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टिकट वितरण व नामांकन के बाद भी जारी है दलबदल का ‘खेल’

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में पार्टियों द्वारा टिकट वितरण और नामांकन के बाद भी दलबदल का खेल जारी है। विभिन्‍न दलों में नेताओं का दलबदल जारी है।

हिसार टुडे ।नई दिल्ली

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में सियासी पार्टियों द्वारा टिकट वितरण और नामांकन के बाद भी दलबदल का खेल जारी है। हरियाणा की राजनीति में शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि नेता टिकट वितरण और नामांकन हो जाने के बाद भी दल बदल कर रहे हैं। सबसे अधिक भाजपा और इसके बाद जननायक जनता पार्टी में दूसरे दलों के नेता शामिल हुए हैं।

बादली से पांच बार विधायक रहे धीरपाल के परिवार से अरविंद गुलिया, अभिषेक गुलिया के अलावा बरवाला से इनेलो विधायक वेद नारंग, गुहला से पर्व विधायक फूल सिंह खेड़ी, रतिया से पूर्व विधायक रामस्वरूप रामा सहित अहीरवाल में विधायक रहे राधेश्याम शर्मा सहित सोनीपत के पूर्व विधायक अनिल ठक्कर और पलवल के पूर्व विधायक सुभाष चौधरी ने भाजपा का दामन थाम लिया है। इन नेताओं को मुख्यमंत्री मनोहर लाल, प्रदेश चुनाव प्रभारी नरेंद्र सिंह तोमर सहित केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने पार्टी में शामिल किया है।

भाजपा के बाद जजपा बनी है दलबदल करने वाले नेताओं की दूसरी पसंद

कांग्रेस, इनेलो के जिन नेताओं को पार्टी ने टिकट नहीं दिया उनमें से ज्यादातर भाजपा व जजपा में ही गए। इन भाजपा के नेता भी टिकट नहीं मिलने पर जजपा में गए हैं। डिप्टी स्पीकर संतोष यादव भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर जजपा से चुनाव लड़ रही हैं।वैसे चुनाव के बाद दलबदल पहले भी होते रहे हैं। वर्ष 1987 में जब ताऊ देवीलाल के नेतृत्व में लोकदल व भाजपा गठबंधन की सरकार बनी तो 90 में से 85 विधायक देवीलाल समर्थक जीतकर आए। विरोधी पक्ष कांग्रेस से सिर्फ पांच ही विधायक जीते। इनमें से भी एक तैयब हुसैन कांग्रेस छोड़कर लोकदल में चले गए। बाद में ताऊ देवीलाल ने उन्हें गृहमंत्री बना दिया। इसके बाद ताऊ देवीलाल या ओमप्रकाश चौटाला की सरकार के दौरान विपक्ष महज चार विधायकों का रहा।

 

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