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Hisar Today :-जानलेवा बना मॉनसून, इस साल बारिश और बाढ़ के कहर से पूरे देश में 993 की मौत

Hisar Today/ नयी दिल्ली :- केरल जैसे  जानलेवा बाढ़ के कहर ने इस बार पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा। इस आपदा में करीब-करीब 400 लोगों की मौत हो गई और पूरे राज्य में तबाही का मंजर देखा गया। इसे सदी की भयंकर त्रासदी का नाम दिया गया था। लेकिन अगर आपको ऐसा लग रहा है कि इस साल के मॉनसून में केवल केरल को ही नुकसान झेलना पड़ा है तो ऐसा नहीं है, ऐसे चार और राज्य हैं जहां के लगभग 600 लोग बाढ़ के कारण उफनती नदियों के कारण लापता हो गए। इसके साथ ही पूरे देश में मौतों का आंकड़ा 993 हो गया।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट

पूरे देश में मॉनसून से प्रभावितों की बात की जाए तो 70 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए और 17 लाख लोग अभी भी राहत कैंपों में रह रहे हैं। गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन विभाग के द्वारा जारी आंकड़ों से ये पता चलता है। केरल के अलावा अन्य बाढ़ प्रभावित राज्यों में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और असम रहे। हालांकि बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या केरल में सबसे ज्यादा रही।

2018 के प्रभावितों का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश में 204 मौतें, पश्चिम बंगाल में 195 मौतें, कर्नाटक में 161 और असम में 46 मौतें हुईं। केरल में 54 लाख लोग प्रभावित हुए और 14.52 लाख लोग अब भी राहत कैंपों में ठहरे हुए हैं। असम में 11.46 लाख लोग प्रभावित हुए और 2.45 लाख अब भी राहत कैंपों में रह रहे हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिकरण के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 2005 से अब तक हर साल लगभग 1,600 लोगों की मौत हो रही है। इनका नुकसान फसलों पर हुआ, घरों पर हुआ सार्वजनिक संपत्तियों पर हुआ। प्रति वर्ष औसतन 4,745 करोड़ का नुकसान हुआ। प्राधिकरण के मुताबिक देश का करीब 12 फीसद भौगोलिक इलाका  बाढ़ अनुकूल है।

2016 और 2017 में मॉनसून प्रभावितों का आंकड़ा

राज्य सरकार के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2017 में 1200 से अधिक लोग बाढ़ प्रभावित घटनाओं से मरे। बिहार में सबसे ज्यादा 514 लोगों की मौत हुई। पश्चिम बंगाल में 261 की मौत, असम में 160, महाराष्ट्र में 124 और उत्तर प्रदेश में 121 मौतें। इन चार राज्यों में 34 मिलियन प्रभावित हुए और 22.81 लाख अब भी राहत कैंपों में रह रहे हैं। यह स्थिति साल 2016 से अलग नहीं है। उस दौरान बिहार में 254 मौतें, मध्य प्रदेश में 184 मौतें महाराष्ट्र में 145 और उत्तराखंड में 102 मौतें हुईं थी।

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