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जींद उपचुनाव तय करेगा ‘जजपा’ की दशा व दिशा

जींद उपचुनाव में दुष्यंत और अभय का भविष्य दाव पर

महेश मेहता | हिसार

जींद उपचुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। यह चुनाव जहां भाजपा की लोकप्रियता को परखने का माध्यम बनेगा, वहीं यह इनेलो और जननायक जनता पार्टी के अस्तित्व का गवाह भी रहेगा। जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला के लिए जींद उपचुनाव उनके पार्टी गठन के बाद उनकी लोकप्रियता साबित करने को पहली परीक्षा बनकर साबित होगा। क्योंकि यह पहली बार होगा जब दुष्यंत चौटाला अपने पार्टी सिंबल पर अपना प्रत्याशी उतारेंगे। दुष्यंत चौटाला को यह साबित करना होगा कि क्या उनमें वो दमखम है कि वो खुद अपने चाचा की पार्टी से टक्कर लेकर बेहतर नतीजे ला सकते हैं या इन चुनावों में वो अपने चाचा के सामने घुटने टेक देंगे। यह सब कुछ निर्धारित करेगा जींद उपचुनाव। दुष्यंत चौटाला के लिए जींद उपचुनाव करो या मरो साबित होगा। मगर भाजपा भी चुप बैठने को तैयार नहीं उसने अपनी बाजी पहले ही खेल ली है।

फिलहाल यह कहना गलत नहीं होगा कि हरियाणा की राजनीति को दिशा देती आ रही जींद विधानसभा सीट पर भाजपा ने उपचुनाव की बाजी पलट दी है। दो बार इनेलो विधायक रह चुके डॉ. हरिचंद मिड्ढा के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर उपचुनाव फरवरी तक होने की संभावना जताई जा रही है। जाट एवं पंजाबी बाहुल्य जींद में भाजपा आज तक अपना खाता नहीं खोल पाई है, लेकिन उपचुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिवंगत विधायक हरिचंद मिड्ढा के बेटे कृष्ण मिड्ढा को भाजपा में शामिल कराकर बड़ा दांव खेल दिया है। कृष्ण मिड्ढा के भाजपा में शामिल होने से जहां प्रत्याशी की तलाश खत्म हो गई, वहीं इनेलो और कांग्रेस के लिए मजबूत उम्मीदवारों का चयन बड़ी चुनौती बन गया है। आम आदमी पार्टी के इस उपचुनाव में उतरने के कतई आसार नहीं हैं। ऐसे में भाजपा को सीधे टक्कर देने की तैयारी में इन दिनों दुष्यंत चौटाला है। जानकारों का मानना है कि भाजपा को चुनाव में कड़ी टक्कर देने के लिए कांग्रेस के पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक मांगेराम गुप्ता को दुष्यंत यहां से चुनाव में उतार सकते हैं। बता दें कि मांगेराम गुप्ता 2005 में कांग्रेस कार्यकाल में मंत्री भी रहे हैं।

अब जबकि अजय चौटाला और इनेलो के सर्वेसर्वा औमप्रकाश चौटाला जेल में थे तब दुष्यंत चौटाला ने 2014 लोकसभा चुनाव में अपने चुनाव प्रचार के लिए मांगेराम गुप्ता के पास जाकर उनका आशीर्वाद मांगा था और गुप्ता भी दुष्यंत के समर्थन में हिसार प्रचार के लिए आए थे। इस घनिष्ठ रिश्ते के चलते दुष्यंत चौटाला ने जींद उपचुनाव पर मांगेराम गुप्ता के नाम पर विचार कर रहे हैं। बता दें कि मांगेराम पहले भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं और उनकी अच्छी-खासी पकड़ इस क्षेत्र में होने के कारण उनकी दावेदारी मजबूत बताई जा रही है। इतना ही नहीं इनेलो में पिछली बार युवाध्यक्ष और जींद के प्रभारी प्रदीप गिल का नाम भी दौड़ में लिया जा रहा है। मगर हो सकता है अनुभव के आधार पर मांगेराम के नाम पर मोहर लगे। भाजपा के टिकट के दावेदारों में प्रदेश सचिव जवाहर सैनी, मुख्यमंत्री के निजी सचिव राजेश गोयल, अविनाश चावला और स्वामी राघवानंद का नाम भी शामिल हैं।

पूर्व विधायक मांगेराम गुप्ता को चुनाव में उतार सकते है दुष्यंत
इनेलो दिवंगत विधायक डॉ. हरिचंद मिड्ढा के बेटे कृष्ण मिड्ढा को अपना उम्मीदवार बना सकती थी, लेकिन उनके अचानक भाजपा में शामिल होने से बाजी पलट गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपनी कैबिनेट के कई मंत्रियों की मौजूदगी में कृष्ण मिड्ढा को भाजपा में शामिल कराया। पूर्व सांसद सुरेंद्र बरवाला भी हालांकि भाजपा के सशक्त उम्मीदवारों में शामिल हैं। पिछले चुनाव में बरवाला सिर्फ 2200 मतों से डॉ. हरिचंद मिड्ढा से पराजित हुए थे, लेकिन कृष्ण मिड्ढा की दावेदारी अधिक मजबूत नजर आ रही है। कृष्ण मिड्ढा को यदि उम्मीदवार नहीं बनाया गया तो डॉ. हरिचंद मिड्ढा के प्रभाव वाले मतों को हासिल करने के लिए उन्हें किसी बोर्ड अथवा निगम का चेयरमैन बनाया जा सकता है। विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री मनोहर लाल इनेलो के दिवंगत विधायक द्वारा पूछे गए तमाम सवालों के जवाब में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दे चुके हैं। मुख्यमंत्री के इस दांव पर विपक्षी दलों ने खूब हो-हल्ला मचाया था, मगर अब उससे भी बड़ा दांव खेल दिया गया है। बता देंं कि भाजपा के टिकट के दावेदारों में प्रदेश सचिव जवाहर सैनी, मुख्यमंत्री के निजी सचिव राजेश गोयल, अविनाश चावला और स्वामी राघवानंद भी शामिल हैं।

राजनीतिक दलों के लिए अग्निपरीक्षा होगी जींद उपचुनाव
भाजपा का जींद विधानसभा सीट पर ज्यादा मजबूत जनाधार कभी नहीं रहा है। इस सीट पर इनेलो और कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। 2014 को छोड़ दिया जाए तो भाजपा कभी जींद विधानसभा सीट के चुनाव में अपनी मजबूत उपस्थिति भी दर्ज नहीं करवा पाई है। इस लिहाज से जींद का उपचुनाव भाजपा और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के लिए उनके 4 साल के शासनकाल में सबसे कड़ी राजनीतिक चुनौती साबित होगा। मगर जब मुख्यमंत्री ने ऐन चुनाव के पूर्व स्वर्गीय मिड्ढा के बेटे को पार्टी में शामिल कर लिया उसके बाद से उनको उम्मीदवार की तलाश नहीं करनी पड़ेगी। अगर मुख्यमंत्री खट्टर के नेतृत्व में वह यहां भाजपा की सरकार लाने में कामयाब रहे तो 2019 के पूर्व भाजपा की स्थिति मजबूत बानी रहेगी।

जाट-नाॅन जाट की बराबरी की टक्कर है जींद में
जींद जिला जाट बाहुल्य माना जाता है और जींद शहरी सीट पर पंजाबियों का अधिक दबदबा है। केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह जींद जिले से ताल्लुक रखते हैं। उनकी धर्मपत्नी प्रेमलता जींद जिले के उचाना हलके से विधायक हैं। जींद जिले का काफी बड़ा हिस्सा इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला के हिसार संसदीय क्षेत्र में आता है। हरियाणा में अधिकतर राजनीतिक दल अपनी गतिविधियां जींद, रोहतक अथवा कुरुक्षेत्र से शुरू करते हैं। जींद को इनेलो का गढ़ माना जाता है। यहां पूर्व मुख्यमंत्री औमप्रकाश चौटाला का अच्छा खासा राजनीतिक दखल है। इनेलो में चल रही पारिवारिक कलह के बाद पार्टी के दो फाड़ होने के बाद मैदान में जननायक जनता पार्टी के चुनाव मैदान पर आ जाने से इसका अच्छा खासा असर जींद उपचुनाव में पड़ने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस और इनेलो में मजबूत दावेदारों की तलाश जारी
बता दें कि इनेलो और कांग्रेस अभी इस सियासी जमीन में अपने मजबूत प्रत्याशियों के बारे में विचार कर रही है। कांग्रेस के टिकट के दावेदारों में डॉ. अशोक तंवर के चहेते प्रमोद सहवाग, साथ ही सुधीर गौतम और अंशुल सिंगला के नाम आ रहे हैं। वही अब तक इनेलो से प्रदीप गिल का नाम लिया जा रहा है मगर वह दुष्यंत के समर्थक होने के नाते अब इस दौड़ में इनेलो अपने काबिल और मजबूत उम्मीदवार की तलाश कर रही है। यदि कांग्रेस एकजुट नहीं हुई तो फिर कांग्रेस की नैया रामभरोसे है।

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