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सिविल अस्पताल में डॉक्टरों व मुख्य आरोग्य अधिकारी के नाक नीचे कचरे में फेंका जा रहा बायोमेडिकल वेस्ट

Archana Tripathi

बायो मेडिकल वेस्ट को लेकर सरकार ने कड़े नियम और कानून बनाए है। नियमानुसार अगर कोई संस्था या व्यक्ति बायो मेडिकल कचरा फेंकते पकड़ा गया तो उसके पकड़े जाने पर बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और हैंडलिंग एक्ट 1998 संशोधित नियम 2016 के तहत उसे पांच साल तक की जेल और जुर्माने की सजा से होकर गुजरना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मेडिकल बायो वेस्ट निस्तारण एक्ट 1998 में संशोधन कर नया कानून बनाया है।

इसके तहत अब प्रत्येक अस्पताल और पैथोलॉजी लैब को प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अपने संस्थान का पंजीयन करवाना भी अनिवार्य किया गया है। परन्तु आज सभी नियमो को ताक पर रखते हुए हरियाणा के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों द्वारा बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में भारी गड़बड़िया कर रहे है। जिन बायो मेडिकल वेस्ट के सही प्रकार से निस्तारण के
लिए सरकार ने कड़े नियम और कानूनों का गठन किया है। उसी कानून की धज्जियां उड़ाने वाला और कोई नहीं बल्कि खुद हिसार सिविल अस्पताल है।

रोजाना हज़ारो की संख्या में मरीज अपना इलाज करवाने दूरदराज से हिसार सिविल अस्पताल आते है। इतना ही नहीं खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर ने एयरपोर्ट के शुभारम्भ के दौरान हिसार के सिविल हस्पताल के औचित्य निरिक्षण कर यहाँ का मुआयना भी किया था। बावजूद इसके सिविल अस्पताल के डॉक्टयरों और मुख्य आरोग्य अधिकारी के नाक के नीचे से बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में यहाँ के कर्मचारियों की लापरवाही का बड़ा खुलासा दिखाई दिया।

हाल में सिविल अस्पताल से बायो मेडिकल कचरा यहाँ के सफाई कर्मी पास पड़े खुले कचरा पेटियों में डालते पाए गए। इस कचरा पेटी के आस पास दवाइयों की शीशियां, दस्ताने, बैंडेज, खून की थैलिया, बोतले, और सिरिंज पाए गए। हर रोज बाकायदा सिविल अस्पताल ने निकला बायो मेडिकल कूड़ा न केवल यहां फेंका जाता है बल्कि इन सामानो को यहां जलाया भी जाता है। सिविल अस्पताल में सफाई कर्मी द्वारा फेंका बायो मेडिकल कूड़ा कचरे के डब्बे में ही जलाया जा रहा था।

अस्पताल कर्मचारी हैं जिम्मेवार : कौशिक

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