फतेहाबादराजनीतिसिरसाहरियाणाहिसार

कैप्टन व डूमरखां में होगा टिकट के लिए टकराव

 Hisar Today News

  • जिंदल परिवार बनेगा तारणहार

  • उद्योगपति भी टिकट की दौड़ में शामिल

अर्चना त्रिपाठी | हिसार
हरियाणा में भाजपा के अंदर और बाहर चुनावी समीकरण बड़ी तेजी से बदलते जा रहे हैं। अचानक जिंदल परिवार से भाजपा की नजदीकी आगामी चुनावी संग्राम की पटकथा का पहला पन्ना है। भाजपा से जिंदल परिवार की दोस्ती के कई राजनीतिक मायने हैं। इसका ताल्लुक सीधे तौर से हिसार लोकसभा सीट से जुड़ा है। हिसार लोकसभा के बारे में कहा जाता है कि हिसार में जीत के लिए जिंदल परिवार का सहयाेग बहुत जरुरी है।

ऐसे में भाजपा राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा से जिन्दल परिवार की दोस्ती हिसार में आगामी भविष्य पर कुछ न कुछ असर अवश्य डालेगी। इतना ही नहीं भाजपा के समक्ष इनेलो पार्टी के सबसे लोकप्रिय उम्मीदवार दुष्यंत चौटाला से निपटना टेढ़ी खीर साबित हाेने वाला है। ऐसे में भाजपा लोकसभा में किसे उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतारेगी इसको लेकर चर्चाओं का बाजार सड़कों से लेकर घरों में भी गरम हो चुका है। हिसार टुडे आज आपके समक्ष कुछ ऐसे उम्मीदवारों का नाम सामने ला रहा है जिसे भाजपा चुनावी मैदान में उतार सकती है।

वीरेन्द्र सिंह के पुत्र लड़ सकते हैं चुनाव

भाजपा में उमीदवार की बात करें तो सबसे पहला नाम आता है इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह के लड़के आईएएस अधिकारी चौधरी ब्रिजेन्द्र सिंह का। माना जाता है कि 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा सरकार में इस्पात मंत्री रहे चौधरी बीरेंद्र सिंह हिसार लोकसभा के लिए अपने बेटे ब्रिजेन्द्र सिंह की नौकरी छुड़वाकर उन्हें लोकसभा सीट में दावेदारी दिलवाने के लिए बैटिंग करेंगे। क्योंकि पिछली बार जब बीरेंद्र सिंह कांग्रेस पार्टी में थे तब उन्होंने अपने बेटे के लिए बहुत कोशिश की थी, जब बीरेंद्र सिंह कांग्रेस में थे उस दौर में 2014 चुनाव के पहले हुए उपचुनावों में बीरेंद्र सिंह अपने बेटे ब्रिजेन्द्र सिंह को टिकट के लिए टिकट लाने का प्रयास किया था मगर वह अपने बेटे ब्रिजेन्द्र सिंह को टिकट दिलवाने में नाकामयाब रहे और टिकट उस समय संपत सिंह को दे दी गई।

तब से वे चाहते थे की उनका बेटा उनकी राजकीय विरासत संभाले इसलिए ऐसा लगता है 2019 के चुनाव में वे अपने बेटे के लिए दुबारा बैटिंग करेंगे। वैसे बिजेंद्र सिंह के लिए चुनाव की टिकट लाना बीरेंद्र सिंह के लिए टिकट लाना आसान इसलिए भी होगा क्यूंकि वह इस्पात मंत्री है। जब जेएसपीएल घाटे में जा रही थी, तब जिंदल परिवार कि जेएसपीएल को जीवित रखने का काम चौधरी बीरेंद्र सिंह ने किया। उन्होंने ऐसी पालिसी बनाई कि देश का इस्पात देश में ही इस्तेमाल किया जाएगा उनके इस फैसले से जीएसपीएल अर्थात जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड कंपनी को बहुत मुनाफा पंहुचा। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे है कि अगर चौधरी बीरेंद्र सिंह ने जिस प्रकार जिंदल कंपनी को मुनाफा पहुंचाया बदले में वे चाहेंगे की उनका बेटा चुनाव में खड़ा हो तो जिंदल परिवार भी उनकी मदद करेगा। वैसे यह बात जगजाहिर है कि हिसार लोकसभा में जीत उन्ही पार्टी की निश्चित होती है जिनके ऊपर जिंदल परिवार का हाथ हो ऐसे में अगर जिंदल परिवार मदद का वादा करता है तो बीरेंद्र सिंह अपने बेटे के लिए पार्टी आलाकमान से सिफारिश जरूर कर सकते है, मगर उनके बेटे का हिसार लोकसभा में पहचान और काम न होना उनके टिकट मिलने की दावेदारी के सामने रुकावटें भी ला सकता है।

कैप्टन अभिमन्यु भी कर रहे हैं जोरदार तैयारी

जबकि हिसार लोकसभा सीट में अगला नाम है हरियाणा सरकार में वित्त मंत्री के पद पर कार्यरत कैप्टन अभिमन्यु। कैप्टन अभिमन्यु को लेकर चर्चाएं गर्म इसलिए भी है क्यूंकि काफी दिनों से वह हिसार लोकसभा क्षेत्र में अपने एक्टिव मोड में नजर आ रहे है।

सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों के अलावा पार्टी बैठकें भी हिसार लोकसभा क्षेत्र में आयोजित किया जाना कहीं न कहीं यह दिखता है कि वह सांसद चुनाव के लिए वाकई खुले तौर पर तैयारी में जुट गए है। चाहे एयरपोर्ट का कार्यक्रम हो या छोटे से छोटा कार्यक्रम अभिमन्यु व्यक्तिगत तौर पर हर जगह शामिल होकर राज्य की राजनीति से दूर केंद्र की राजनीति करने में ज्यादा इक्छुक दिखाई दे रहे है।

अभिमन्यु को आज स्टेट की राजनीति करना ज्यादा मुफीद नहीं लगता। हालांकि उन्होंने पार्टी आलाकमान के सामने अपने लिए दोनों दरवाजे खुले रखे है, अगर पार्टी उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं देती तो वे विधानसभा के लिए तैयारी कर रहे हंै। माना जा रहा है कि इस बार विधानसभा चुनाव में वह नारनौंद की जगह जींद से चुनाव लड़ेंगे, इसके लिए उन्होंने प्लानिंग भी कर ली है। वैसे अभिमन्यु के मामले में कहा जाता है कि अगर उन्हें पार्टी लोकसभा में चुनाव लड़ने का मौका देगी तो वह पीछे नहीं हटेंगे।

मुख्यमंत्री खुद कर सकते हैं कैप्टन भूपेंद्र सिंह की पैरवी

हालांकि लोकसभा चुनाव में हिसार से भाजपा की तरफ से तीसरे जाट उम्मीदवार जिनका का नाम चर्चाओं में है वो है वरिष्ठ आरएसएस प्रान्त प्रचारक करतार सिंह के लड़के कैप्टन भूपेंद्र सिंह। भूपेंद्र सिंह की भी इच्छा है कि वह भी भाजपा की टिकट से हिसार लोकसभा का चुनाव लडे। भूपेंद्र पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के ओएसडी भी रह चुके हैं।

हिसार जिले के मय्यड़ गांव के रहने वाले भूपेंद्र सिंह भी हिसार में काफी सक्रिय हैं। वैसे चर्चाये यह भी हैं कि भूपेंद्र मय्यड़ गांव के निवासी हैं, तो हो सकता है कि वह लोकसभा का टिकट न मिलने पर बरवाला या नलवा से विधानसभा का चुनाव लड़ें। बता दे भूपेंद्र ने केदारधाम आपदा में जिस प्रकार से पीड़ितों की मदद की थी उसके बाद से वो खबरों में छाए रहे। उन्हें मुख्यमंत्री के बेहद खास आदमियों में गिना जाता है, ऐसे में हो सकता है की खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर लोकसभा चुनाव के लिए उनकी पैरवी करें। कैप्टन नियमित रुप से आमजन के सुख-दुख में भागीदार रहते हैं।

मंगालीवाला को हल्के में लेना नहीं होगी समझदारी

अगला नाम है अशोक मंगालीवाला का, अशोक मंगालीवाला भी हिसार लोकसभा चुनाव में टिकट पाने की जद्दोजहद में हर गांव जा जाकर लोगो की मदद कर अपना जनसम्पर्क बढ़ा रहे हैं। वैसे अशोक मंगालीवाला इसलिए भी अपने दावेदारी मजबूत मान रहे हैं क्यूंकि भाजपा के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जो मध्यप्रदेश भाजपा राष्ट्रीय महासचिव भी हैं।

उनसे अशोक मंगालीवाला की बहुत नजदीकियां हैं। उनके ससुर अमर अग्रवाल छत्तीसगढ़ के भाजपा के बहुत बड़े नेता माने जाते हैं। इस वजह से वह पूरी तरह आश्वस्त हैं कि टिकट उनको ही मिलेगी। मगर जमीनी हकीकत और जनता का मन टटोला जाए तो अशोक मंगालीवाला को टिकट मिलने की गुंजाईश बहुत कमजोर नजर आती है। हालांकि अशोक मंगलीवाला एक रसुखदार घराने से ताल्लुक रखते हैं।

सुभाष चंद्रा भी हैं हिसार से मजबूत दावेदार

आखिरी नाम आता है सुभाष चंद्रा का। अगर भाजपा किसी मजबूत दावेदारी की तलाश करती है तो उसमें सबसे महत्वपूर्ण नाम सुभाष चंद्रा का आता है। सुभाष चंद्रा अभी राजयसभा के सांसद है। डॉ सुभाष चंद्रा एक ऐसे व्यक्ति है जिनकी हर घर के बैडरूम तक दखल है, मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह लोकसभा चुनाव लड़ेंगे? क्यूंकि फ़िलहाल वह 2021 तक राजयसभा सांसद रहने वाले है।

इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव में लड़ने के लिए जैसी गतिविधिया होनी चाहिए,वैसी गतिविधिया फिलहाल सुभाष चंद्र के मामले में दिखाई नहीं देती। सुभाष चंद्रा हिसार में दखल तो रखते है, शहरों में आयोजित कार्यक्रमो में शिरकत तो करते है, मगर छोटे-बड़े कार्यक्रमो के बाद चले जातें है। ऐसे में सुभाष चंद्रा के मामले में यह नहीं कहा जा सकता की क्या वो वाकई चुनाव लड़ने के इच्छुक है ?

वैसे अगर भाजपा सुभाष चंद्रा को मजबूत उम्मीदवार माने और उन्हें चुनाव लड़ने को कहे तो ऐसे में सुभाष चंद्रा चुनाव लड़ने से पीछे हटने वालो में से नहीं है। ऐसे में देखना लाजमी है कि भाजपा इन सभी दमदार उम्मीदवार में से किस उम्मीदवार को उपयुक्त मानकर चुनावी मैदान में आती है, यह तो फिलहाल भविष्य के ही गर्भ में है।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close