टुडे न्यूज़राजनीतिहरियाणा

ढोंगी बाबाओं की दुकानदारी खत्म करना मेरा लक्ष्य: अंतरराष्ट्रीय जादूगर शिवकुमार

अर्चना त्रिपाठी |Hisar Today

अमुक परेशानी है तो खीर खाओ, समोसा खाओ। अमुक चिंता है तो तिजोरी में दस रुपए की गड्डियां रखो। घर में गणेश की एक मूर्ति है तो दो रखो। दो मूर्तियां हैं तो एक रखनी चाहिए। पान का पत्ता खाओ, फलां मिठाई खाओ, फलां चीज घर में रखो। पर्स सफेद है तो काला रखो, काला है तो सफेद रखो। अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दसवंद के तौर पर बाबा के खाते में भेजो। इन्ही सब के नाम पर बाबा लोगों को ठग रहे हैं। इस प्रकार के अनेकों अजीबोगरीब उपाय देने वाले बाबाओं को तो आपने टीवी में बहुत देखा होगा। उससे भी ज्यादा हैरत की बात यह हैं कि इन बाबाओं को मानने वाले लोगो अंध भक्तों कि कमी नहीं जिनके नाम पर यह बाबा लोग आज करोड़ो की कमाई कर रहे हैं। बाबाओं के ऐसे झांसे सदियों से चले आ रहे है, इसलिए इन बाबाओं के पर्दाफाश करने का जिम्मा उठाते हुए इन बाबाओं की दुकानदारी ख़त्म करने का काम किया है अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता जादूगर शिवकुमार ने।

महज 12 साल की उम्र में 8वीं की कक्षा में पड़ते हुए घर पर लगे ब्लैक एंड व्हाईट टीवी में बाबाओं का चमत्कार देखकर शिवकुमार सोचते थे कि आखिर ऐसा कैसे होता है। जादू से हाथों से भभूत और लड्डू कैसे आ जाते हैं। यही सोचते सोचते अलवर ने इन बाबाओं के चमत्कार के पीछे की हकीकत खोजने की कोशिश की। जब वह मात्र 13 साल के थे तब उन्होंने 51 घंटों तक भूमि समाधी लेकर सभी को चौका दिया था। जब वह समाधी से बहार निकले तो उन्हें दिखने के लिए बाहर 50,000 लोगो का जमावड़ा लगा हुआ था। शिवकुमार को देखते ही ताली की गड़गड़ाहट के साथ सभी लोगों ने उन्हें सर आंखों पर बैठा लिया। यही वह दिन था तब से शिवकुमार ने सोचा कि जो समाज उन्हें पहले पागल लड़का कहकर पुकारता था, आज वही समाज उन्हें सर आंखें पर बैठा रहा है, इसका अर्थ है कि वह जादूगरी के क्षेत्र में बहुत कुछ करके समाज की आँखों में बाबाओ के भ्रमजाल के लगे परदे को हटाने में कामयाब हो सकते हैं।

यही सोच उन्होंने परिवार और समाज की परवाह न करते हुए ढोंगी बाबाओं के चमत्कार का पर्दाफाश करने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए निकल पड़े। जादूगर बनना शिवकुमार के लिए एक संयोग से ज्यादा सामाजिक बदलाव का भी एक कदम था। जब 12 साल में उन्होंने अपने परिवार से कहा कि वह जादूगर बनाना चाहते हैं, तब लोग उनका मजाक उड़ाया करते थे, कहते थे “पागल हो गयो हो छोरो।” राजस्थान के अलवर में रहने वाले शिवकुमार ने किसी की परवाह नहीं की और स्कूली जीवन में योग साधना सिखते हुए उन्होंने गाडी रोकना, शरीर के ऊपर से ट्रक चलाना जैसे करतब सीखे और अपने परमपूजनीय गुरु जादूगर राय (अजमेर) से जादूगरी की बारिकियां सीखकर आज देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी जादूगरी का जलवा दिखाकर लोगों को मंत्रमुग्ध किया।

मदन भारती अपनी लेखनी से जिंदा रखे हुएं हैं जादू को

मदन भारती
मदन भारती

अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता जादूगर शिवकुमार के साथ परछाई की तरह हमेशा रहे राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मदन भारती ने जादूगरों के बीच एक अलग स्थान बनाया है। मदन भारती भले ही व्यवसायिक जादूगर न हो मगर उन्होंने समाज में ढोंगी बाबाओं के भ्रमजाल को लेकर अनेकों लेख लिख कर लोगों में जन जागृति फैलाने का काम किया है। मदन भारती विश्व के जादूगरों के बारें में लिखते आ रहे है। जिन जादूगरों के बारे में लोग जानते नहीं उनके कार्यो और नाम को जीवित रखने काकाम मदन भारती ने लिया है। उनके अथक प्रयासों से आज सैकड़ो की तादात में कला प्रेमी उनसे जुड़े हुए हैं।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close