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प्रशासन की नाक के नीचे चल रही है रोडवेज से मिलते जुलते रंग वाली अवैध बसें

कमेटी ने कहा प्राइवेट बसें किराए पर लेना बड़े ट्रांसपोर्टरों के साथ सरकार का सौदा

Today News | हिसार

जनता द्वारा चुनी गई सरकार जनहित में नीति बनाने के विपरित जनता की गाढ़ी कमाई से खड़े किए गए जनसेवाओं वाले सरकारी विभागों को बड़े पूंजीपतियों के हवाले करके लूटवाने का काम कर रही है। चाहे रोडवेज विभाग हो या बिजली, पानी, स्वास्थ्य या शिक्षा विभाग हो। इनमें अधिकारियों, नेताओं व पूंजीपतियों का गठजोड़ काम कर रहा है।

यह बात आज हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य दलबीर किरमारा व रमेश सैनी ने एक संयुक्त बयान जारी कर कही। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग के उच्चाधिकारी निजीकरण का विरोध कर रहे रोडवेज कर्मचारियों की आवाज को दबाने में जितनी ताकत लगा रहे हैं, उतनी ताकत यदि प्रदेश भर में अंतरजिला व अंतर राज्यीय मार्गों पर प्राइवेट बसों के अवैध संचालन पर अंकुश लगाने में उपयोग करें तो रोडवेज विभाग को घाटे से बचाया जा सकता है। वहीं इससे सरकार के राजस्व में भी बढ़ौतरी हो सकती है। उन्होंने बताया कि अकेले दिल्ली-जयपुर एक ही मार्ग पर प्रशासन की नाक के नीचे रोजाना 150 से अधिक प्राइवेट बसें हरियाणा रोडवेज व राजस्थान रोडवेज की बसों जैसे रंग में रंगवा कर अवैध रूप से चल रही हैं। यह मामला मीडिया में भी काफी उठ चुका है, लेकिन इन पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही है।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा परिवहन विभाग में प्राइवेट बसें किराए पर लेना कोई स्कीम नहीं है अपितु यह सरकार द्वारा अपने चहेते बड़े ट्रांसपोर्टरों के साथ किया गया एक सौदा है। इसके तहत एक सरकारी बस की प्रति किलोमीटर औसत आय से दोगुणा रेट की दर से प्राइवेट बस मालिक को भुगतान किया जाएगा, जो विभाग के लिए भारी घाटे का सौदा है। उन्होंने कहा कि इसमें बड़े घोटाले की आशंका साफ नजर आ रही है। उन्होंने परिवहन मंत्री द्वारा बार-बार दिए जा रहे बयान कि बस प्राइवेट, ड्राइवर प्राइवेट किराए पर लेना विभाग का निजीकरण नहीं है को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि इससे तो भविष्य में ना सरकार बसें खरीदने की और ना ही बेरोजगार युवाओं को स्थाई रोजगार देने की आवश्यकता पड़ेगी। यह निजीकरण नहीं तो क्या है।

दलबीर किरमारा व रमेश सैनी ने कहा कि सरकार की इस जनविरोधी नीति का विरोध करने के लिए रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन रोडवेज कर्मचारियों का नहीं अपितु इसमें जनता के हर वर्ग व विद्यार्थियों का पूर्ण समर्थन है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते किलोमीटर स्कीम के नाम पर प्राइवेट बसें हायर करने का सौदा रद्द नहीं किया गया तथा कर्मचारियों पर तमाम उत्पीडऩ की कार्यवाही वापस नहीं ली गई तो 6 अक्तूबर को मतलौडा (पानीपत) में परिवहन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र व कैंप कार्यालय पर रोडवेज के हजारों कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए घेराव करेंगे। यदि इसके बाद भी सरकार नहीं चेती तो 16-17 अक्तूबर को दो दिन प्रदेश भर में रोडवेज की बसों का चक्का जाम होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस दौरान यदि किसी भी डिपो में एक भी प्राइवेट बस आई तो उसी समय प्रदेश भर में रोडवेज का चक्का जाम कर दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेवारी सरकार व परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों की होगी।

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