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अपनी राजनीति चमकाने को नियमों की अनदेखी कर रही है ज्योति बैंदा: ममता शर्मा

नाबालिग लड़की को लेकर ये पूरा मामला उठा हुआ है, वह लड़की खुद आश्रम में नहीं रहना चाहती

हिसार  टुडे |

शैशव कुंज अनाथाश्रम मामले में राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की अध्यक्ष ज्योति बैंदा अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही है। अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में खुद ज्योति बैंदा और हिसार बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष पुनीत गर्ग जेजे एक्ट का खुला उल्लंघन कर रहे हैं और राज्य महिला एवं बाल विकास विभाग के सदस्य सचिव कम निदेशक के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।

शैशव कुंज अनाथाश्रम की इंचार्ज ममता शर्मा के अनुसार घर से भागी हुयी नाबालिक को आश्रम में रखने के मामले में वो साफ करना चाहती हैं कि हिसार से भाग कर मुम्बई में शादी करने वाली नाबालिग लडक़ी खुद आश्रम में नहीं रहना चाहती और उसे जबरदस्ती इस आश्रम में ठहराया गया है। दूसरा घर से भागी हुयी लड़कियों को आश्रम में नहीं भेजने के संबंध में आश्रम की तरफ से पिछले माह ही हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रार्थना की गयी थी। इस तरह की लड़कियों के आश्रम में रहने से यहां रह रही लड़कियों के मन पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। इसीलिए महिला एवं बाल विकास विभाग से घर से भागी हुयी लड़कियों को आश्रम में नहीं भेजने की गुजारिश की गयी थी, जिस पर विभाग के सदस्य सचिव कम निदेशक ने 18 जून को हिसार के चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरमैन को पत्र लिखकर साफ शब्दों में आदेश दिये थे कि घर से भागे हुए मामलों में लड़कियों शैशव कुंज (चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट) नहीं भेजा जाये, ताकि वहां की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।

शर्मा ने बताया कि इस मामले में ज्योति बैंदा और पुनीत गर्ग ने जेजे एक्ट की धज्जियां उड़ाई हैं। जब ज्योति बैंदा और पुनीत गर्ग अपनी टीम के साथ अनाथाश्रम में पहुंचे तो उनके साथ उनका सिक्योरिटी गॉर्ड पुलिस वर्दी में था और उसके पास हथियार भी था। वह सिक्योरिटी गार्ड तीन घंटे तक आश्रम में रहा और वीडियोग्राफी करता रहा। उसके अलावा अग्रोहा थाने से उनके साथ आये पुलिसकर्मी भी पुलिस वर्दी में तीन घंटे तक आश्रम में बैठे रहे। जबकि जेजे एक्ट में साफ लिखा है कि जेजे एक्ट के मामलों में कोई भी पुलिसकर्मी वर्दी में आश्रम में नहीं जायेगा।

इसी एक्ट के तहत अनाथाश्रम में वीडियोग्राफी भी वर्जित है। इस तरह ज्योति बैंदा व पुनीत गर्ग ने खुद जेजे एक्ट की धज्जियां उड़ाई हैं। वो ये सब सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने और झूठी वाहवाही लूटने के लिए कर रहे हैं। वहीं जिस नाबालिग लडक़ी को लेकर ये पूरा मामला उठा हुआ है, वह लडक़ी खुद आश्रम में नहीं रहना चाहती। इस सम्बंध में वो बाल कल्याण समिति हिसार को पत्र लिखकर कह चुकी हैं कि अगर वो आश्रम में रही तो अपने साथ कुछ भी गलत कर सकती है।

शैशवकुंज पूरी तरह से गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्था

ममता शर्मा के अनुसार शैशवकुंज पूरी तरह से गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्था है। ये संस्था सिर्फ समाज के दानी सज्जनों के भरोसे चल रही है। यहां जेजे एक्ट के हर नियमों का अच्छे से पालन किया जा रहा है। इस बात का सबूत है कि ज्योति बैंदा के दौरे दो दिन पहले ही जिला विधिक सेवा केन्द्र से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने आश्रम का औचक निरिक्षण किया था उन्हें यहां कोई अनियमितता नहीं मिली। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की तरफ से हर माह आश्रम का औचक निरिक्षण होता है। फिर भी ज्योति बैंदा व पुनीत गर्ग ने यहां पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर आश्रम में अनियमितताओं की बात कही। जबकि पुनीत गर्ग ने अपनी पूरी टीम के साथ 6 जुलाई को आश्रम का औचक निरक्षण किया था और लिखित में रिपोर्ट दी थी कि आश्रम में कोई अनियमितता नहीं है। शर्मा ने कहा कि ये एक गैर सरकारी संस्थान है और यहां सब अपनी मर्जी से सेवाएं दे रहे हैं। लोगों के दान से चलने वाले इस आश्रम में सभी व्यवस्थाओं की जांच के लिए दानी सज्जन समय-समय पर रिपोर्ट लेते रहते हैं। ऐसे में इस आश्रम में अनियमितताएं होने का सवाल ही नहीं उठता।

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