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पैसों की हवस ने ली मेरी पत्नी की जान : घीसा राम

मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने के आरोप में कार्तिक अस्पताल के डॉ. अरविन्द गुप्ता, डीएम और सेवक सभा चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ केस दर्ज

Today News | हिसार

पैसे उगाई के लिए डॉक्टर मरीजों की जान के साथ कैसे खिलवाड़ करते है, इसी का जीता जागता उदाहरण हिसार ऋषि नगर में स्थित कार्तिक अस्पताल के मामले में देखा जा सकता है। दरअसल 8 अक्टूबर 2015 में घीसा राम नागर अपनी पत्नी की किडनी के इलाज के लिए उन्हें कार्तिक अस्पताल लेकर गए। घीसा राम नागर का आरोप है कि जब वह अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल में इलाज के लिए गए तो पैसे की उगाही के लिए कार्तिक अस्पताल के एमडी डॉ. अरविन्द गुप्ता और नेफ्रोलॉजी डीएम ने उनकी पत्नी का किसी प्रकार का टेस्ट किये बिना उनका डायलिसिस करवा दिया। जिसकी जानकारी उन्होंने उनके परिजनों को भी नहीं दी।

आरोप है कि कार्तिक अस्पताल के डॉक्टर के गलत इलाज किये जाने से उनकी पत्नी सुनहरी देवी की हालत बहुत खराब हो गयी और 2 महिनों के अंदर ही उनका निधन हो गया। घीसा राम नागर ने आरोप लगाया कि डायलिसिस के लिए सीआरएफ (क्रोनिक रीनल फेलियर) और जीएफआर का टेस्ट करवाना बहुत ही आवश्यक होता है। मगर डॉक्टरों ने पैसे कमाने के लिए उनकी पत्नी की जिंदगी से खिलवाड़ करते हुए, एक बार ही नहीं बल्कि 4 से 5 बार डायलिसिस करवाया, जिसके कारण उनकी पत्नी को मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी कई बीमारियां होने लगी। उनकी पत्नी को गलत डायलिसिस के कारण इन्फेक्शन भी हुआ और आखिरकार 2 महीनों बाद (22 नवंबर 2015) में उनकी मृत्यु हो गई।

घीसा राम नागर ने आरोप लगाया कि कार्तिक अस्पताल के डॉक्टर ने पहले तो यह बताया नहीं कि उन्होंने डायलिसिस के पहले मेडिकल टेस्ट करवाए या नहीं। उल्टा डायलिसिस करवाने के बाद लाखों रुपयों का बिल उन्हें थमा कर कहा कि हालत तो ठीक है, अगर दिक्कत होगी फिर आना, इनका रूटीन में डायलिसिस करवाना आवश्यक है। जबकि उनकी पत्नी लगातार कह रही थी कि किडनी में तकलीफ है। मगर डॉक्टरों ने बातों को नजर अंदाज कर सिर्फ अपना ध्यान केवल अधिक से अधिक पैसे कमाने में लगाया। नागर ने कहा कि डॉक्टर ने तो परिवार को बिना जानकारी दिए ही डायलिसिस करवाया।हैरत की बात यह है कि बहुचर्चित कार्तिक अस्पताल के डॉक्टरों के पास डायलिसिस करने और उनके मरीजों को रखने तक की व्यवस्था नहीं।

ऐसे में उन्होंने सेवक सभा चैरिटेबल अस्पताल के डॉक्टरों के साथ आपसी साठगांठ कर पैसे उगाही का गोरख धंधा खोल रखा था, ऐसा आरोप नागर ने लगते हुए कहा कि जब हमने डॉक्टरों से जवाब मांगा तो वह खुद उनसे बुरा बर्ताव करते दिखाई दिए। कार्तिक अस्पताल की लापरवाही के कारण नागर के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। नागर जब कार्तिक अस्पताल और सेवक सभा चैरिटेबल अस्पताल के डॉक्टर के गोरखधंधे और लापरवाही को लेकर जब पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाने पहुंचे तब एसएचओ ललित ने अस्पताल के डॉक्टर के खिलाफ किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं की। पुलिस थाने में एक साल तक धक्के खाने के बाद एडीएसजे हिसार डॉ आर चालिया ने 21 सितंबर 2018 को सीआरपीसी धारा 193 के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किए। इतना ही नहीं कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए की डीएसपी से इस पूरे मामले की जांच करवाई जाए और दोषी के खिलाफ सख्त कार्यवाई की जाए।

नागर ने बताया जब 26 अक्टूबर 2017 को पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो उन्होंने कोर्ट में एसएचओ ललित के खिलाफ दोषियों को बचाने और शिकायत जानबूझकर दर्ज न करने के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। तब जाकर उन्हें न्याय मिला। हालांकि अब यह पूरा मामला डीएसपी दलजीत सिंह के पास पहुंच चुका है। उन्होंने हिसार टुडे की टीम को बताया की इस मामले की गहन जांच की जा रही है। इसमें कोई भी दोषी क्यों न हो, किसी को नहीं बक्शा जाएगा। जबकि एसएचओ ललित ने खुद पर लगाए आरोप को सिरे से नकारते हुए कहा की हमने इस मामले में कोई कोताही नहीं बरती। हालांकि इस मसले पर डॉ अरविन्द गुप्ता से बात करने की कोशिश की गयी तो वह कुछ भी कहने के लिए मौजूद नहीं थे।

पैसों के लालच में, बिना बताए डॉ. अरविंद के डायलिसिस किये जाने से हुई पत्नी की मौत

घीसा राम नागर, शिकायतकर्ता (अधिवक्ता )
घीसा राम नागर,शिकायतकर्ता  (अधिवक्ता )

कार्तिक अस्पताल के डॉक्टर अरविन्द गुप्ता ने पैसो के लालच में, परिवार को बताये बिना अपना मुनाफा कमाने के लिए सीधा मरीजों का डायलिसिस कर देते हैं। डॉक्टरों द्वारा मरीजों के साथ ऐसा खिलवाड़ किया जा रहा है कि मेरी पत्नी उनका शिकार हो गयी और उसकी जान चली गई। हमने एसएचओ ललित के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इतना ही नहीं हमने कार्तिक अस्पताल, डॉ अरविन्द गुप्ता और सेवक सभा चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ उपभोक्ता अदालत का भी दरवाजा खटखटाया है। मेरी बस यही मांग है कि इन स्वार्थी और लालची डॉक्टरों के कारण मैंने अपनी पत्नी और अपना परिवार खोया है। ऐसे पैसों के लालची डॉक्टर और अस्पताल के खिलाफ डीएसपी सख्त से सख्त कार्यवाई करे।

दोषी को बक्शा नहीं जाएगा

हमारे पास यह मामला आ चूका है। हमने इस मामले में शिकायत दर्ज करवाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। हम इस मामले में निष्पक्ष जांच करेंगे और अगर कोई दोषी पाया गया तो किसी को नहीं बक्शा जाएगा।

सिविल अस्पताल के डॉक्टर की रिपोर्ट पर संदेह

इस मामले में सिविल अस्पताल की रिपोर्ट भी संदेह के घेरे में मानी जा रही है। गौरतलब है की आदेशानुसार सिविल अस्पताल को इस पूरे मसले में स्टेटस रिपोर्ट देने के आदेश जारी किये गए थे। मगर उनके पैनल में डॉ नलवा, डॉ नरेश, डॉ अजीत, मुख्य आरोग्य अधिकारी जैसे डॉक्टर शामिल थे। नेरोलॉजिस्ट का कोई डॉक्टर ही इस पैनल में नहीं था। ऐसे में मरीज की अवस्था की जानकारी इन डॉक्टरों को कैसे हो सकती थी। ऐसे में आरोप लगाए जा रहे हैं कि सिविल अस्पताल के डॉक्टर ने कार्तिक अस्पताल के डॉक्टर के साथ आपसी मिलीभगत कर अपनी गलत रिपोर्ट सौपी।

विभिन्न धाराओं के तहत हुआ मामला दर्ज

एट्रोसिटी एक्ट 3(2)(वी), आईपीसी 1860 धारा 120 (बी), धारा 302, धारा 304, धारा 337, धारा 338, धारा 34, धारा 418 और धारा 440 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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