500 वर्ष पूर्व ही पर्यावरण की महत्ता के बारेे में लोगों को आगाह कर दिया था। बिश्नोई समाज की पहचान पर्यावरण और जीव रक्षा के रूप में है और समाज को अपने गौरवशाली इतिहास पर चलते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए। वे बुधवार को जोधपुर में राजस्थान बिश्नोई एडवोकेट परिषद द्वारा आयोजित पर्यावरण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आज से 530 वर्ष पूर्व सन् 1485 में गुरू जंभेश्वर भगवान ने हरे वृक्षों एवं वन्य जीव प्राणियों की रक्षा करने का अनूठा पाठ पढ़ाया औ पर्यावरण संरक्षक के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने का दिव्य संदेश दिया था। जब से सृष्टि बनी है, तब से ही जल, जंगल व जमीन का आपसी तालमेल रहा है। सदिया गवाह हैं कि जब कभी भी इन तीनों के बीच असंतुलन बढ़ा, तभी मानव तथा वन्य जीव प्राणियों के अस्तित्व को खतरा भी बढ़ा। उन्होंने कहा था कि जीव दया पालणी, रूंख लीलौ नहि घावै अर्थात पृथ्वी पर मानव अस्तित्व को बचाए रखने के लिए जीवों पर दया करो और हरे वृक्षों को मत काटो। उन्होंने कहा कि गुरू जंभेश्वर भगवान किसी भी जीव को ब्रह्मा का ही प्रतिबिम्ब मानते हैं। उनकी विचार दृष्टि में जीव परमात्मा का ही स्वरूप है।

उन्होंने जीव को परमात्मा का अंश मानकर उसे मारने की मनाही की है। जांभो जी कहते हैं कि जिन गाय आदि पशुओं के दूश, दही, छाछ का खान-पान में उपयोग किया जाए और फिर उन्हीं के हाड मांस निकाले जाएं। रक्त बहार कर उसकी जान निकाली जाए और उसे खाया जाए, यह मनुष्य के लिए अति नीच कार्य है। जांभोजी ने जीव हत्यारों को अपनी वाणी में सावधान किया है कि जो निरीह जीवों पर जोर-जुल्म करेगा, उसका अंतकाल बहुत ही कष्टदायक होगा। जांभो जी ईश्वर को मानने वालों से जीवों पर रहम करने को कहते हैं।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close