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जींद में जोर दिखा रहे दुष्यंत, शायराना अंदाज में कसा तंज

पांडवों की पावन धरा पर जीदं से न्याय युद्ध का किया आगाज

महेश मेहता | जींद
“रख दिया है कलेजा जालिमो के तीर पर, फैसला कर लिया है छूना है आसमान बादलों को चीर कर” दुष्यंत चौटाला का यह कहना कहीं न कहीं इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि वो किसी भी हाल में झुकने को तैयार नहीं। क्योंकि दुष्यंत को लगता है कि पार्टी उन पर गलत आरोप लगा रही है, जबकि वह इन आरोपों के लिए बिलकुल भी जिम्मेदार नहीं है। दरअसल 25 अक्टूबर को अनुशानहीनता के मामले में इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला अपना फैसला सुनाने जा रहे हैं। इस फैसले के आने के पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात का दौर शुरू करके कार्यकर्ताओं का मूड समझने की कोशिश की है। इसी के चलते आज वह जींद में पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे इस दौरान उन्होंने एक बार फिर कार्यकर्ताओं को संयम रखने की अपील करते हुए कहा कि 25 तारीख को इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला जो भी फैसला देंगे वह फैसला उनके सरमाथे पर रहेगा। दुष्यंत ने कहा कि अगर मुझे अपना जवाब कमेटी के सामने भी रखना पड़े तो हम इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा की डॉ अजय चौटाला दिवाली से पहले आ रहे हैं, उनके आने के बाद वह जो निर्णय देंगे वह निर्णय उनको मान्य रहेगा।

दुष्यंत ने अपने खिलाफ कुछ लोगों की शातिर रणनीति होने का खुलासा करते हुए कहा कि सुनामी आती है तो इसके लिए एक बून्द को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। दुष्यंत ने कहा कि एक्शन लेने के पहले सभी को यह सोचना चाहिए कि सुनामी चली कहां से। भूकंप की गहराई को नापना बेहद जरूरी है और जींद से ज्यादा भूकंप की गहराई को कोई नाप नहीं सकता। उन्होंने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि सभी ताऊ देवीलाल की नीतियों को आगे ले जाने का काम करें और इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला का मान-सम्मान बढ़ाने का काम करे। दुष्यंत से साफ-साफ शब्दों में कहा कि जींद की धरती से न्याय युद्ध की शुरुअात हुई थी, अगर उनके साथ अन्याय हुआ तो दौबारा जींद की धरती को न्याय दिलाने का काम करेगें। उन्होंने आगे कहा कि कड़कती धूप हो या बारिश पार्टी ने जहां कहा मैं गया चाहे वह महेंद्रगढ़ हो, रेवाड़ी हो, या पलवल। मगर कुछ लोग संगठन के ढांचे को ही तोड़ने का काम कर रहे हैं। दुष्यंत ने कार्यकर्ताओं में जोश और अपने दुश्मनों पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि “चाहे कांटे लगे चाहे छाले पड़ें, साथियों चलना है तो बस चलना है, दरिया की जिद्द है रास्ता नहीं दूंगी, हमने तय कर लिया इस बार समंदर हमें पार करना है।”

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