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राम कुमार गौतम V/S डॉ अजय चौधरी V/S कैप्टन अभिमन्यु के बीच होगी काटें की टक्कर !

नारनौंद से विधायक वित्त मंत्री कैप्टन को अपनी कुर्सी बचाना होगा मुश्किल!

लोकसभा चुनाव में कैप्टन के ही विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को मिली थी हार

कैप्टन के प्रति जनता का रोष खतरे की घंटी

4 दशकों से राजनीति में सक्रीय राम कुमार गौतम क्या जजपा का खोलेगी खाता !

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे

पूर्व विधायक रहे रामकुमार गौतम को जननायक जनता पार्टी ने पार्टी में सबसे अहम जिम्मेदारी देते हुए जननायक जनता पार्टी की तरफ से उपाध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया था। रामकुमार गौतम वही शख्स है जिन्होंने नारनौंद में जननायक जनता पार्टी के उम्मीदवार दुष्यंत चौटाला को नारनौंद से लोकसभा चुनाव में बढ़त दिलवाने का काम किया।

बता दे कि पंडित रामकुमार गौतम जो खुद नारनौंद के रहने वाले हंै वो यही से भारतीय जनता पार्टी की टिकट से एक बार विधायक बन चुके हैं। राजनीति में 4 दशकों से सक्रीय रामकुमार गौतम जब भाजपा में थे तब वह भाजपा विधायक दल के नेता और भाजपा राष्ट्रिय कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे थे।

मगर अब दुष्यंत से रामकुमार गौतम को उपाध्यक्ष बनाकर उन्हें न केवल सम्मान दिया बल्कि नारनौंद से दावेदारी देकर उन्हें मजबूती के साथ उस विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी जहां से दुष्यंत पिछले 2019 लोकसभा चुनाव में 3030 वोटो से जीत कर आये थे। जिसके चलते यह उम्मीद जताई जा रही है कि हो सकता रामकुमार गौतम अपने खुद के रसूक और काम के दम पर यहां से जजपा के लिए आसानी से जीत दर्ज करवाकर आएंगे।

कुमारी शैलजा के ओएसडी रहे डॉ. अजय चौधरी क्या कैप्टन के छुड़ाएंगे पसीने

डॉ.अजय चौधरी
डॉ.अजय चौधरी

बता दें कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा
एक्शन मोड में आ गई हैं और उनके तेजतर्रार कार्यो की झलक उनके फैसलों से ली जा रही हैं। हाल में उन्होंने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में बदलाव शुरू कर दिया है और एक लम्बे समय से खाली पड़े एक पद पर शैलजा ने अशोक तंवर के समर्थक को हटाकर अपने समर्थक की नियुक्ति की है।

कुमारी शैलजा ने डॉ़ अजय चौधरी को जनरल सेक्रेटरी (इंचार्ज) प्रदेश मुख्यालय नियुक्त किया है। बता दें कि यूपीए सरकार में जब शैलजा केंद्रीय मंत्री थीं, तो उस समय डॉ़ अजय चौधरी उनके ओएसडी हुआ करते थे। अजय के पिता वीरेंद्र सिंह नारनौंदिया हिसार जिले के नारनौंद हलके से विधायक रहे हैं।

इसलिए अचानक हुई इस नियुक्ति को एक सोच और रणनीति के तहत देखा जा रहा है माना जा रहा है कि पार्टी अजय चौधरी को नारनौंद से विधानसभा चुनाव भी लड़वा सकती है। बता दे कि डॉ अजय चौधरी वही शख्स है जिनका नाम मिर्चपुर काण्ड में गवाहों के साथ “जालसाजी, आपराधिक धमकी, और आपराधिक साजिश रचने” का में सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार उन्हें मिर्चपुर काण्ड में कुमारी शैलजा के साथ डॉ अजय चौधरी को पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया था।

कौन है रामकुमार गौतम

रामकुमार गौतम
रामकुमार गौतम

रामकुमार गौतम को माना जाता हैं कि वह भजनलाल के बेहद खासमखास रहे हैं । जिन्होंने 1991 में पहली बार हरियाणा से जाट आरक्षण को खत्म करवाया था। भारत भूषण शर्मा और रामकुमार गौतम ने सुप्रीम कोर्ट में जाकर यह आरक्षण ख़त्म करवाया था। मिडिया रिपोर्ट के अनुसार 2005 में भाजपा की टिकट से विधायक बने रामकुमार गौतम ने भाजपा पार्टी को यह कहकर अलविदा किया था कि भाजपा ने राक्षसों वाली पार्टी (इनेलो) से हाथ मिलाया था।

रामकुमार गौतम कांग्रेस में शामिल हुए और 2009 के विधानसभा चुनाव में वह इनेलो की महिला उम्मीदवार सरोज से तकरीबन 10 हजार वोट से हार गए। हालाँकि रामकुमार गौतम का नाम कांग्रेस में रहते हुए भ्रष्टाचार के मामले में भी लिया गया था। बताया जाता हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक डीपीएस नागल, तत्कालीन मुख्य वित्तीय नियंत्रक एससी कांसल व हुडा के तत्कालीन उप अधीक्षक बीबी तनेजा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

हुडा के पदेन अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा थे और उस समय हरियाणा के मुख़्यमंत्री भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा थे, इसलिए उनके खिलाफ भी मामला दर्ज करवाया गया। आरोप है की हुड्डा के मुख्यमंत्री रहते हुए जिन 14 औद्योगिक प्लॉट का आवंटन कानून को ताक पर रखकर जिन चहेतो को दिया गया था, उसमें रामकुमार गौतम के रिश्तेदार का भी नाम बताया जाता है।

वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के हलके से भाजपा की हार क्या विधानसभा चुनाव में भी रहेगी बरकरार !

वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु

बता दें कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी की टिकट से चुनाव लड़ने वाले कैप्टन अभिमन्यु को 2014 में नारनौंद की जनता ने मोदी लहर में 5,761 वोटो से जितवाकर विधायक बनाया। आते ही उन्हें सरकार ने वित्त मंत्री पद की अहम जिम्मेदारी दी। मगर लगता है कि इस बार 2019 में लोकसभा चुनाव के नतीजों ने कैप्टन अभिमन्यु के सामने उनकी खुद की जीत को बचा पाने की बहुत बड़ी चुनौती कड़ी कर दी है।

यह सब इसलिए क्योंकि नारनौंद की अधिकतर जनता मानती है कि चुनाव जितने के बाद से कैप्टन अभिमन्यु ने नारनौंद की सुध नहीं ली, जितना उन्होंने चुनाव जितने के पहले वादा किया था। आज भी नारनौंद के कई गांवो में बिजली और नहरी पानी की समस्या चले आ रही है। लोगो का तो यहां तक मानना है कि हमने चुनाव में सिर्फ नरेंद्र मोदी का चेहरा देखकर वोट दिया था, मगर इस बार भाजपा के वर्तमान विधायक का सफाया किया जाएगा।

बता दें कि जाट आरक्षण आंदोलन के मामलों के अलावा, लोकसभा चुनाव में उनके ही हलके में बृजेन्द्र सिंह को लोगों के रोष का सामना करना पड़ा था। इतना ही नहीं जो भाजपा प्रत्याशी मोदी लहर में लाखों और हज़ारों संख्या के वोटों से जीत कर आये, मगर भाजपा के ही कद्दावर नेता कैप्टन अभिमन्यु अपने हलके से ही भाजपा को जीत नहीं दिलवा पाए। जो कैप्टन अभिमन्यु के लिए खतरे की घंटी के अलावा और कुछ नहीं हैं।

कौन है डॉ.अजय चौधरी

डॉ.अजय चौधरी हिसार के एमबीबीएस और एमडी (Medicine) डिग्रीधारी सुप्रसिद्ध चिकित्सक हैं| चिकित्सा सेवा के अतिरिक्त कांग्रेस पार्टी के माध्यम से वह राजनीति में पूर्ण रूप से सक्रिय रहे हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा के विश्वासपात्र माने जाने वाले डॉ.अजय चौधरी हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव के पद व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं।

डॉ. अजय चौधरी को राजनीति गुर विरासत में मिले क्योंकि उनके पिता चौ. वीरेंदर सिंह ने चुनाव में ऐसे ऐसे धुरंधरों को हराया जिसके चलते आज भी उनके पिता का नाम इतिहास के पन्नो पर दर्ज है। अजय के पिता चौधरी वीरेंदर सिंह ने वकालत की डिग्री प्राप्त करके वकालत करने की शुरुआत की। मगर राजनीति के माध्यम से समसजसेवा करने की इच्छा उन्हें राजनीति में खिंच ले आयी। 1967 में उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव जनसंघ से लड़ा। इसके बाद 1977 में नौरनौंद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर वह विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वे लगातार चार बार विधायक बने।

1977 में और 1987 में तत्कालीन लोकदल व जनता पार्टी की सरकारों में कैबिनेट के मंत्री रहे। वे चौ. देवीलाल के प्रमुख सहयोगी थे। परन्तु लोकदल के साथ मनमुटाव होने के कारण इससे 1989 में अलग हो गए और 1991 का विधानसभा का चुनाव जनता दल से लड़ा और एकबार फिर विजयी रहे। 1993 -94 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और चौ. भजनलाल के मंत्रिमंडल में उन्हें बिजली मंत्री के तौर पर शामिल किया गया। 3 अक्टूबर सन 2000 को ह्रदय घात के कारण वे पंचतत्व में विलीन हो गए।

उसी परिवार में जन्मे डॉ.अजय चौधरी सन 2000 में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने। सन 2005 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में नारनौंद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी का टिकट प्राप्त कर चुनाव लड़ा परन्तु दुर्भाग्यवश सफलता हाथ नहीं लगी। लेकिन लगातार कांग्रेस पार्टी के लिए कार्य करते रहे। 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान अंबाला लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की ओर से चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी सौपी गयी। तत्पश्चात इन्हें केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के विशेष कार्यकारी अधिकारी (ओएसडी) के रूप में नियुक्त किया गया। 2016 में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव बनाया गया तथा 2017 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया। उनके इसी राजनितिक कद को देखते हुए हो सकता है कुमारी शैलजा सुशिक्षित और भरोसेमंद डॉ. अजय चौधरी को नारनौंद से उम्मीदवारी दें।

2014 में मिले वोट :

नारनौंद
दुष्यंत – 81687
कुलदीप – 39303
संपत – 13351

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