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कुलभूषण जाधव केस: ICJ में भारत ने कसाब का हवाला देकर पाकिस्तान के तर्क किए ध्वस्त

कुलभूषण जाधव मामले में सुनवाई के दौरान भारत ने पाकिस्तान के मुंबई धमाकों में फांसी की सजा पानेवाले अजमल आमिर कसाब के हवाले से पाकिस्तान के तर्क की धज्जी उड़ा दी।

हिसार टुडे | नई दिल्ली

कुलभूषण जाधव मामले में सुनवाई के दौरान भारत ने पाकिस्तान के मुंबई धमाकों में फांसी की सजा पानेवाले अजमल आमिर कसाब के हवाले से पाकिस्तान के तर्क की धज्जी उड़ा दी।
पाक ने दावा किया था कि भारत भी सैन्य कोर्ट का प्रयोग ट्रायल के लिए करता है। पाकिस्तान के झूठ की पोल खोलते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में साबित किया कि मुंबई धमाकों के दोषी कसाब की सुनवाई कोर्ट में लाइव हुई थी। पाक की सैन्य अदालत ने ही जाधव को फांसी की सजा सुनाई है।

कसाब को मिला था वकील, ट्रायल कोर्ट में चला मुकदमा

17 अप्रैल 2018 को सैन्य अदालत वाले पाक के दावे पर जवाब देते हुए भारत ने पाकिस्तान के झूठ को अपने मजबूत तथ्यों से खारिज कर दिया। जवाब में भारत की ओर से कहा गया, ‘ट्रायल कोर्ट में कसाब का केस लड़ने के लिए एक स्वतंत्र वकील दिया गया था। एक पूर्व सलिसिटर अडिशनल जनरल कोर्ट में कसाब का पक्ष रखने के लिए पेश हुए थे। निष्पक्ष सुनवाई के लिए यह व्यवस्था की गई थी। भारत की बड़ी आबादी भी ऐसी न्यायिक सेवा से अक्सर वंचित रह जाती है।’
बता दें कि समुद्र मार्ग से प्रवेश करनेवाले लश्कर-ए-तैयबा के 10 पाकिस्तानी आतंकियों में से एक कसाब भी था। पाक से आए आतंकी समूह ने ही 26 नवंबर 2008 को मुंबई बम धमाकों को अंजाम दिया था जिसमें 165 लोगों की जान गई। कसाब को मुंबई की अदालत ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा था। 4 साल बाद पुणे की एक जेल में कसाब को फांसी की सजा दी गई।

‘पाक मूल के आतंकी को भारत में मिला अपील का मौका’

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में दिए जवाब में भारत ने कहा, ‘भारत और पाकिस्तान में सैन्य अदालत एक ही तरीके से काम करते हैं कहना पूरी तरह से गुमराह करनेवाला बयान है। भारतीय सैन्य अदालतों में आम नागरिकों से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं की जाती है। पाकिस्तान का नागरिक आतंकी कसाब रंगे हाथों पकड़ा गया था और उसका मुकदमा भारत की सामान्य क्रिमिनल कोर्ट में चला। पाकिस्तानी मूल के आतंकी को भी भारत में ऊपर की अदालतों में अपील की सुविधा वैसे ही मिली जैसे अन्य सामान्य नागरिकों को मिलती है।’
बता दें कि सैन्य अदालत द्वारा कुलभूषण जाधव को फांसी देने का बचाव करते हुए पाकिस्तान ने तर्क दिया था कि भारत की सैन्य अदालतें कंगारू कोर्ट की तरह काम करती हैं। पाकिस्तान के इस दावे का भारत ने कोर्ट में पुरजोर विरोध किया।

भारत ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा, ‘दोनों देशों की विधायिका का 1947 से पहले तक एक जैसा ही इतिहास रहा है। हालांकि, इसके बाद जिस तरह से भारत संवैधानिक मूल्यों पर चलते हुए आगे बढ़ रहा है वह पाकिस्तान में कानून की स्थिति से बहुत समृद्ध और आगे है।’

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