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जेवर हवाईअड्डा बनने का रास्ता साफ, भूमि अधिग्रहण के लिए 90% से ज्यादा किसान राजी

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उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर जिला के जेवर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा के लिए राज्य सरकार की भूमि अधिग्रहण की कोशिश का कुछ किसान विरोध करने पर गौतमबुद्ध नगर जिले के अधिकारियों और जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा है कि जिले के जेवर क्षेत्र में सोमवार (10 सितंबर) को 307 किसानों ने अपनी जमीन के अधिग्रहण के लिए सहमति दे दी।

उन्होंने बताया कि एक दिन में सबसे ज्यादा किसानों ने इस तरह की सहमति दी है. आपको बताया कि कुछ किसानों के शुरूआती विरोध के बाद जिले के अधिकारियों और विधायक लगातार गांवों का दौरा करते रहे. उत्तर प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए इन गांवों में जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। परियोजना की अनुमानित लागत 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये के बीच है। दरअसल, इसकी मुख्य वजह किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं किया जाना, अपर्याप्त मुआवजा और अपनी पहचान खोने का डर है। किसान अपने क्षेत्र को शहरी क्षेत्र की श्रेणी में डाले जाने से भी नाराज हैं। यह वर्गीकरण उन्हें ‘सर्किल रेट’ का दोगुना मुआवजा पाने के योग्य बनाता है, जबकि भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना अधिनियम, 2013 के तहत कृषि भूमि के लिए चार गुना मुआवजे का प्रावधान है। आपको बता दें

कि ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित जेवर एयरपोर्ट को लेकर बड़ा झटका तब लगा था।
जब जेवर एयरपोर्ट के लिए प्रस्तावित जमीन पर किसानों के साथ बातचीत नहीं बन पाई थी। सरकार की तरफ से किसानों की सहमति के लिए 31 अगस्त आखिरी तारीख घोषित की गई थी। आखिरी दिन तक सभी किसानों को मनाने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ किसान सरकार की शर्तों पर जमीन देने को राजी नहीं हुए। जेवर एयरपोर्ट के लिए पहले फेज में 1334 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। जानकारी के मुताबिक, पहले फेज के लिए किसानों ने केवल 506 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण को ही मंजूरी दी है।

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