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1834 में दर्ज हुई थी हिसार की पहली एफआईआर हरियाणा पुलिस

हरीश भारद्वाज पुलिस प्रवक्ता, हरियाणा पुलिस

Hisar Today

मैं 40 वर्षों से हिसार में रहता आ रहा हूं। मैंने हिसार को बदलते हुए देखा है। यहां पर पहले नागोरी गेट, शेरशाह सूरी का घोड़ों का अस्तबल, गुजरी महल, अग्रोहा धाम जैसा पर्यटन क्षेत्र का भी अनुपम भण्डार है। शायद यह बात कोई नहीं जानता होगा कि हिसार में पहली बार एफआईआर 1834 में उर्दू भाषा में दर्ज हुई थी, जिसकी याद आज भी जिन्दा है। इतना ही नहीं पहले के थानों की जगह आज नए पुलिस स्टेशन आ चुके हंै। आज मैं 58 वर्षो का हो गया हूं, मेरे पिताजी के बाद मैं भी पुलिस विभाग में कार्यरत हूं, मगर एक समस्या जिसका हाल मैं चाहता हूं वो है “ट्रैफिक।” राजगुरु मार्केट, नागोरी गेट, दिल्ली रोड़ जैसे इलाकों में आज भी सड़कें उतनी विकसित नहीं हुई जितनी होनी चाहिए थी। हिसार में आबादी के साथ यहां वाहनों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। मगर उसकी तुलना में सडकोंे का विकास नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं ट्रैफिक नियमों का भी यहां कोई पालन नहीं करता। इसलिए मेरी गुजारिश रहेगी कि प्रशासन इस समस्या का समाधान करे।

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