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फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों को ‘बैंको व बीमा कंपनी’ ने लूटा

मोदी के राज में किसानों का हाल “खोदा पहाड़ निकली चुहिया, हमारी तो चूहिया भी नहीं निकली”

अर्चना त्रिपाठी | Hisar Today

अप्रैल 2018 फतेहाबाद के बलियाला में कर्ज से तंग आकर 33 वर्षीय बूटा सिंह की मौत… मई 2018 पलवल में कर्ज के बोझ तले तंग आकर 32 वर्षीय सुल्तान नामक किसान ने पंखे से लटककर की आत्महत्या… सितम्बर 2018 सिरसा के गांव सुखचैन में 40 लाख रुपये का कर्ज के बोझ से किसान मेजर सिंह ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर की आत्महत्या। सितंबर 2018 बीमा कलेम की राशि की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़े किसान… अक्टूबर 2018 में 1000 किसानों को बैंक की लापरवाही से बीमा से वंचित होने पर किसानों ने जाटान की बैंक शाखा में जड़ा ताला। यह तो केवल कुछ घटनाएं है हरियाणा की जहां के किसान आज सरकार-बैंक और बीमा कंपनी की मिलीभगत के कारण लगातार आत्महत्या करने को मजबूर है। जो सिरसा कृषि और किसान समृद्ध क्षेत्र हुए करता था आज उसी सिरसा में महीने में 2 से 3 किसान सिर्फ कर्ज के बोझ तले आत्महत्या करने को मजबूर है। यह है भाजपा सरकार में किसानों का बुरा हाल। जो दो वक्त की रोटी तो दूर खून के आंसू बहाने को मजबूर है।

‘किसान’ एक ऐसा मुद्दा या यूं कहें चुनाव जीतने का आसान सा मौहरा, जिसे जो सरकार आयी सभी ने लुटा। जब 2014 के चुनावी दौर थे वो घटना कोई नहीं भूल सकता जब खुद प्रधानमंत्री ने अपनी पहली चुनावी सभा हरियाणा के रेवाड़ी में करके यह ऐलान किया था की उनकी सरकार आते ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जायेगी और युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। मगर आज किसानों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने वोट बैंक के चक्कर में सिर्फ और सिर्फ धोखा और जुमलेबाजी कर किसानों को चूना लगाया है। भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब किसी सरकार ने लोगो का पेट भरने वाले किसानों पर लाठियां, डंडे चलाकर उन्हें लहूलुहान किया। वो भी तब जब खुद प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम अहिंसा की बात करने वाले महात्मा गांधी के जयंती पर बड़े-बड़े कार्यक्रम करती है, मगर उन्हीं के जयंती पर हिंसा का रास्ता अख्यितार करते हुए किसानों पर लाठियां और डंडे भी चलाती है।

यह तो दिल्ली में किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश थी, मगर हरियाणा में भाजपा की मनोहर लाल सरकार के खिलाफ किसानों ने बहुत पहले ही बिगुल बजा दिया है। हरियाणा की किसान आज भाजपा की मनोहर लाल सरकार को कोसते हुए कह रहे हैं कि ऐसी घोटालेबाज सरकार पहले कभी नहीं देखी। जिला फतेहाबाद के किसान जयपाल शर्मा का मानना है कि सरकार को लगता है कि वो “किसान पड़े लिखे नहीं तो उनको बेवकूफ बना दो”, आज तक भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नही हुआ कि किसानों पर कभी लाठी चली हो या किसानों से “फसल बीमा योजना’ के जरिये बीमा का पैसा वसूलने वाले बैंक के दफ्तर में ताले जड़े हो। भाजपा सरकार ने उनको जितना ठगा आज तक उतना किसी भी सरकार ने नहीं ठगा। पिछली सरकारों को शर्म तो आती थी, पर आज तो सरकार बेशर्म हो गयी हैं।अखिल भारतीय स्वामीनाथन आयोग संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल पचार का मानना है कि “फसल बीमा योजना भाजपा सरकार ने केवल फंडिंग के लिए शुरू की थी”। इस योजना के तहत बड़े-बड़े बिमा कंपनी खुले आम किसानों का खून पी रहे हैं और सरकार आंकड़ों का खेल बताकर मूर्ख बना रही है। हरियाणा की खट्टर सरकार और मोदी सरकार से बहुत आशाएं की थी, मगर कहते है खोदा पहाड़ निकली चुहिया, हमारी तो चूहिया भी नहीं निकली”।

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