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संयमित वाणी होगी तो कभी नहि हानि होगी॥

माँ: अपने आप में सम्पूर्णता लिए हुए एक शब्द।

हिसार टुडे

माँ: अपने आप में सम्पूर्णता लिए हुए एक शब्द। इस शब्द की व्याख्या करना बहुत कठिन हैं या ऐसा कहूँ की नामुमकिन हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहि होगी। माँ होती हीं ऐसी हैं, की उनकी महिमा का बखान करने लगे तो,शब्दकोश कम पड़ जाएगा।माँ में प्यार हैं, गुस्सा हैं, ममता हैं, दुलार हैं, क्या-क्या कहूँ। माँ होती हैं तो घर में रौनक़ होती हैं,माँ होती हैं तो….एक शब्द में कहूँ तो माँ घर की नीब होती हैं।

लक्ष्य- जब आप कोई लक्ष्य बनाते हैं तो आप उसके लिए अलग से मेहनत भी करते हैं। लक्ष्य बड़ा हैं तो मेहनत भी बड़ी लगेगी और उसके लिए परिश्रम भी पहले से ज़्यादा करना पड़ेगा।उसके लिए अपने बनाए हुए आरामदायक दैनिक दिनचर्या से बाहर निकलना पड़ेगा।

लक्ष्य को भेदने में रातों की नींद,सुकून,चैन सबको परिश्रम की भट्टी में झोंकना पड़ता हैं तब जाकर लक्ष्य को भेदने वाला अस्त्र तेयार होता हैं। आलस्य और काम करने का ढुल-मुल रवैया,ये बाधक हैं, ये लक्ष्य को आपसे दूर लेकर जाएँगे। इसलिए लक्ष्य को केन्द्र मे रखकर, उसको पाने के लिए भरकस मेहनत मे जुट जाओं। विजय निश्चित होगी।

वाणी- वाणी में सरस्वती का वास होता हैं। ये आपके द्वारा उपयोग किए गए शब्द और आपकी ऊर्जा का मिश्रित रूप हैं। ये आपको पल भर में सबका प्यारा बना देती हैं और दूसरे हीं छन आपको सबसे बुरा बना देती हैं।

ऐसा आपके द्वारा उपयोग किए गए शब्दों के कारण और उसमें समाहित भाव के कारण होता हैं। कहा भी गया हैं-पहले तोलों फिर बोलों, इसलिए बोलते समय व्यक्ति को विशेष ध्यान और सतर्कता बरतनी चाहिए। क्योंकि गिर कर लगे घाव तो मरहम से भर जाते हैं पर वाणी रूपी त्रिशूल से लगे घाव मनुष्य को अंदर तक छलनी कर जाते हैं।

संयमित वाणी होगी
तो कभी नहि हानि होगी॥
कभी कभी मन में आता हैं तो अपने विचारों को शब्दों का रूप दे देता हुँ सोचा आज आप सभी बंधुओ के साथ बाँटू…🙏🏻

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