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निगम अपनी ही योजना की उड़ा रहा धज्जियां

Hisar Today News

हिसार नगर निगम और उपायुक्त अशोक कुमार मीणा द्वारा हिसार को कैटल फ्री करने के बड़े दावे वादों की पोल आज खुद निगम के अधिकारी ही खोलने में तुले हैं। हिसार की सडकों में खुले आम घूम रहे पशुओं के कारण दुर्घटनाओं के बढ़ते प्रमाण पर निगम और प्रशासन ने बेहद गंभीर रुख अख्तियार करते हुए उपायुक्त अशोक कुमार मीणा ने हिसार की सड़कों को इन आवारा पशुओं से मुक्त करने के आदेश निगम अधिकारियों को दिए थे। इसे लेकर निगम आयुक्त अशोक बंसल से लगातार बैठकों के दौर के बाद इसी साल सितंबर में ठेकेदार सुमित गुर्जर को 430 रूपए प्रति गाय देने का वादा करते हुए 2000 गाय हिसार से पकड़ने का ठेका दिया था।

लगभग 11 सितम्बर से शुरू इस मुहीम के तहत अब तक ठेकेदार ने 150 के करीब गायों को पकड़कर हिसार बायपास के पास कुरुक्षेत्र गौशाला में छोड़ दिया, परन्तु अब ठेकेदार द्वारा यह आरोप लगाए जा रहे है कि उनके द्वारा पकड़ी गाय गौशाला वाले निगम के आदेशानुसार 5100 रूपए में वापस छोड़ देते है, इसके कारण पकड़ी गयी गाय दुबारा सड़को पर घूमती नजर आ जाती है।

इन गायों में बाकायदा टैग भी दिखाई देते हैं जो इस बात को साबित करती हैं कि किस प्रकार खुद निगम और प्रशासन ही अपनी योजनाओं की धज्जियां उड़ाता हुआ एक रैकेट के तौर पर काम कर रहा है। बता दंे कि एक गाय को पकड़ने के लिए निगम 430 रूपए ठेकेदार को देता है जबकि पकड़े गए पशुओं के मालिक अपनी गायों को 5100 रूपए की पर्ची भरकर ले जाते है और दोबारा वही गाय सड़कों पर खुलेआम छोड़ दी जाती है। ऐसा नहीं कि निगम अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं। इसकी बाकायदा जानकारी होने के बावजूद वह उन पशुओं के मालिकों के खिलाफ सख्त कदम उठाने से हिचकिचा रहे है। न उनपर कोई कार्यवाई की जा रही है और न ही ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है।

केवल गाय को पकड़ने का ठेका, मगर बैल और छोटी नंदी को नहीं

यह बड़े आश्चर्य की बात है कि सड़क दुर्घटना या हादसों के लिए बैल और छोटी नंदी जिम्मेदार होती है। मगर निगम ने ठेका सिर्फ दुधारू गाय पकड़ने का दिया है, जबकि अन्य खागड और छोटी नंदी को पकड़ने का ठेका निगम ने ठेकेदार को नहीं दिया। ऐसे में ठेके की उपयोगिता में ही संदेह उठने लगा है।

दोषियों पर दर्ज हो एफआईआर

यह बेहद निंदनीय है कि हम यहां आवारा पशु मुक्त हिसार की बात कर रहे है और आज वही प्रशासन अपनी ही योजना की धज्जिया उड़ा रहा है। मेरा मानना है कि सरकार को इन मामलों पर मॉनिटर रखने के लिए कोई योजना बनानी चाहिए और आवारा पशुओं के मालिकों पर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। मुझे तो ताज्जुब होता है िक निगम का अधिकारी भी नियमों से अवगत नहीं। ऐसे में यह मुहीम कैसे सफल होगी ? इस तरह जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्य से भाग नहीं सकते। तरुण जैन, हलका अध्यक्ष इनेलो, हिसार

दुर्घटना होने पर जिम्मेदार अफसरों पर हो केस दर्ज

मैं तो खुद 4 साल पहले इन आवारा पशुओं के कारण दुर्घटना का शिकार हुआ था, तब मैंने खुद उपायुक्त के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। इसलिए मेरा मानना है कि अगर कोई भी नागरिक इन आवारा पशुओं के कारण दुर्घटना का शिकार हो तो सीधे इस मामले के अधिकारी पर जिम्मेदारी तय कर उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवाया जाए। इन लोगों की नीयत साफ नहीं, यह सब दिखावा केवल पैसे उगाही के लिए ही हो रहा है। यह लोग ऐसे नियम रखते है ताकि पशु मालिक नाराज न हो।इनको तो चाहिए की दुबारा पकड़ी गयी गाय मिले तो उसके मालिक पर एफआईआर दर्ज हो, तभी यह लोग सुधरेंगे। राजीव सरदाना, नेता, आप

वार्निंग के अलावा हमारे हाथ में कुछ नहीं

हमें निगम ने पर्ची दी थी उन्हीं गायों को हमने 5100 रूपए लेकर छोड़ा है। जब यह गाय हमने उनके मालिकों को दी तो उन्हें हमनें कहा कि गाय दुबारा पकड़ी गई तो छोड़ेंगे नहीं। मगर हम इसके अलावा कुछ कर ही नहीं सकते।
सत्यप्रकाश, सचिव, कुरुक्षेत्र गौशाला

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