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चौटाला का दीपेंद्र पर प्रेम, कहीं आगामी चुनाव के शतरंज की बिसात तो नही!

जाट मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिशें शुरू

हिसार टुडे

विधानसभा में कांग्रेस और इनेलो का बचाव “महागठबंधन” से मुमकिन?
मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान देकर ओ.पी.चौटाला ने दी मजबूत दहाड़

अर्चना त्रिपाठी | हिसार

भाजपा को लोकसभा चुनाव में मैदान फतेह करने में आसानी इसीलिए हुई, क्योंकि हरियाणा का विपक्ष बिखरा हुआ था। सब यहां अपनी पार्टी का अस्तित्व बचाने और अपनी सीट निकलवाने की जोड़तोड़ कर रहे थे। जब विपक्ष ही बिखरा हो तो प्रतिस्पर्धा कहां रह जाती है।
इस चुनाव में सबसे ज्यादा दुर्गती हुई वह है हरियाणा की सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टी इनेलो की।

हर जगह जमानत जब्त के साथ इनेलो ने इतना खराब प्रदर्शन किया जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। इतना ही नहीं जो जाट मतदाता इनेलो के साथ जुड़ा हुआ था उस जाट वोटों का भी विभाजन इनेलो की डूबती नैया का कारण बना। यही कारण है कि जब 23 के नतीजों के बाद पैरोल में इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला बाहर आये तो उन्होंने एक तीर से 2 निशाने किये।

एक मजबूत विपक्ष की आवाज क्या होती है यह दिखाते हुए न केवल उन्होंने आते ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर आपत्तिजनक बयान दिए तो वहीं ठीक दूसरी तरफ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा के लिए नरम रुख अख्तियार कर कहा कि दीपंेद्र हुड्डा एक मिलनसार नेता है और वह भी हार गया।

उनके इस वक्तत्व से एक बात तो तय होती है की राजनीति के पक्के खिलाड़ी ओमप्रकाश चौटाला के यह बयान किसी आगामी राजनीति की पटकथा लिख रहे हैं। कुछ लोग उनके इस बयान को महज एक बयान की तरह मान रहे हैं मगर हकीकत तो यही है कि उनके यह बयान विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस +इनेलो गठबंधन की तरफ संकेत तो नहीं दे रहे।

जब भाजपा ने इनेलो से गठबंधन कर खुद का अस्तित्व बना लिया, बसपा ने बुरे वक्त पर इनेलो का साथ छोड़ दिया। ऐसे में इनेलो को विधानसभा चुनाव के पहले अगर खुद की पार्टी को बचाकर रखना है तो किसी महागठबंधन की तरफ इशारा कर रहा था। हो सकता है कि आगामी चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए चौधरी ओमप्रकाश चौटाला एक नयी पटकथा लिखने जा रहे हैं, जिसमें दीपेंद्र हुड्डा अहम रोल अदा कर सकते हैं।

कांग्रेस और इनेलो की डूबती नैय्या, क्या गठबंधन से पडे़गी पार

बता दें कि इस लोकसभा चुनाव में एक बात साफ दिखाई दी कि अब कांग्रेस अपने बुरे दौर से होकर गुजर रही है और इनेलो का भी हाल कुछ ठीक नहीं। ऐसे में कयास यह लगाए जा रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव के पहले ऐसा कुछ कदम उठाना होगा, जिससे कांग्रेस हरयाणा में अपनी दुबारा वापसी कर पाए। हालांकि जानकार मानते हैं कि जब तक अशोक तंवर प्रदेशाध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे तब तक कांग्रेस की स्थिती सुधरने वाली नहीं है।

मगर ऐसे में फिर कौन सा कांग्रेस नेता प्रदेशाध्यक्ष के लिए उपयुक्त है। राजनीतिक पंडितो का मानना है कि दीपेंद्र हुड्डा ने जिस प्रकार भाजपा की पूरी शक्ति के सामने चुनाव में कड़ी टक्कर दी। वह केंद्र के नजरों में भी दिखाई दी। इतना ही नहीं जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा प्रदेशाध्यक्ष के पद पर टकटकी लगाए बैठे थे लोकसभा चुनाव में जनता ने उन्हें नकार दिया। इतना ही नहीं पार्टी हाईकमान भी किसी भी हालत में भूपेंद्र हुड्डा को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के मूड में नहीं है।

ऐसे में 23 तारीख के नतीजों के बाद चर्चा हो रही है क्यों न दीपेंद्र हुड्डा जैसे युवा चहेरे को प्रदेशाध्यक्ष पद कि जिम्मेदारी दी जाए। इतना ही नहीं दीपेंद्र हुड्डा ने भी खुद अपने कार्यकर्ताओं से बैठकों का दौर भी शुरू कर दिया है। ऐसे समय में जहां दीपेंद्र हुड्डा को प्रदेशाध्यक्ष बनाने की चर्चा चल रही थी।

ऐसे समय पर इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने दीपेंद्र की हार पर अफसोस जताते हुए उनकी तारीफ की कि वह एक मिलनसार नेता है, अच्छा काम करता है वह भी हार गया।

इस वक्तत्व के साथ जहां ओमप्रकाश चौटाला बदलती राजनीति की तरफ इशारा करते हुए यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि आगामी भविष्य में संभावनाएं कुछ भी हो सकती हैं। वहीं इतने बड़े नेता का यह बयान आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और इनेलो के गठबंधन होने की सम्भावनाओं की तरफ भी इशारा कर रहा है।

जाट मतदाताओं को एकत्रित करने की कवायद शुरू

बता दें कि एक जमाने में मतदाताओं की पहली पसंद इनेलो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के आगमन के साथ बात गई थी। 10 साल तक हुड्डा जब तक सत्ता में रहे जाट मतदाताओं ने उन्हें भर-भर कर वोट दिया, इतना ही नहीं जिस सोनीपत बेल्ट में कभी इनेलो के वोटर्स थे उसे भी हुड्डा अपने खेमे में करने में कामयाब हो गए थे।

मगर इस बार हुड्डा परिवार जिन वोटरों के भरोसे बैठे थे उनपर भाजपा ने लोकसभा में सेंध लगा दी। इतना ही नहीं एक सन्देश यह भी गया कि जाट मतदाता भी किसी सक्षम नेतृत्व की तलाश कर रहे थे। इतना ही नहीं मोदी मंत्रिमंडल में नॉन जाट सांसदों को मंत्रिमंडल में जगह देने से भी हर जगह चर्चाओं के बाजार गर्म होने लगे कि आगामी चुनाव में भी कहीं जाट-नॉन जाट का मुद्दा हावी न रहे।

यही कारण है कि जाट मतदाताओं को रिझाने के लिए इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने दुबारा से जाट मतदाताओं को एक करने की कवायद शुरू कर दी है और इसमें वह हुड्डा की तरफ चटके जाट मतदाताओं को दुबारा इनेलो में जोड़ने का प्रयास करने लगे हैं। अगर ओमप्रकाश चौटाला ऐसा करने में कामयाब होते हैं तो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने बड़ी मुसीबत पैदा हो सकती है।

ओमप्रकाश चौटाला के तेवर से बसपा, लोसुपा और जजपा की मुसीबत बढ़ी

बता दें कि अगर ओमप्रकाश चौटाला कांग्रेस को साथ लेकर, जाट मतदाताओं को एकजुट कर विधानसभा की आगामी रणनीति लिखते हैं तो यह कुछ पार्टियों के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं। बता दें कि इनेलो के साथ गठबंधन करके ही भाजपा अस्तित्व में आई और अपना खाता खोल पायी थी, इतना ही नहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इनेलो से गठबंधन कर हरियाणा की राजनीति में अहम भूमिका निभाने का काम किया था।

मगर कहा जाता है कि जब हित सबका पूरा हुआ तो सभी ने इनेलो का साथ छोड़ दिया। यही कारण है कि भविष्यगामी राजनीति को देखते हुए हो सकता है कि इनेलो कांग्रेस से हाथ मिलाये और भाजपा के साथ बसपा-लोसुपा और जजपा को भी मुसीबत में डाल सकते हैं। इतना ही नहीं आते ही जिस प्रकार से ओपी चौटाला ने मुख्यमंत्री खट्टर पर प्रहार किया वह तेवर भी यह संकेत दे रहे हैं कि शेर अभी तब बूढ़ा नहीं हुआ।

विधानसभा चुनाव के पहले चौटाला आ जायेंगे बाहर!

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चौटाला ने कहा है कि हरियाणा विधानसभा के चुनाव अक्टूबर माह में प्रस्तावित हैं जिनसे पहले “मैं आपके बीच आ जाऊंगा।” उन्होंने बताया कि आगामी आठ अगस्त को जेबीटी भर्ती घोटाला मामले में उनकी अदालत में पेशी है, जिसमें निर्णय उनके पक्ष में आने की उम्मीद है।

इतना ही नहीं चौटाला ने कहा कि आप जितनी ज्यादा मेहनत करोगे उतने ही बेहतर परिणाम आएंगे। यदि संगठन मजबूत होगा तो सत्ता आपके कदम चूमेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे पार्टी से नाराज होकर चले गए लोगों को दुबारा लाने की कोशिश करें, वहीं दूसरे दलों के अच्छे लोगों को भी इनेलो में शामिल करें।

इतना ही नहीं उन्होंने कड़े शब्दों में यह भी कहा कि सत्ता की मौज लूटने वाले लोगोंं को पार्टी में कभी शामिल नहीं किया जाएगा। आप लोगों ने दूसरे दलों की सत्ता देख ली है, इससे पहले इनेलो की सरकार भी आपने देखी। इनेलो शासन में जितने जनहित में अच्छे काम किए गए आज भी उनका मुकाबला नहीं है।

खट्टर को आपत्तिजनक बयान देकर ओपी चौटाला ने आगामी विधानसभा चुनाव के पहले राजनीति गर्मायी

 

14 दिन की पैरोल पर आए पूर्व मुख्यमंत्री एवं इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने फतेहाबाद ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में एक ओर जहां मौजूदा भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया, वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर आपत्तिजनक बयान दिया।

जवाब में मुख्यमंत्री खट्टर भी कहा पीछे रहने वाले थे उन्होंने ट्वीट कर जवाब देते हुए कहा कि “ओमप्रकाश चौटाला जी आपकी इसी अमर्यादित भाषा की वजह से जनता ने आपको सबक सिखाया है।

आप मर्यादा तोड़ सकते हैं लेकिन मेरी शिक्षा ऐसी नहीं है। भगवान से यही प्रार्थना करूंगा कि वे आपको सद्बुद्धि दें और आपकी उम्र लंबी करे।” आते ही इस प्रकार की गर्म राजनीति ने यह संकेत दे दिए हैं कि ओपी चौटाला अपने पुराने रूप में अधिक ताकत और मजबूत विपक्ष का परिचय देते हुए विधानसभा चुनाव के पहले इनेलो को दुबारा खड़ा करने का साहस दिखाएंगे।

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