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मस्जिद में नमाज का हुआ फैसला, अयोध्या विवाद की सुनवाई से हटा रोड़ा

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नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद में नमाजइस्लाम में अनिवार्य नहीं बताने वाले अपने पूर्व के फैसले को बरकरार रखते हुए इसे बड़ी बेंच में भेजने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत के इस फैसले को दूरगामी महत्व का माना जा रहा है। कोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम पक्षकारों के लिए झटका माना जा रहा है। इस फैसले के बाद अयोध्या विवादकी सुनवाई से रोड़ा हट गया है। इस बीच शीर्ष अदालत के इस फैसले पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। बीजेपी ने इस फैसले का स्वागत किया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण ने गुरुवार को 2-1 से फैसला सुनाया।

फैसले का असर 

-मुस्लिम पक्षकारों के लिए एक झटका माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले को बड़ी बेंच में भेजने की उनकी मांग नहीं मानी गई।

-अब 29 अक्टूबर से अयोध्या विवाद टाइटल सूट की सुनवाई शुरू हो जाएगी।

-अयोध्या विवाद के टाइटल सूट की सुनवाई तीन जजों की बेंच करेगी।

अब मुख्य जमीन विवाद पर होगी सुनवाई 

राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई हाई कोर्ट ने दिए फैसले में कहा था कि तीन गुंबदों में बीच का हिस्सा हिंदुओं का होगा जहां फिलहाल रामलला की मूर्ति है। निर्मोही अखाड़ा को दूसरा हिस्सा दिया गया इसी में सीता रसोई और राम चबूतरा शामिल हैं बाकी एक तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया। इस फैसले को तमाम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बहाल कर दिया।

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