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फिर दोहराया जाएगा 1993 का इतिहास!

चौ. भजनलाल के मुख्यमंत्री काल में भी रोडवेज की ऐसी ही हड़ताल हुई थी, कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया था व नई भर्तियां की गई थी। आज भी उस समय भर्ती किए गए कर्मचारी व पुराने कर्मचारी नौकरी कर रहे हैं, वही स्थिति आज फिर आ गई है।

महेश मेहता | Hisar News

सरकार और रोडवेज कर्मियों के बीच टकराव कम होने के बजाय और बढ़ता देख इस घटना ने 1993 की हुई हड़ताल की याद ताजा कर दी है। दरअसल 1993 में निजी परमिट के विरोध से शुरू हरियाणा रोडवेज का आंदोलन इतना व्यापक हो गया था कि यह आंदोलन डेढ़ महीने तक चला। जिसकी अगुवाई तत्कालीन संगठन प्रमुख बलदेव सिंह घणघस ने करते हुए ऐसा तीव्र आंदोलन छेड़ा की आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। आज दोबारा उसी प्रकार का नजारा हरियाणा में देखने को मिल रहा है। रोडवेज संगठन भाजपा सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई में सड़को पर उतर आया है। लगातार 16 तारीख से सरकार के अड़ियल रवैये के खिलाफ रोडवेज कर्मचारियों का आंदोलन आज व्यापक स्तर पर पहुंच चुका है।

दरअसल 720 निजी बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत परमिट देने के विरोध में 16 अक्टूबर से हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। बता दे कि अभी फिलहाल प्रदेश के रोडवेज बेड़े में 4083 बसें हैं। इनमें से करीब 3900 बसें हर रोज सड़कों पर चल रही हैं। इन बसों से रोजाना 12.50 लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। एस्मा के बावजूद बसों का चक्का जाम करवाने के लिए सरकार ने सीधे तौर पर रोडवेज यूनियनों के दस पदाधिकारियों को जिम्मेदार माना है। इसके चलते विभाग ने यूनियनों के दस नेताओं एवं रोडवेज कर्मियों को टर्मिनेशन नोटिस जारी कर दिए हैं। टर्मिनेशन नोटिस में इन यूनियन नेताओं से पूछा गया है कि वे 15 दिन के भीतर बताए कि प्रदेश में एस्मा लागू होने के बावजूद क्यों चक्का जाम है। इस वजह से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तय सीमा में यदि यूनियन नेताओं ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो उन्हें सेवामुक्त कर दिया जाएगा।

सरकार इस आदेश के खिलाफ रोडवेज कर्मचारी झुकने को बिलकुल तैयार नहीं हैं। क्योंकि रोडवेज कर्मचारी संगठन के नेताओं का आरोप है कि परिवहन विभाग के 2 वरिष्ठ अधिकारी और परिवहन मंत्री की कुछ आपसी सांठ-गांठ है, जिससे वे लोग 700 बसों को परमिट देने का काम गुजरात और दिल्ली की कुछ निजी संस्था को देने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार हरियाणा में गुजरात मॉडल का इस्तेमाल करके इस राज्य को गुजरात की तरह ठेके में देना चाहती है। रोडवेज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि आज 800 बसों की आवश्यकता है मगर सरकार उस और ध्यान न देकर निजी कंपिनयों के हाथों सारा काम सौंप कर प्रदेश में रोजवेज विभाग का पूरी तरह से निजीकरण करना चाहती है।

भाई भतीजों को नई बसों का टेंडर देने में मशगूल भाजपा

दुष्यंत चौटाला सांसद
दुष्यंत चौटाला
सांसद

रोडवेज सरकार की बहुत बड़ी संम्पत्ति है। पहले बंसीलाल की सरकार में जब रोडवेज नुकसान में थी, तब औमप्रकाश चौटाला ने रोडवेज में जान फूंकी थी। इसे एक मुनाफा कमाने वाली एसेट्स बनाकर सरकार को दिया और चौटाला सरकार के राज में 3000 के करीब नई बसें खरीदी गई। जबकि आज की हालत यह है कि सरकार खुद तो नई बसें खरीद नहीं रही और निजीकरण को बढ़ावा देकर भाई-भतीजों को नई बसों का टेंडर देने का काम कर रही है। उदाहरण तो सामने है कि 700 बसों के परमिट में से अधिकतर परमिट गुजरात और पंजाब की कंपनियों को दिए गए हैं। गुजरात की कंपनी होगी तो चालक भी गुजरात के होंगे। ये लोग बाहर से ही मकैनिक, चालक को लेकर आएगी। भाजपा बेरोजगारी को बढ़ाते हुए रोडवेज के पतन का काम कर रही है। न भूपेंद्र हुड्डा की सरकार ने बस खरीदी न मनोहर सरकार ने बस खरीदी।सिर्फ चौटाला जी के काल में रोडवेज ने मुनाफा कमाया था।

सत्ता के नशे में चूर खट्टर सरकार का तानाशाही रवैया

कुलदीप बिश्नोई विधायक
कुलदीप बिश्नोई
विधायक

सत्ता के नशे में चूर खट्टर सरकार तानाशाही पर उतर आई है। निजीकरण के विरोध में हड़ताल कर रहे रोडवेज कर्मचारियों से बातचीत करने की बजाय चालक-परिचालकों को नौकरी से निकालने का फैसला सरकार की हठधर्मिता को दर्शाता है। लोगों को रोजगार देने की बजाय कर्मियों को नौकरी से निकालना ही खट्टर सरकार की पहचान रही है और पिछले 4 वर्षों में विभिन्न विभागों से कच्चे-पक्के लगभग 50 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है। 12वीं बार हड़ताल करने को मजबूर कर्मचारी वर्ग से टकराव का रास्ता भाजपा को महंगा पड़ेगा, क्योंकि लोकतंत्र में तानाशाही नहीं चलती। मैं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से अनुरोध करता हूं कि जल्द से जल्द रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल खत्म करवाए।

निकम्मी सरकार के खिलाफ निकालेंगे “कटोरा आंदोलन”

नवीन जयहिन्द अध्यक्ष, आप
नवीन जयहिन्द
अध्यक्ष, आप

सरकार निक्कमी और नकारा बन चुकी है। पिछले 4 सालों में सिर्फ कुछ बसे खरीदी हैं। न ये भर्ती कर रहे हैं न बस खरीद रहे हैं। 15000 की ये लोग थाली (खाते) हैं, 1500 लोगोें को बाहर से बुलाकर दारु पीला देते हैं। उस टाइम पर इनके पास बहुत पैसा होता है। मगर रोडवेज को देने के लिए उनके पास पैसा नहीं है। अगर इनके पास पैसा नहीं है तो हम आमजन के बीच में जाकर कटोरा उठाएंगे और जितना दान चन्दा आएगा सरकार को दे देंगे। आज हरियाणा में विभिन्न विभागों में 50 हजार पद रिक्त हैं। ये लोग हरियाणा को गुजरात मॉडल बनाना चाहते हैं। सरकार निजी कंपनी को फायदे पहुंचाने के लिए यह सब कर रही है। भाजपा चुनाव से पहले हार चुकी है।

720 बसे खरीदी में महाघोटाला, हो सीबीआई जांच

बलदेव सिंह घनघस प्रदेशाध्यक्ष,एटक संगटन हरियाणा
बलदेव सिंह घनघस प्रदेशाध्यक्ष,
एटक संगटन हरियाणा

1993 में मैं प्रधान था तब केवल 15000 कर्मचारियों के साथ सभी हड़ताल में थे तब चौधरी भजनलाल की सरकार में सभी को निकाला गया था। वह आंदोलन डेढ़ महीने लम्बा चला था। हम पैसों की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम यह मांग कर रहे हैं कि 700 बसों को किलोमीटर आधार पर निजी परमिट दिए जाएं। हमारी लड़ाई जनता के लिए है। सरकार को रोडवेज के लिए 10,000 बसें खरीदनी चाहिए, अगर सरकार के पास बस खरीदने को पैसे नहीं हैं तो सभी कर्मचारी अपनी एक एक महीने की तनख्वाह देने को तैयार हैं। आज प्रदेश की तकरीबन 3 करोड़ की आबादी है। जबकि बस सिर्फ 4000 हैं बल्कि बस होनी चाहिए थी 20 हजार। सरकार रोडवेज को बंद करने की साजिश कर रही है। आज 720 बसों में से 450 बसों की परमिट गुजरात की कंपनी को दे रखी है। 50 बस का परमिट दिल्ली की कंपनी को दिया है। हरियाणा का तो इसमें एक भी नहीं है। इसलिए मेरी मांग है कि 720 बसे ली जा रही है उसकी सीबीआई जाँच हो। बहुत बढ़ा घोटाला और भ्रष्टाचार है।

पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है खट्टर सरकार

राजपाल नैन, प्रधान रोडवेज कर्मचारी यूनियन
राजपाल नैन,प्रधान
रोडवेज कर्मचारी
यूनियन

सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का काम कर रही है। सरकार अपने नजदीकी लोगों को फायदा पहुंचने के लिए प्राईवेट बस जबरदस्ती जनता पर थोपना चाहती है। यह सरकार तानशाही सरकार है। सरकार ने अपना यही रवैया जारी रखा तो यह आंदोलन जनांदोलन का रूप ले लेगा। भाजपा दोबारा सत्ता में नहीं आ पाएगी। इतना ही नहीं बेरोजगार संगठन के साथ कांग्रेस, इनेलो और हरियाणा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश के सभी कर्मचारी भी सरकार के खिलाफ हड़ताल पर शामिल होंगे। हमने 8000 बसों की मांग की है। अगर सरकार इतनी बस खरीदे तो 50 हजार बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। निजी बस 10 हजार प्रति माह टैक्स देती है और रोडवेज 60 हजार रुपए रोड टैक्स प्रति महीने देती हैं।

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