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कांटा बन सकता है गले की फांस (Video)

गुटबाजी के कारण ही अशोक तंवर का बतौर प्रदेशाध्यक्ष कार्य रहा कमजोर

हिसार टुडे |

  • हुड्डा की शर्मनाक हार और सीबीआई मामलों के कारण हुड्डा की नहीं बनेगी बात
  • सुरजेवाला काे राहुल का विश्वासपात्र होने का मिलेगा फायदा
  • अशोक तंवर ने विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला लेकर पार्टी पर बनाया दबाव

अर्चना त्रिपाठी | हिसार

एक तरफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर मिशन 70 के दिशा में आगे बढ़ते हुए लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 सीटें भाजपा की झोली में आने से गद‍गद‍ होते हुए अब इस जीत में प्रदेश से लेकर बूथ और पन्ना प्रमुख स्तर तक अहम भूमिका निभा चुके पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करने के लिए कार्यकर्ता अभिनंदन समारोह का लगातार आयोजन कर प्रदेश में भाजपा के प्रति माहौल बनाने का काम करने जा रहे हैं। मगर ठीक दूसरी तरफ हरियाणा की राजनीति में ऐसी उथल पुथल होने जा रही है शायद जिसका अंदाजा कांग्रेस को भी नहीं है।

फिलहाल कांग्रेस में चर्चायंे यही चल रही हैं कि 4 तारीख को क्या होगा? क्या प्रदेशाध्यक्ष पर फैसला होगा? क्योंकि सूत्रों का मानना है कि इस बार राहुल गांधी अपने सबसे विश्वासपात्र को प्रदेशाध्यक्ष बनाने की होड़ में लगे हैं। यह चर्चित चेहरा कौन है यह बताने के लिए आपको याद करना होगा जींद उपचुनाव।

जी हां जींद उपचुनाव के दौरान हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेता जिसे “कांटा निकल गया” समझ रहे थे अब हो सकता है कि वही कांटा अब कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को जोरदार चुभने वाला है। हिसार टुडे ने लोकसभा चुनाव के पहले इस बात के संकेत दे दिए थे कि लोकसभा में सभी दिग्गजों को चुनाव में उतार कर राहुल गांधी न केवल उन नेताओं के दमखम का आकलन करने के बाद प्रदेशाध्यक्ष को लेकर कोई फैसला करेंगे, बल्कि वह इसके साथ रणदीप सुरजेवाला के लिए भी रास्ता साफ करने का प्रयास कर रहे हैं।

ऐसे में लोकसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद राहुल गांधी ने पूरी तरह से कड़क रुख अखितयार करते हुए हरियाणा कांग्रेस में बढ़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। हो सकता है कि गुटबाजी और कमजोर संगठन का शिकार हरियाणा कांग्रेस में एकजुटता बरकरार रखने के मकसद से पार्टी हाई कमान रणदीप सुरजेवाला के नाम पर मुहर लगा सकता है। हो सकता है 4 जून को दिल्ली में होने वाली बैठक में इस नाम पर मुहर लग जाए। हालांकि दीपेंद्र हुड्डा, कुलदीप बिश्नोई, कुमारी शैलजा भी इस दौड़ में शामिल हैं मगर अभी अंतिम निर्णय राहुल को ही लेना है।

हार के बाद नेता ने अपनी हार के लिए कमजोर संगठन को ठहराया जिम्मेदार

लोकसभा में हार के बाद मंथन में निकली हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेता और 2 बार मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा जो चुनाव के पहले से ही अशोक तंवर को निकालने के लिए पार्टी हाईकमान से मांग करते आ रहे थे और चाहते थे कि पार्टी उनके नाम पर मुहर लगाए ताकि कांग्रेस चुनाव में मजबूती से खड़ा रह सके।

मगर राहुल गांधी उनसे दो कदम आगे थे उन्होंने सीधा उन्ही को सोनीपत से मैदान में उतार दिया। उन्हें यह लगा कि शायद भूपेंद्र हुड्डा अपना जितना दम दिखते है शायद वह लोकसभा चुनाव में वह दम दिखा सके। मगर भूपेंद्र हुड्डा भाजपा के प्रत्याशी रमेश कौशिक से 1,64,864 वोटों से पराजित हो गए।

इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता चुनाव लड़े। सभी की हार हुई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तो इस हार का कारण राज्य कांग्रेस में संगठन की कमी को बताया। यही कारण है कि राहुल गांधी को लगता है कि बिना संगठन में बदलाव के पार्टी को हरियाणा में भाजपा की टक्कर में खड़े रखना नामुमकिन है, इसलिए किसी सर्वमान्य नेता को संगठन की बागडोर सौंपी जानी चाहिए। वैसे हुड्डा समर्थक विधायकों की प्रदेश अध्यक्ष पद पर लंबे समय से निगाह है। इसके लिए वे पिछले कई सालों से लाबिंग भी कर रहे हैं।

गुटबाजी के कारण ही अशोक तंवर का बतौर प्रदेशाध्यक्ष कार्य रहा कमजोर

हरियाणा कांग्रेस के मौजूदा प्रधान डॉ. अशोक तंवर पिछले पांच सालों में आज तक जिला व ब्लाक स्तर का संगठन नहीं खड़ा कर पाए हैं। अशोक तंवर ने इसके लिए कई बार कोशिश की, मगर उनके विरोधी नेताओं ने तंवर के प्रयासों को इसलिए सिरे नहीं चढऩे दिया। क्योंकि लिस्ट में कांग्रेस नेताओं के कुछ गुटों को भरपूर तथा वाजिब हिस्सेदारी नहीं दी गई थी। यही कारण है कि अशोक तंवर चाहते हुए भी कुछ कर नहीं पाए।

रणदीप सुरजेवाला को प्रदेशाध्यक्ष बनाने की गुंजाईश ज्यादा क्यों?

रणदीप सुरजेवाला राहुल गांधी के कोर कमेटी के महत्वपूर्ण सदस्य और विश्वासपात्र के रूप में जाने जाते हैं। राहुल गांधी के कहने पर वह बिना कुछ कहे जींद उपचुनाव में लड़ने का फैसला किया। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने कड़े तेवर दिखाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सम्पूर्ण भाजपा को अकेले संभाला।

चुनाव आयोग हो या पत्रकार परिषद् हर जगह रणदीप सुरजेवाला अपने दम पर न केवल कांग्रेस का पक्ष रखते रहे बल्कि राहुल गांधी पर लगे हर आरोप का भी बखूबी जवाब देते रहे। इतना ही नहीं माना जाता है कि केंद्रीय में सक्रीय राजनीति में रणदीप सुरजेवाला का हर पार्टी नेताओं से अच्छे मधुर सम्बन्ध है।

इतना ही नहीं हरियाणा कांग्रेस में भी उनकी छवि बेहतर और मजबूत होने के कारण राहुल गांधी को विश्वास है कि हरियाणा में कांग्रेस संगठन को मजबूत अगर करना है तो यह काम रणदीप ही कर पाएंगे क्योंकि राहुल से सीधे पहुंच के कारण हरियाणा कांग्रेस में उन्हें किसी का विरोध शायद नहीं झेलना पड़ेगा। इसलिए माना जा रहा है कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर रणदीप सुरजेवाला के नाम पर मुहर लग सकती है।

माना जा रहा है कि हाईकमान के सामने भी प्रस्ताव दिया गया कि रणदीप सुरजेवाला राज्य के तमाम राजनीतिक मिजाज से वाकिफ हैं और वे भाजपा को मजबूती के साथ टक्कर देकर गुटों में बंटे सभी नेताओं को साथ लेकर चल सकते हैं। लिहाजा उन्हें प्रधान पद सौंप दिया जाए।

भूपेंद्र हुड्डा की नहीं गलेगी दाल

बड़ी ताकत और मजबूत पकड़ का दावा करने वाले हुड्डा को राहुल गांधी प्रदेशाध्यक्ष बनाने के मूड में नहीं है, इतना ही नहीं जमीन घोटालों के मामले और सीबीआई के मामले में फंसा होना भी भूपेंद्र हुड्डा के लिए पप्रदेशाध्यक्ष पद मिलना मुश्किल साबित हो रहा है। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव में भूपेंद्र हुड्डा की हार भी बड़ी वजह बनकर साबित हो सकती है। बता दंे कि रणदीप सुरजेवाला के साथ कुमारी शैलजा और कुलदीप बिश्नोई समेत दीपेंद्र हुड्डा का नाम प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में प्रमुखता से लिया जा रहा है।

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