राष्ट्रीय

सुभाष चंद्रा खुद बनेंगे सीएम या बनेंगे किंगमेकर

अर्चना त्रिपाठी | Hisar Today

हिसार चुनाव क्षेत्र, हरियाणा का एक ऐसा प्रभावशाली क्षेत्र, जहां की राजनीति प्रदेश का भविष्य तय करती है। मगर जब बात आये इस चुनाव क्षेत्र में भाजपा का ऐसा एक भी नेता नहीं जो अपने कार्यो से लोगों का दिल जीत पाया हो। विधायक कमल गुप्ता के ढुलमुल कार्यों के कारण वह जनता के बीच अपनी पैठ और लोकप्रियता बरकरार रखने में असक्षम साबित हुए हैं। विकासशील कार्यो की धीमी गति और क्षेत्र की जनता की समस्या के निराकरण न होने के चलते आगामी चुनाव के पहले ही कमल गुप्ता को दौबारा मौका देने का जनता का मूड नजर नहीं आ रहा है। पार्टी आलाकमान के पास कमल गुप्ता की रिपोर्ट कार्ड के बाद पार्टी हाईकमान भी उनके कार्यों से संतुष्ट नहीं है। आज पार्टी आलाकमान ने कमल गुप्ता का पर्याय और हरियाणा की राजनीति में अपना दबदबा दिखाने की कूवत रखने वाला भाजपा का सिपाही चुन लिया है। हम बात कर रहे है “सुभाष चंद्रा” की।

गौरतलब है कि सुभाष चंद्रा और नवीन जिंदल की दुश्मनी दोस्ती में क्या बदली कि हरियाणा की सियासी राजनीति खुद बा खुद गरमाने लगी। आज हरियाणा में जहां कांग्रेस फिर से सत्ता में वापसी के लिए बेताब है, तो दूसरी तरफ भाजपा की मनोहर सरकार प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी की ईमानदार छवि को भुनाते हुए दुबारा सत्ता में काबिज होने की कोशिशों में लगी हुई है। सुभाष चंद्रा के मामले में कहा जाता है कि वह अपनी मेहनत और योग्यता के बलबूते ही भाजपा की तरफ से राज्यसभा के सदस्य बने थे। उसके बाद से हिसार चुनावी क्षेत्र में लगातार सक्रिय होते हुए सुभाष चंद्रा ने खुद का जनसम्पर्क बढ़ाने की दिशा में काम किया।

आज भी हिसार में हुए छोटे बड़े प्रश्नो को सुलझाने की दिशा में खुद सुभाष चंद्रा ने कमान खुद संभाल रखी है। वह जिस प्रकार से जनता के प्रश्नो और उनकी सहायता के लिए आगे आ रहे है, वह इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि सुभाष चंद्रा हरियाणा की राजनीति में अपनी नयी पारी खेलने की तैयारियों में जुट गए हैं। ऐसे में क्या नवीन जिंदल से उनकी दोस्ती उसी का नतीजा तो नहीं? यही सवाल आज सभी के जहन में है। हिसार की राजनीति में जिंदल परिवार का प्रभुत्व इस बात की तरफ इशारा करता है कि आज भी हिसार विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में जिंदल परिवार का प्रभाव बना हुआ है। सूत्रों का मानना है कि जिस प्रकार से भाजपा नेता की मध्यस्थता के बाद चंद्रा और जिंदल के बीच दोस्ती के तार जुड़े, उसके पश्चात जिंदल अस्पताल में विकास कार्यों का उद्घाटन करने के लिए जिंदल परिवार ने कांग्रेस के नेताओ को नहीं बल्कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर को बुलाया। इस छोटे से कार्यक्रम ने इस बात के संकेत दे दिए की नवीन जिंदल और भाजपा के बीच कुछ न कुछ खिचड़ी जरुर पक रही है।

सूत्रों का मानना है की सुभाष चंद्रा और जिंदल की दोस्ती 2019 चुनाव में महत्वपूर्ण अध्याय लिखेगी क्यूंकि ऐसी गुंजाइश की जा रही है की कांग्रेस के हमेशा करीब रहे नवीन जिंदल 2019 चुनाव के पूर्व कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा में प्रवेश कर सकते हैं व प्रदेश में यह चर्चा आम है कि जिंदल परिवार जिस सीट से चुनाव लड़ता हैं वहां पर विपक्ष का उम्मीदवार का नाम वही तय करता है। अगर ऐसा होता है तो सुभाष चंद्रा की स्थिति बेहद मजबूत होगी। क्योंकि भाजपा सूत्रों के अनुसार ऐसा माना जा रहा है की भाजपा पार्टी आलाकमान सुभाष चंद्रा को हिसार से चुनावी मैदान में उतारकर हिसार की सीट को सुरक्षित रख सकती है। भाजपा इस बात से भली भांति वाकिफ है की सुभाष चंद्रा एक उच्च शिक्षित, कामयाब उद्योगपति होने के साथ शहर के विकास के दृष्टिकोण से हर संभव कदम उठाने वाले एक साहसी नेता भी हैं। जिन्होंने जनता के बीच खुद की स्वच्छ और ईमानदार छवि बरकरार रखते हुए कई इतिहासिक काम किये। ऐसे में भाजपा को लगता है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ ईमानदार छवि के साथ सुभाष चंद्रा की स्वच्छ ईमानदार छवि उन्हें चुनाव में आसान जीत दिलवा सकती है।

भाजपा के सूत्रों का तो यहां तक मानना है की संघ और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुभाष चंद्रा को हरियाणा के मुख्यमंत्री के चहरे के तौर पर देख रहे हैं। इसलिए अभी से सुभाष चंद्रा ने जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है। न केवल अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवा, गरीब बच्चों की पढ़ाई की दिशा में 69000 स्कूलों के 18 लाख बच्चों को उन्होंने बेहतर शिक्षा का उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभाई है, हिसार के 5 अविकसित गांव को गोद लेने और तो और ट्रिपल तलाक के समर्थन में भी उन्होंने सभी मंत्रियो को इकठ्ठा करने की कोशिश की।

ऐसे में सुभाष चंद्रा आज के समय में भाजपा में प्रदेश सीएम पद के प्रबल दावेदार के तौर पर गिने जा रहे हैं। ऐसे में नवीन जिंदल का साथ उनके लिए ताकत बढ़ाने का काम करेगा। यह जोड़ी भाजपा में सीएम पद के दावेदारों के लिए नया सिरदर्द साबित होने वाली है। हालांकि 6 सालो में नवीन जिंदल कांग्रेस नेताओं के साथ मंच सांझा करते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिंदल खुद को कांग्रेस का अभिन्न अंग बताते रहे हैं। मगर यह जगजाहिर है की राजनीति में कुछ भी हो सकता है। आज इतने विवादों के बाद नवीन जिंदल विरोधी खबरें अचानक बंद पड़ गयी हैं। विवादों के बीच कोई नेता जिंदल का नाम तक लेना मुनासिब नहीं समझता। उससे यह बात तो तय है की कहीं न कहीं भाजपा के नेताओं और सुभाष चंद्रा से नजदीकियां उनके लिए रक्षक का काम कर रही हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सुभाष चंद्रा जिस प्रकार से भाजपा के कट्टर प्रतिद्वंद्वियों को भाजपा के करीब ले आए है, यह आगे प्रदेश की राजनीति में क्या गुल खिलाती है।

हिसार में राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने किया ‘स्वच्छता ही सेवा’ मुहिम का आगाज’

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