टुडे न्यूज़हिसार

डीएन कॉलेज में अक्षम्य लापरवाही

डीएन कॉलेज में विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा “डीएमसी”, 2 साल से लगा रहे चक्कर

मनोहर सरकार के राज में शिक्षण व्यवस्था चरमराई 

डीएन कॉलेज का मैनेजमेंट गहरी नींद में सोया और बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला

महेश मेहता | हिसार 

बच्चों के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार प्रदान करने की बड़ी-बड़ी बात करने वाली मनोहर लाल खट्टर सरकार के राज में आज हरियाणा में मानो जंगलराज और बिहार जैसी बद्द से बद्दतर शिक्षण प्रणाली हो गयी है। हिसार के बहुचर्चित “डीएन कॉलेज” का ही उदाहरण ले लीजिये यहां के बच्चे दूर दराज इलाकों से आकर यह सोच कर अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं कि शायद उनका भविष्य सुधरेगा और उन्हें आगे चलकर सरकारी नौकरी और विभिन्न कोर्सेस करके विदेश जाने का मौका मिलेगा, मगर इन बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए आज “डीएन कॉलेज” में लापरवाई का आलम यह है कि विद्यार्थी फाइनल ईयर की परीक्षा दे रहे हैं मगर उनको अब तक फर्स्ट ईयर के परीक्षा परिणाम की मार्कशीट उनके हाथो में नहीं मिली। यही कारण है कि मानसिक तनाव से गुजर रहे सभी विद्यार्थियों को अपने भविष्य की चिंता खाये जा रही है।

हद्द तो तब हो गयी तब मेहनत -मजदूरी कर अभिभावक अपने बच्चों की फीस समय पर भर रहे हैं, मगर बावजूद इसके कॉलेज द्वारा यूनिवर्सिटी को समय पर फीस न देने के कारण, यूनिवर्सिटी द्वारा लगाए लेट चार्जेज का बोझ विद्यार्थियों पर थोपा जा रहा है। दाखिले लेते समय विद्यार्थियों को फीस में अतरिक्त 800 रूपए का बोझ डाल कर उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। आज विद्यार्थी रो रहा है, मगर कॉलेज के प्रोफ्रेसर और प्राचार्य गहरी नींद में सोये हुए हैं। आखिर सवाल यह उठ खड़ा होता है कि क्या मनोहर लाल खट्टर के राज में हमारी शिक्षण प्रणाली बिहार से भी बद्दतर हो गयी है।

“डीएन कॉलेज” से हाल में पासआउट छात्र पुष्कर जैन आज इस दुविधा में पड़े हैं कि कॉलेज के ढिल-ढिलइये रवैय्ये के कारण उनका भविष्य अंधकार में है। पुष्कर “डीएन कॉलेज” से पास होकर दिल्ली आईआईएमसी यानि इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मॉस कम्युनिकेशन में डिप्लोमा पाने के लिए एंट्रेंस की परीक्षा दे चुके हैं, मगर शायद आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि उन्हें अब तक पांचवे सेमेस्टर की परीक्षा की मार्कशीट नहीं मिली है।

जिसके कारण आज पुष्कर को कभी यूनिवर्सिटी, कभी अपने कॉलेज, कभी प्राचार्य के कार्यालय में धक्के खाने पड़ रहे हैं। पुष्कर को डर है कि अगर उनको मार्कशीट नहीं मिली तो वह अपना दिल्ली IIMC में एडमिशन कैसे लेंगे। मगर अफसोस मनोहर लाल खट्टर सरकार के शिक्षा मंत्री बस एयरकंडिशन के बंद कमरों में बैठ कर भाषणबाजी करते हैं। इन कॉलेज की यह हालत देखकर लग रहा है कि मानो उनको बच्चों के भविष्य की कुछ परवाह नहीं है।

IIMC का दिया एंट्रेंस एग्जाम मगर अब तक नहीं मिली पांचवे सेमेस्टर की मार्कशीट : पुष्कर जैन (पासआउट)

पुष्कर जैन का आरोप है कि वह आज मास्टर डिग्री और डिप्लोमा के लिए बाहर जाना चाहता है। जिस IIMC में एडमिशन मिलना मुश्किल है उसने डीएन कॉलेज से पासआउट होने के बाद एंट्रेंस का एग्जाम दिया है। मगर आज पुष्कर को डर है कि अगर वह पास हुआ तो वह एडमिशन कैसे लेगा? क्योंकि उसे तो अब तक पांचवे सेमेस्टर का डीएमसी ही नहीं मिली।

जबकि छटवें सेमेस्टर का डीएमसी भी मिलना बाकी है। अपना कीमती साल बर्बाद होता देख मानसिक तनाव से गुजर रहा पुष्कर आज कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी के चक्कर पर चक्कर काट चुका है, मगर नतीजा शून्य रहा। हैरत की बात यह है कि एसी के बंद कमरों में बैठने वाली प्रिंसिपल और एग्जाम ब्रांच के अधिकारी सुरेंद्र कड़ियाँ गहरी नींद में सोये हैं। क्या उनको बच्चों के भविष्य की चिंता नहीं? पुष्कर द्वारा हंगामा करने के बाद उसे प्राचार्या ने अथॉरिटी लेटर दे दिया, मगर क्या इसके बलबूते दूसरी सस्था या सरकार कोई सरकारी नौकरी दे सकेगी यह भी सबसे बड़ा प्रश्न खाये जा रहा है।

मार्कशीट मिलने में देरी से न मास्टर डिग्री, न सरकारी नौकरी के लिए कर सकते हैं आवेदन : साक्षी रोहिल्ला ]

डीएन कॉलेज के फाइनल ईयर में पढ़ने वाली साक्षी रोहिल्ला का कहना था कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी के हाल का क्या कहें उन्हें तो अब तक फर्स्ट और सैकेंड सेमेस्टर की मार्कशीट ही नहीं मिली। यानी कि उनके पास फर्स्ट ईयर की मार्कशीट नहीं है जबकि आज वो फाइनल ईयर में है।

साक्षी का कहना है कि आज उसे इस बात की चिंता है कि अभी यह हाल है तो फाइनल ईयर में उनके साथ क्या होगा। बिना मार्कशीट न वो कहीं बाहर कोर्स करने जा सकते हैं और न ही सरकारी नौकरी के लिए अप्लाई कर सकते हैं। साक्षी खुद मास्टर डिग्री करना चाहती है मगर उसे डर है कि शायद यह भी करना उसके लिए मुश्किल हो और कहीं उसका साल बर्बाद न हो जाये।

कॉलेज की गलती से रुके मार्कशीट, अब विद्यार्थियों से वसूला जा रहा है 800 रूपए का दंड : ज्योति बंसल

ज्योति बंसल का आरोप है कि वह फाइनल ईयर में है। मगर उसे अब तक थर्ड और फोर्थ सेमेस्टर की डीएमसी तक नहीं मिली है यानी सैिकंड ईयर की मार्कशीट के बगैर वह थर्ड ईयर में पढ़ रहे हैं, मगर सबसे दुखद बात यह है कि डीएन कॉलेज का मैनेजमेंट इतना लापरवाह है कि उसने बच्चों से वसूली फीस समय पर यूनिवर्सिटी में नहीं दी, जिसके कारण यूनिवर्सिटी ने थर्ड सेमेस्टर की डीएमसी रोक दी थी।

फलस्वरूप आज कॉलेज की लापरवाही का बदला उनसे लिया जा रहा है। यूनिवर्सिटी ने जो पेनल्टी लगाई उसके चलते अब कॉलेज बच्चों से फीस वसूल रहा है। ज्योती का आरोप है कि पहले उससे सैिकंड ईयर में 1650 रूपए फीस ली गयी थी, मगर अब कॉलेज ने उसमें 800 रूपए पेनल्टी की दर लगाकर उनसे तकरीबन 1750 रूपए वसूले जा रहे हैं। जो उनके साथ अन्याय है। ज्योति को आज इस बात की चिंता खाये जा रही है कि अब उनके भविष्य का क्या होगा। वह आगे कैसे नौकरी के लिए अप्लाई कर पाएंगे ?

अभिभावक – कहां गए शिक्षा मंत्री ?

^फिलहाल भाजपा विधानसभा चुनाव में विकास और पर्ची -खर्ची समाप्त कर ईमानदारी की बात कर चुनाव में कूद रही है, मगर भाजपा की विफलता इसी बात पर है कि उन्होंने ऐसे कॉलेजों की सुध तक नहीं ली, जो अपने मनमाने ढंग से मार्कशीट बच्चों को दे रहे हैं। बच्चे कॉलेज पासआउट हैं, मगर उनको अब तक अपने दूसरे ईयर का ही मार्कशीट नहीं मिली, जो बेहद दुर्भाग्य की बात है। जिनके राज में शिक्षण संस्थाओं की यह दुर्दशा हो गयी है।

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