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अजय, दुष्यंंत को दरकिनार कर अभय ने किया पार्टी पर कब्जा

अर्चना त्रिपाठी | Hisar Today

हरियाणा के तीन लाल भजनलाल, बंसीलाल के बाद अब देवीलाल परिवार पर पार्टी के अंदर फुट के बादल मंडराने लगे हैं। आज इनेलो पार्टी के कुनबे के अंदर इन दिनों घात-प्रतिघात का माहौल चरम पर है। पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के सामने आज वही दुविधा सामने आ चुकी है, जो दुविधा आज से 30 साल पहले ताऊ देवीलाल के सामने थी। जब चौधरी देवीलाल चौटाला को ओमप्रकाश चौटाला और रंजीत सिंह चौटाला में से किसी एक को पार्टी का उत्तराधिकारी चुनना था तब चौधरी देवीलाल ने ओमप्रकाश चौटाला को चुना और अब ओमप्रकाश चौटाला के सामने भी यही सवाल है कि आखिर वह अपना राजकीय वारिसदार किसे चुने? उसे जो अपने दबंग स्वभाव और जो बात कही उसपर काबिज रहने के लिए जाना जाता है अर्थात “अभय चौटाला” या युवाओं के साथ सभी लोगो में अपने कार्यों के कारण सबसे लोकप्रिय युवा सांसद दुष्यंत चौटाला को, जिसकी एक आवाज में पार्टी के कायकर्ता और युवा अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार है। यह दुविधा ओमप्रकाश चौटाला की तो समझ सकते है। मगर ऐसी क्या नौबत आ गयी जब पार्टी की राज्य स्तरीय बैठक में ओमप्रकाश चौटाला की आंखो के सामने अभय चौटाला पर सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके कार्यकर्ताओं के अपमान का इलजाम लगा।

दरअसल कार्यकर्ताओं का मानना है कि अभय चौटाला ने कभी सोचा नहीं था कि हरियाणा के राजनीतिक सफर में 4 साल पहले आया उनका भतीजा दुष्यंत आज लोकप्रियता और जनसमर्थन में उनसे लाख गुना आगे निकल जाएगा। कार्यकर्ताओं का मानना है कि अभय चौटाला को दुष्यंत चौटाला की लोकप्रियता से जलन होने लगी है। वह नहीं चाहते कि उनके हाथों से सत्ता और विरासत की भागदौड़ निकल कर उनके भतीजे दुष्यंत चौटाला के पास चली जाए इसलिए अभय चौटाला ने खुल कर दुष्यंत चौटाला और उनके कार्यकर्ताओं का विरोध करना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला का इन कुछ सालों में अपने काम के कारण इतना नाम और पार्टी कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ होने लगी है उससे अभय चौटाला खुश नहीं है। उन्हें अपने राजकीय विरासत की कुर्सी खोने का डर सताने लगा है।

बता दें अब तक पार्टी के अंदर ही अंदर दुष्यंत और अभय चौटाला के बीच की कलह का जिक्र हुआ करता था, मगर यह मामला तब ज्यादा भड़का जब 2019 चुनाव के आगमन के साथ ही दुष्यंत चौटाला के समर्थकों ने सोशल मीडिया से लेकर आम सभाओं में दुष्यंत चौटाला का नाम बतौर मुख्यमंत्री प्रमोट करना शुरू किया, जिसके बाद से अभय चौटाला की सक्रियता और बढ़ी और उन्होंने हिसार में भी अपनी सभा और बैठकों का दौर शुरू किया। बता दें कि 5 अगस्त को इनसो ने छात्र-युवा सम्मेलन का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला को पेश किया था। मंच पर अभय सिंह चौटाला और प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा भी थे, लेकिन यह पूरी तरह से दुष्यंत चौटाला का ही शो रहा। इस आयोजन के दो दिन बाद ही अभय चौटाला ने कैथल में ही इनेलो कार्यकर्ताओं की इमरजेंसी बैठक बुलाई थी और उसमें यह एेलान किया था कि भविष्य में इनेलो, युवा इनेलो और इनसो का छोटा हो या बड़ा कोई भी जलसा या कार्यक्रम पार्टी मुख्यालय से स्वीकृति लिए बिना नहीं होगा।

कुछ कार्यकर्ताओं का यहां तक मानना है कि जिस प्रकार से दुष्यंत चौटाला का नाम मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर लिया जा रहा है, उससे अभय चौटाला बहुत व्यथित हैं। जिस प्रकार हाल में अभय चौटाला पर राज्य स्तरीय सभा में दुष्यंत चौटाला को मंच पर न बोलने दिए जाने का आरोप लगाया जा रहा है यह कहीं न कहीं इसी बात की तरफ संकेत करता है। हालांकि पार्टी प्रवक्ता मनदीप बिश्नोई मानते हैं कि विपक्ष बसपा और इनेलो की ताकत से डर चुका है इसलिए यह अफवाह फैला रहा है। अभी भी सभी कार्यकर्ता ओमप्रकाश चौटाला के मार्गदर्शन में चुनाव लड़ेंगे और वह जिनका नाम लेंगे पार्टी के सभी सदस्य उनके लिए काम करेंगे।

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