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सर्जिकल स्ट्राइक के बहाने दुश्मनों को मोदी की चेतावनी – मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

Today News | नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आकाशवाणी पर मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए। यह मन की बात का 48वां संस्करण है। पीएम मोदी ने देश के सैनिकों के बारे में बात की। उन्होंने 2 वर्ष पहले भारत द्वारा पाकिस्तान पर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बात करते हुए सेना के जवानों को सलाम किया। पीएम ने कहा कि पाक पर किए सार्जिकल स्ट्राइक के 2 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों ने 29 सितंबर को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया।उन्होंने कहा कि हमारे अब यह तय हो चुका है कि हमारे सैनिक उन सबको मुंहतोड़ जवाब देंगे जो हमारे राष्ट्र में शांति और उन्नति के माहौल को नष्ट करने का प्रयास करेंगे। जो हमारे देश की शांति को भंग करने की कोशिश करते हैं उन्हें मुंहतोड़ जवाब देंगे। भारत हमेशा शांति पसंद रहा है लेकिन देश की संप्रभुता को दांव पर लगाकर हम ऐसा बिल्कुल नहीं करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 8 अक्टूबर को हम वायुसेना दिवस के रूप में मनाते हैं। 1932 में छह पायलट और 19 वायु सैनिकों के साथ एक छोटी सी शुरुआत से बढ़ते हुए हमारी वायुसेना आज 21वीं सदी की सबसे साहसिक और शक्तिशाली एयरफोर्स में शामिल हो चुकी है। यह अपने आप में एक यादगार यात्रा है। उन्होंने कहा कि 1965 हो, 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता की लड़ाई हो या फिर 1999 में करगिल की लड़ाई सब जगह वायु सेना ने अपना पराक्रम दिखाया है।

अभिलाष टॉमी से सीखें जीने का जज्बा

पीएम ने अभिलाष टॉमी की भी बात की। उन्होंने कहा कि पूरा देश चिंतित था कि उन्हें कैसे बचाया जाए। कुछ दिनों पहले वो कई दिनों तक समंदर में फंसे रहे। बिना खाए- पिये अपनी जिंदगी की लड़ाई लड़ते रहे। उनके सुरक्षित बाहर आने के बार मैंने उनसे बात की। तब भी उनमें वही जोश और जज्बा था।

महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री को किया याद

मोदी ने महात्मा गांधी के साथ-साथ पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनकी विशेषता थी कि वह बाहर से काफी विनम्र दिखते थे लेकिन भीतर से चट्टान की तरह दृढ़ थे। पीएम ने कहा कि जय जवान जय किसान का उनका नारा उनके इसी विराट व्यक्तित्व की पहचान है।

वायुसेना ने बदला था 1971 व कारगिल युद्ध का परिणाम

‘’1947 में श्रीनगर को पाकिस्तानी हमलावरों से बचाने के लिए वायुसेना ने भारतीय सैनिक और उपकरणों को युद्ध के मैदान तक पहुंचाया। 1965 में भी दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता की लड़ाई कौन नहीं जानता। करगिल से घुसपैठियों को खदेड़ने में भी वायुसेना की भूमिका अहम थी।’’

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