माइ ड्रीम सिटी

समाज को अंधविश्वास के गिरफ्त से बाहर निकले कि जरुरत है

आज भी लोगों की वही सोच बनी हुई है जो पहले थी वैज्ञानिक तकनिकी आने के बाद भी वही नजर आता है। कही ना कही लोग अब भी अंधविश्वास पर भरोसा करते है। आज के समय भी लोग भुत प्रेतों पर काफी विश्वास करते है। शहरों या गांव मे बाबा बन कर हाथ मे माला ले कर घरो मे आते है। आज भी हमे ऐसे दिखता है कि लोग बाबाओं पर ज्यादा विश्वास करते है। आज भी कई ऐसे माता पिता है जो अपने बच्चों को बीमार होने पर डॉक्टरों कि जगह बाबाओ के पास झाड़ फूंक लगवाने के लिए जाते है और डॉक्टर की दी हुई दवाईयों पर नहीं उन बाबाओं के बताये हुए टूने टोटको पर ज्यादा विश्वास करते है।

उनको झाड़ फूक लगवाने से या टूने टोटके करते ही उनके बच्चों की बीमारी ठीक हो जाती है क्योंकि उन्हें विश्वास है की बाबा के बताये हुए काम सही होंगे तो जल्दी ठीक हो जायेगा।अगर इतना विश्वास डॉक्टरों की बताई हुई बातों पर करे और दवाई समय पर ले तो इलाज जल्दी हो जाता है और ये सिर्फ पैसे के लिए लोगों को पागल बनाते रहते है। ये बाबाओं की कमायी ऐसे ही होती है। हमें लोगों को अंध विश्वास से बाहर निकालने के लिए लोगों को जागरूक करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी भी अंध विश्वासों पर ज्यादा विश्वास न करें और हमे बाबाओं पर ज्यादा विश्वास नहीं करना चाहिए।

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