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केजरीवाल सरकार की नई शर्तों से फिर लटक सकता है मेट्रो फेज-4 प्रॉजेक्ट

टुडे न्यूज | नई दिल्ली

दिल्ली मेट्रो फेज 4 को लेकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार की नई शर्तों से पहले से ही काफी देरी देख चुका यह प्रॉजेक्ट और देर हो सकता है। दिल्ली सरकार ने ऑपरेशनल घाटे की शेयरिंग और बाहरी कर्जों की देनदारी से जुड़ी 2 नई शर्तें जोड़ी हैं। सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नई शर्तें पहले बनी सहमति से ठीक उलट हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार अब मांग कर रही है कि ऑपरेशनल घाटे को दिल्ली और केंद्र बराबर-बराबर वहन करें। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने एक और शर्त जोड़ी है कि अगर डीएमआरसी कर्जों को चुकाने में नाकाम रही तो केजरीवाल सरकार किसी भी बाहरी कर्ज का भुगतान नहीं करेगी।

  • मेट्रो फेज-4 के लिए अब दिल्ली सरकार ने 2 नई शर्तें जोड़ी हैं, जो पिछली सहमति से उलट हैं।

  • पहली नई शर्त ऑपरेशन घाटा को दिल्ली -केंद्र में 50-50 बांटने की है, पहले दिल्ली की थी जिम्मेदारी।

  • दूसरी शर्त के मुताबिक डीएमआरसी अगर कर्ज चुकाने में नाकाम रही तो दिल्ली नहीं चुकाएगी बाहरी कर्ज।

जब केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी से यह पूछा गया कि दिल्ली कैबिनेट ने जब प्रॉजेक्ट को मंजूरी दे दी है तो केंद्र से मंजूरी में इसे कितना वक्त लगेगा? उनका जवाब था कि मंत्रालय को केजरीवाल सरकार की तरफ से प्रस्ताव मिल चुका है और अभी उसका अध्ययन किया जा रहा है। फेज-4 के निर्माण का कार्य शुरू होने के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी है।
पुरी ने इतना ही बताया कि उन्हें दिल्ली सरकार की तरफ से प्रस्ताव मिल गया है, लेकिन प्रस्ताव में क्या-क्या है इसका विवरण उन्होंने नहीं दिया।

वहीं, सूत्रों ने बताया कि दिल्ली सरकार मेट्रो के विस्तार में अपना हिस्सा चुकाने को सहमत हो चुकी है। लेकिन, उसने नई शर्तें भी जोड़ दी हैं जिस पर सहमति बनना करीब-करीब नामुमकिन दिख रहा है। दिल्ली सरकार कह चुकी है कि वह किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई नहीं करेगी और यह पूरी तरह केंद्र की जिम्मेदारी है।दरअसल, विदेशी कर्जों के मामले में फॉरन एक्सचेंज मार्केट में उतार-चढ़ाव की वजह से करंसी लॉस का जोखिम है। अभी तक केंद्र और दिल्ली सरकार करंसी लॉसेज को बराबर-बराबर शेयर करने पर सहमत थीं।

हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को पता चला है कि डीएमआरसी के पहले और दूसरे फेज में ऑपरेशनल लॉसेज को लेकर 50-50 का मानक था। लेकिन तीसरे फेज में यह बदल गया। एक अन्य अधिकारी ने बताया, ‘तीसरे फेज में, दिल्ली सरकार को समूचे ऑपरेशनल लॉस को वहन करना था। इस मानक का सभी मेट्रो प्रॉजेक्ट्स में लागू करना था। अभी तक डीएमआरसी को कभी भी ऑपरेशनल लॉस नहीं हुआ है।’

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