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“इनसो को भंग करने का अधिकार केवल अजय चौटाला को, हम किसी ओर का फैंसला क्यों माने”: दिग्विजय

अर्चना त्रिपाठी | Hisar Today

क्या इतिहास फिर दोहराने वाला है जिस प्रकार से इनेलो पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकश चौटाला के भाई खुद की अनदेखी और अपमान से व्यथित होकर पार्टी से अलग हो गए थे। अब क्या दुबारा वही इतिहास दोहराया जाने वाला है या इसकी शुरुअात हो चुकी है। जहां अब मान-अपमान, सत्ता और लोकप्रियता की जंग में चौटाला परिवार में ही, नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला और अभय के बड़े भाई अजय चौटाला के बेटे सांसद दुष्यंत चौटाला और इनसो राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के बीच तकरार बहुत चरम पर पहुंच गई है। इसकी शुरुवात तो 7 तारीख की गोहाना रैली से बहुत पहले ही हो चुकी थी। मगर परिवार के अंदर आपसी कलह और सत्ता की जंग का गवाह 7 तारीख की गोहाना रैली बनी। जब दुष्यंत चौटाला की लोकप्रियता और युवा कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा मानने वाले कार्यकर्ताओं से खफा होकर रैली के बैनर से ही दुष्यंत का फोटो गायब कर दिया गया। इससे गुस्साए कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी जताते हुए इनेलो पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला और अभय चौटाला के सामने जोरदार हूटिंग करना शुरू कर दिया और दुष्यंत जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। इसका असर 11 तारीख को देखने को मिला जब इनेलो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने पार्टी में बड़ा फेरबदल किया।

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने इनेलो की युवा इकाई और इंडियन स्टूडेंट आर्गेनाइजेशन (इनसो) की राष्ट्रीय एवं राज्य इकाई को तुरंत प्रभाव से भंग कर दिया। पार्टी ने कहा कि इन दोनों युवा शाखाओं को अनुशासनहीनता के कारण और पार्टी के आदर्शों के विरुद्ध काम करते हुए पाया और इसलिए यह फंैसला लिया। ओमप्रकाश चौटाला ने यह भी आरोप लगाया कि गोहाना में 7 अक्तूबर को हुई जननायक चौधरी देवी लाल के जन्मदिवस सम्मान समारोह रैली में पार्टी की युवा इकाई पूरी तरह अपनी भूमिका निभाने में असफल रही है। दूसरी तरफ पार्टी ने यह भी पाया था कि इनसो पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त है। इनसो पर यह आरोप भी है कि पार्टी विरोधी शक्तियों से मिलकर षडयंत्र करते हुए उपरोक्त रैली में गड़बड़ी फैलाने की कोशिश की गई और इनेलो की साख को बट्टा लगाने का प्रयास किया गया है।

चौधरी ओमप्रकश चौटाला ने यह आरोप लगाते हुए केवल दिग्विजय चौटाला की लोकप्रियता पर की लगाम नहीं लगाया बल्कि जिस तरह से पार्टी के अंदर उन्होने फेरबदल किया उससे भी यह संकेत दिखाई दिया कि उन्होंने सांसद दुष्यंत चौटाला और विधायक नैना चौटाला की लोकप्रियता को भी कम करने की कोशिश की। ऐसा आरोप लगाया जा रहा है कि इनेलो सुप्रीमो चौधरी ओमप्रकश चौटाला ने अभय चौटाला के करीबियों को पार्टी के विभिन्न पदों की जिम्मेदारी सौपते हुए सांसद दुष्यंत चौटाला, उनके भाई दिग्विजय चौटाला और उनकी मां नैना चौटाला की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उनके पर काटने की कोशिश की है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह पार्टी अंदर कुछ लोगों के अहम, घमंड और सिर्फ “मैं” की लड़ाई चल रही है। जानबूझकर अभय चौटाला के इशारे पर ओमप्रकाश चौटाला ने कार्यकारिणी में ऐसे लोगों की भर्ती की जो अभय चौटाला के करीबी हैं। जबकि इनेलो में दुष्यंत के करीबी और दिग्विजय चौटाला के इनसो को जानबूझकर टारगेट कर युवा शक्ति को दबाने का काम किया गया।

पार्टी में यह किया फेरबदल
किसान सैल के दायित्व से पूर्व विधायक निशान सिंह की जगह पूर्व विधायक कली राम की नियुक्ति, कर्मचारी सैल में पूर्व संयोजक धारा सिंह को हटाकर अब कर्मचारी सैल का प्रभारी नियुक्त, वहीं संयोजक का दायित्व बलवीर सिंह को सौंपा है। चौटाला ने एक नए सैल का गठन किया और मेडिकल सैल का संयोजक डा. के सी काजल को नियुक्त किया। हिसार और दादरी जिले की पार्टी ईकाईयों में भी बदलाव लाते हुए हिसार में राजेंद्र लितानी के स्थान पर सतवीर सिसाय को जिला प्रधान नियुक्त और दादरी में नरेश द्वारका के स्थान पर विजय पंचगांवा जिला प्रधान नियुक्त। इसके अलावा चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने नेशनल बॉडी के पदाधिकारियों में बदलाव किए हैं। वे स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे और अनंत राम तंवर, साधुराम चौधरी, नारायण प्रसाद अग्रवाल, कुमारी फुलवती, अश्वनी दत्ता और रामभगत गुप्ता उपाध्यक्ष घोषित किए गए हैं। आर एस चौधरी आईएएस सेवानिवृत पार्टी के नए सेक्रेटरी जनरल होंगे जबकि रमेश गर्ग, ब्रिज शर्मा और कैप्टन इंद्र सिंह पूर्व सांसद, जनरल सक्रेटरी का पदभार संभालेंगे।

वहीं युद्धवीर आर्य पूर्व सदस्य हरियाणा लोकसेवा आयोग, चत्तरसिंह पूर्व सदस्य लोकसेवा आयोग, बलवंत सिंह मायना पूर्व विधायक, सुरेश मित्तल और अशोक शेरवाल सचिवों का पदभार संभालेंगे। डा. के सी बांगड पूर्व अध्यक्ष लोकसेवा आयोग राष्ट्रीय प्रवक्ता होंगे और दीपचंद गोयल पार्टी के खंजाची बनेंगे। सभी सांसद, हरियाणा विधानसभा में नेताविपक्ष और राज्य के पार्टी अध्यक्ष अपने पदों के दायित्व के आधार पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य होंगे।इनेलो सुप्रीमों ने पार्लियमेंट्री बोर्ड में बदलाव किया। बोर्ड के चेयरमैन ओमप्रकाश चौटाला रहेंगे और नंदलाल चौधरी के निधन होने के कारण चार अन्य अधिकारियों को बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया है, जिसमें अशोक अरोड़ा, बीडी डालिया, अंजु सिंह और कमल नागपाल शामिल हैं।

इनसो को भंग करने का अधिकार केवल अजय चौटाला को: दिग्विजय चौटाला

इनेलो के यूथ विंग और इनसो को भंग करके हरियाणा में सनसनी फैलाने वाले आई.एन.एल.डी. सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला को उनके ही पोते और इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने बड़ा झटका दे दिया है। हिसार टुडे से खास बातचीत में दिग्विजय चौटाला ने स्पष्ट शब्दों में इस फैसले को ना मानने के संकेत दिए हैं। दिग्विजय ने कहा कि इंडियन नेशनल स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (इनसो) का संविधान हमारी राजनीतिक इकाई इनेलो से अलग है। हम इनसो के संस्थापक अजय चौटाला के आदेशों का इंतजार करेंगे, हमें उनकी तरफ से कोई सन्देश नहीं मिला है, वो हमारे संस्थापक है और न ही कोई ओर। दिग्विजय ने कहा कि इनसो को भंग करने का अधिकार केवल अजय चौटाला को है हम किसी तीसरे की बात क्यों माने। तीसरा आदमी तय नहीं कर सकता कि पार्टी भंग करनी है या नहीं। आपको बता दें कि अजय चौटाला दिग्विजय चौटाला के पिता हैं और जेबीटी भर्ती घोटाले के मामले में फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। आपको बता दें कि बीती 7 अक्तूबर को गोहाना में आयोजित इनेलो की सम्मान दिवस रैली में अभय चौटाला की जोरदार हूटिंग हुई थी। रैली के दौरान दुष्यंत समर्थकों ने खूब शोर शराबा किया और दु्ष्यंत को सीएम चेहरा बनाने की मांग की। माना जा रहा है कि इसी बात से ओम प्रकाश चौटाला ने नाराज होकर इनेलो की युवा विंग और छात्र विंग इनसो को भंग कर दिया।

दुष्यंत, दिग्विजय और नैना चौटाला की लोकप्रियता से घबराकर अभय के करीबियों को मिला स्थान

आरोप है कि अभय चौटाला ने दुष्यंत चौटाला की लोकप्रियता से इतने घबरा गए कि उन्होंने ओमप्रकाश चौटाला पर दबाव बनाकर पार्टी के अंदर दुष्यंत की बढ़ती साक को कम करने की कोशिश की। बता दें कि किसान सैल के दायित्व से पूर्व विधायक निशान सिंह को हटा कर उनके स्थान पर पूर्व विधायक कली राम को नियुक्त इसलिए किया गया क्योंकि पूर्व विधायक निशान सिंह के भांजे का कुछ मसला था जिसको लेकर उनका अभय चौटाला के साथ कुछ मतभेद हो गया था, इस वजह से उसे उस पद से हटाकर सफिदो के पूर्व विधायक कली राम को उनके पद कि जिम्मेदारी सौपीं गयी। इतना ही नहीं नैना चौटाला की “हरी चुनरी” और महिला चौपाल जिसके चलते नैना चौटाला देश में विख्यात हो गयी उससे भयभीत होकर नैना चौटाला की रैली को सफल बनाने में मदद करने वाले हिसार से राजेंद्र लितानी और दादरी के नरेश द्वारका पर भी पार्टी सुप्रीमो ने गाज गिराई। हिसार और दादरी जिले की पार्टी ईकाईयों में बदलाव लाते हुए हिसार में राजेंद्र लितानी के स्थान पर सतवीर सिसाय को जिला प्रधान नियुक्त किया गया है। इसी प्रकार दादरी में नरेश द्वारका के स्थान पर अब विजय पंचगांवा को जिला प्रधान नियुक्त किया गया है।

80 प्रतिशत कार्यकर्ता कर सकते है इनेलो को “राम राम”

परिवार की कलह गोहाना रैली के बाद प्रदेश कार्यकारिणी में बदलाव के साथ इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि आज राजकीय पंडितो का मानना है कि जल्द ही दुष्यंत और दिग्विजय इनेलो पार्टी से अलग होकर अपनी अलग पार्टी बना सकते हैं। हो सकता है कि कभी भी प्रदेश में नई राजनीतिक पार्टी की वह घोषणा करे। इस नए राजनीतिक पार्टी के साथ दुष्यंत चौटाला को पार्टी के सीएम चेहरा के तौर पर खड़ा किया जायेगा। आज के इस बदलाव के साथ प्रदेश के साथ जिले के विभिन्न इकाइयों में भी पार्टी श्रेष्ट के प्रति गहरी नाराजगी है। कार्यकर्ता आज खुले तौर पर कह रहे हैं कि दुष्यंत के साथ नाइंसाफी की जा रही है। उनको दबाने की कोशिश की जा रही है। इसलिए हो सकता है पार्टी में फुट के साथ 80 प्रतिशत से ज्यादा पार्टी पदाधिकारी ओर कार्यकर्ता इनेलो को राम राम कह सकते हैं। क्योंकि अधिकतर कार्यकर्ता इनेलो छोड़ दुष्यन्त के साथ जाने को तैयार हैं।

तीनो उभरती शक्तियों का हुआ है अपमान

रमेश जटासरा, युवा महासचिव भिवानी
रमेश जटासरा, युवा महासचिव भिवानी

यह तो युवा शक्ति और युवा आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है। जितनी भी नियुक्तियां हुई है उसने साफ प्रदर्शित किया है कि किस प्रकार पार्टी ने दुष्यंत, दिग्विजय और नैना चौटाला के खास और उनके करीबियों को हटाकर अभय चौटाला के करीबियों को पार्टी में स्थान दिया है। यह तीनो ही पार्टी की उभरती शक्तियां हैं, सभी कार्यकर्ता इन तीनो को दिल से चाहते हैं। आज उनको नीचा दिखाने और उनके साथ अपमान करने का काम किया गया है जो बर्दाश के बाहर है। यह किसी एक नेता के अड़ियल रवैये, “मैं ही श्रेष्ट” की लड़ाई है।

एक जननेता को किया जा रहा खत्म

हरदीप मालिक (पारिवारिक मित्र)
हरदीप मालिक (पारिवारिक मित्र)

जन प्रिय नेता को दबाने की कोशिश की जा रही है। यह मैं की लड़ाई चल रही है, जिसमें जनविरोधी फैसले लिए जा रहे है और एक जननेता को ख़त्म किया जा रहा है। हमें इस बार लग रहा था कि आज इनेलो का राज आ रहा था , मगर जिसके नाम से यह राज आने वाला था पार्टी से निकाला जा रहा है। उन्हें निचा दिखाना और साइड लाइन करने का काम हो रहा है। अगर दुष्यंत चौटाला कोई फैसला लेते है तो हम सभी दुष्यंत जी के साथ रहेंगे और प्रदेश के सभी जिलाधिकारी दुष्यंत जी के साथ खड़े है।

 

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