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बरसात में ‘कालापानी’ से भी बदतर सजा भुगत रहे ऋषि नगर के निवासी

अर्चना त्रिपाठी | Hisar Today

> स्वछता अभियान की डींगे हांकने वाले अधिकारियों और भाजपा नेताओं को चैलेंज “हिम्मत है तो यहां झाड़ू लगाकर दिखाए”

हिसार ऋषि नगर के निवासी इन दिनों “कालापानी” से भी बदतर सजा से होकर गुजर रहे हैं। हिसार बस डिपो के पीछे इंस्टीटयूट व अस्पताल एरिया के नाम से मशहूर ऋषिनगर इलाका यूं तो सबसे पॉश वीवीआईपी एरिया के तौर पर जाना जाता है, मगर ऋषिनगर की गलियों का हाल झोपड़पट्टी से भी बद्दतर हो चुका है। हर बार बरसात आते ही जल निकासी और सीवेरज की कोई पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण 15 -15 दिनों तक गालियां सीवर के गंदे पानी के कारण भरी रहती है।

इन गलियों में अगर नजर दौड़ाई जाए तो दूर दूर तक जलजमाव देखकर लगेगा कि यहां तो मार्ग ही नहीं बल्कि कालापानी भरा हुआ है। आए दिन थोड़ी सी बरसात में ऋषिनगर में गोस्वामी अस्पताल के पीछे कई दिनों तक जलजमाव की स्थिति बनी रहती है, मगर न तो अस्पताल के प्रशासन को और न ही पार्षद अनिल जैन को इसकी कोई फिक्र है। आलम यह है कि अक्सर यहां दुर्घटनाएं होती रहती हैं। जब हिसार टुडे की टीम यह खबर करने स्थल पर पहुंची तभी 2 लड़कियां सीवर के गंदे पानी से भरी गली में गिरते-गिरते बची।  ताज्जुब की बात है कि इतना होते हुए भी पार्षद अनिल जैन गहरी नींद में सोये नजर आए। कालापानी से भी बदतर सजा भुगत रहे यहां के नागरिकों के लिए ऐसे बदबूदार पानी से पटी गलियों में चलना तो दूर सांस लेना भी मुहाल हो गया हैं।

 ऋषि नगर में आज 40 से भी अधिक अस्पताल स्थित हैं। इस सीवर के गंदे पानी के जलजमाव के कारण मरीजों को एम्बुलेंस से उतारने में भी कड़ी मशक्क्त का सामना करना पड़ता है। अगर जरा भी स्ट्रेचर का बैलेंस बिगड़ा तो सीधा मरीज के सीवर के गंदे पानी में गिरने का डर बना रहता है। कहते हैं कि  अस्पतालों में साफ-सफाई सबसे ज्यादा जरुरी रहती हैं, मगर उन अस्पतालों का ही सीवर का पानी उल्टा बैक जाकर गली के भरे पानी में मिक्स हो रहा है।  ऐसे में न केवल इंफेक्शन का डर बल्कि डेंगू मलेरिया की बीमारियों का प्रकोप भी इस क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सभी अस्पताल प्रशासन को मिलकर प्रशासन और अपने पार्षदों पर दबाव बनाना चाहिए कि वह सालों से चली आ रही समस्या का स्थाई इलाज करें। इस हालत में यहां से गुजरती महिलाएं और बच्चे इस कालापानी की सजा के लिए निगम प्रशासन और अपने पार्षद की निष्क्रियता के लिए उन्हें कोस रहे हैं।

जिन नागरिकों ने अपने वोट डालकर पार्षद अनिल जैन उर्फ टीनू जैन को यह सोचकर चुना कि वह उनकी हर समस्या में उनके साथ खड़ा रहेगा।  मगर आज उसी पार्षद को रविवार छुट्‌टी के दिन भी जनता की समस्या सुलझाने कि फुर्सत ही नहीं। समस्या से अवगत करवाए जाने के बाद भी पार्षद ने यह जहमत नहीं की कि कम से कम समस्या तो देख आऊं। मगर एयरकंडीशन में बैठने वाले पार्षद को न समस्या को देखने कि फुर्सत है और न ही सुलझाने की। ऐसे पार्षदों का क्या किया जाए जो यह जवाब दे कि “भई आज रविवार है, सोमवार देखेंगे।” अनिल जैन ने अपनी खुद पीट थपथपाते हुए कहा कि उन्होंने हाल ही में इस गली में काम करवाया था, यहां जालियां लगवा रखी है ताकि समस्या हल हो।

मगर अनिल जैन की झूठी बातों की कलई खोलते हुए कार्तिक अस्पताल के कर्मचारियों का आरोप था कि जैन ने बस लीपापोती का काम किया। यहां की समस्या जैसी थी आज भी वैसी ही है, वो तो यहां फटकते भी नहीं।  जालियों का काम भी घटिया दर्जे का किया गया, ऐसे काम का क्या फायदा।  सीवर की लाइन अंदर से खराब है और उपर से वो जाली लगाकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने बहुत अच्छा काम किया। मगर उनका यह काम सिर्फ दूसरों की आंखों में धूल झोंकने के अलावा कुछ नहीं। ऐसे में यह जिम्मेदारी जनता की है कि वो ऐसे पार्षद को वोट देकर पार्षद बनाये जिन्हें जनता की फिक्र हो न कि खुद के आराम की।

गौरतलब है कि ऐसे ही जलजमाव की समस्या इसी साल 23 जुलाई को हुई थी।  तब यहां के नागरिकों ने मुख्यमंत्री सीएम विंडो में शिकायत की थी, तब प्रशासन ने तुरंत उनसे फोन नंबर लेकर समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया मगर नतीजा शून्य रहा।  ऐसे मैं सरकारी तंत्र और निगम प्रशासन जितनी भी स्वच्छता की बात करे उतना व्यर्थ है।  यहां के रहिवासी आशीष लावट ने निगम प्रशासन और पार्षद को आड़े हाथों लेते हुए यह आरोप लगाया कि वे स्वच्छता अभियान का केवल ढकोसला करते हैं, जबकि ऋषिनगर की गली की सच्चाई उनकी आंखे खोलने के लिए काफी है।

आशीष ने कहा कि बाकि शहर के लोग एक दिन बरसात से परेशान रहते हैं मगर हम 15 दिनों तक “कालापानी” से भी बद्दत्तर सजा भुगतते हैं। मगर न ही निगम को और न ही पार्षद को इससे कोई लेना देना। अगर यहां दोबारा से सीवर की पाईप डलवाकर रोड़ ऊंची की जाए तो समस्या का हल जरूर हो जाएगा।  वैसे पार्षद और निगम के अधिकारी क्या कदम उठाते हैं या नींद में सो जाते हैं, ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

यह रही ऋषि नगर लोगों की प्रतिक्रिया

भुगत रहे हैं “कालापानी” की सजा

आशीष लावट (निवासी, ऋषिनगर)
आशीष लावट (निवासी, ऋषिनगर)

यहां सबसे बड़ी समस्या ड्रैनेज की हैं। हर साल हम यहां “कालापानी” की सजा भुगत रहे हैं। बदबू और इंफेक्शन के कारण इलाके में डेंगू, मलेरिया और वायरल फेवर की बीमारियां बढ़ गई हैं। बावजूद इसके प्रशासन और पार्षद को कोई फिक्र नहीं।   वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्वछता अभियान की शुरुवात की है, मैं भाजपा के नेताओं, प्रशासन और डॉक्टरों को चुनौती देता हूं कि “हिम्मत है तो यहां पर झाड़ू लगाकर दिखाएं”, इतना ही नहीं उन्होंने मेयर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से भी गुजारिश की कि अगर वह मेयर बनने के इक्छुक हैं तो यहां आकर काम करके दिखाओ।

प्रशासन और पार्षद के लिए शर्म की बात

सतीश जैन (मालिक, जैन सुपर मार्किट)
सतीश जैन (मालिक, जैन सुपर मार्किट)

हमारी गली में 40 से ज्यादा अस्पताल हैं, यह एक वीवीआईपी गली है, मगर यहां की ऐसी दुर्दशा है कि प्रशासन और पार्षद अनिल जैन को शर्म आनी चाहिए इस अवस्था को देखकर। हमेशा सीवर का पानी भरा रहता है, मगर पार्षद को तो कोई परवाह ही नहीं।  मैंने खुद पार्षद अनिल जैन उर्फ टीनू जैन को इस समस्या से अवगत करवाते हुए व्हाट्सअप पर फोटो भेजी, मगर उसने अभी तक जवाब तक नहीं दिया।

 

पार्षद को फुरसत कहां वो तो आते ही नहीं

 राजमाला(निवासी, ऋषिनगर)
राजमाला (निवासी, ऋषिनगर)  

मैं यहां से गुजरते हुए कई बार पैर फिसलने के कारण सीवर के गंदे पानी में गिर चुकी हूं। बहुत नारकीय यातना हम झेल रहे हैं, मगर पार्षद को हमारी समस्या से कोई लेना देना नहीं है।

 

 

रास्ते से गुजरते हुए डर लगता है

पूजा (निवासी, ऋषिनगर)
पूजा(निवासी,ऋषिनगर)

इतना पानी भरा हुआ  है कि अभी मैं यहां गिरने वाली थी।  बहुत डर लगता है यहां से गुजरते हुए।  मैं प्रशासन से हाथ जोड़कर विनती करूंगी कि वो हमारी समस्याए हल करे।

 

 

क्या काम करवाया पार्षद ने यहां?

अनीता (निवासी, ऋषिनगर)
अनीता (निवासी, ऋषिनगर)

दोपहर मैं अपनी गुड़िया के साथ बाजार जा रही थी कि पैर फिसलने से मैं उसे लेकर गिर गई। मुझे चोट भी आई। क्या काम करवाया है पार्षद ने यहां ?  उनको कोई शर्म नहीं, मेरा बस चले तो उसको यहां लाकर इस रोड़ में गंदे पानी के बिच चलवाऊं।

 

 

ऐसी कोई समस्या नहीं

अनिल जैन, पार्षद
अनिल जैन, पार्षद

ऐसी कोई समस्या नहीं है।  मैंने तो यहां जालियां लगाने का काम किया है। बरसात है तो दिक्कत तो रहेगी, कुछ देर में पानी निकल जाएगा। वैसे भी “आज रविवार है, सोमवार को देखेंगे।”

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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