हिसार

पब्लिक हेल्थ की तानाशाही के चलते ‘पानी को तरसते’ आजाद नगर के निवासी

जलापूर्ति करने में ठेकेदार और अधिकारी पर लग रहा भेदभाव और अपने हितैशी को पानी देने का आरोप

>पब्लिक हेल्थ विभाग और निगम एक दूसरे पर थोप रहा जिम्मेदारी
> कम हॉर्सपॉवर मोटर के कारण हो रही हैं पानी की समस्या

अर्चना त्रिपाठी | Hisar Today

कुर्सियों में बैठे अधिकारियों के तानाशाही रवैये का खामियाजा आज आजाद नगर के निवासी भुगत रहे हैं, ऐसा आरोप आज आजाद नगर के वासियों और पार्षद जोकिं पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों पर लगा रहे हैं। अनियोजित कार्यो का क्या नतीजा होता हैं, इसका जीता जागता उदाहरण आज आजाद नगर के सेक्टर 18, सेक्टर 19, सेक्टर 17 उमेद विहार, लक्ष्मी विहार, शास्त्री विहार जैसे इलाको में देखने को मिल रहा हैं। 15 एमएलडी स्टोरेज क्षमता होने के बावजूद आज आजाद नगर के रहिवासियों को पब्लिक हेल्थ विभाग की लापरवाही के कारण पानी नसीब नहीं हो रहा हैं।

ऐसा आरोप लगाया जा रहा है कि 2011-2012 में आजाद नगर के 20,000 आबादी को ध्यान में रखकर विभाग ने यहां की जनता को पानी मुहैया करवाने के लिए वॉटर वर्क का काम किया था। नियमानुसार विभाग ने आगामी 15 साल में 45000 जनसंख्या को ध्यान में रखकर इसका निर्माण करवाया। मगर आज यहां के पार्षद और नागरिकों का आरोप है कि यह निर्माणकार्य इतना अनियोजित था कि 40 प्रतिशत आबादी को पीने का पानी तक नसीब नहीं होता। हालात इतने विकट है कि आज मुख्य सड़क के किनारे बसे घरों के लोग पीने के पानी के लिए घरों में मोटर लगवाने को मजबूर हैं, तभी जाकर उन्हें पानी पीने के लिए नसीब होता हैं। हालांकि पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के जेई सुनील वर्मा का कहना हैं कि आज़ाद नगर में वॉटर वर्क 15 साल को ध्यान में रखकर बनायी गई थीं।

अधिकारी सुनील वर्मा का आरोप हैं कि आज आजाद नगर की जनसंख्या 60000 से अधिक हैं, मगर निगम के आकड़े सिर्फ 38000 बताते हैं, जब हमने निगम से सेंसेक्स की मांग की तो निगम वह आकड़े नहीं मुहैया करवा रहा, ऐसे में हमारे लिए आगे काम करना मुश्किल हैं। उन्होंने सारी जिम्मेदारी निगम पर डाल कर पल्ला झाड़ लिया। पार्षद नरेंद्र शर्मा का आरोप है कि आज़ाद नगर में पानी की इस किल्लत के लिए पब्लिक हेल्थ विभाग के तीन अधिकारी जिम्मेदार हैं। पार्षद का आरोप हैं कि कार्यकारी अभियंता के.के गिल, जे.ई सुनील वर्मा और एसडीओ के.एल.पाहवा के नाकामी के कारण अब तक यहां की समस्या हल नहीं हो पाई हैं।

शिकायत

> कम क्षमता वाला (70 हॉर्सपॉवर) वॉटर मोटर के कारण नहीं मिल रहा पानी।
> लोग खुद का मोटर लगाकर पानी भरने को मजबूर।
> ठेकेदार मनमानी से कर रहा जलापूर्ति।
> पानी देने का कोई सही समय सूचि नहीं।
> अधिकारी एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी।

“यहां तो जेई कि औकात नहीं, कौन सुनता हैं हमारी”

निगम में कुछ महीनों पूर्व पानी के मुद्दे पर हमारी आयुक्त से मुलाक़ात हुई थीं, तब हमने कहा था कि नया सेंसेक्स का डाटा प्रदान किया जाए परन्तु “यहां तो जेई की कोई औकात नहीं, कौन सुनता हैं हमारी”। हमारे पास पानी की कोई कमी नहीं सिर्फ अधिक हॉर्स पॉवर वाला पम्प लगाने की जरुरत हैं और यह काम तब तक नहीं हो पायेगा जब तक हमारे पास नए संसेक्स के आकड़े नहीं आ जाते, मगर कहने के बावजूद निगम हमें नए सेंसेक्स देने को तैयार नहीं। सुनील वर्मा, जे.ई, पब्लिक हेल्थ विभाग

विभाग के तानाशाही रवैये के कारण नहीं मिल रहा पानी

पब्लिक हेल्थ विभाग के तानाशाही रवैये के चलते आज आज़ाद नगर के रहिवासी पानी को तरस रहे हैं और ये अधिकारी जनता को बेवकूफ बनाने का काम कर रहे हैं। इन अधिकारियों ने जब पानी का कार्य करवाया था। तब उन्होंने अनियोजित ढंग से काम किया। यहां की आबादी के अनुसार इनके पास 200 हॉर्स पॉवर क्षमता का मोटर होना चाहिए था, मगर आज इतनी आबादी को पानी देने का काम सिर्फ 70 हॉर्स पॉवर मोटर कर रहा हैं। नौबत इतनी विकट हैं कि 30 प्रतिशत लोगों को तो शौचालय में हाथ धोने तक के लिए भी पानी नहीं आता। पानी छोड़ने का काम ठेकेदार अशोक जैन को दिया गया हैं, मगर वह भी अपने मनमर्जी से काम करता हैं। आज भी लीडिंग हाई स्कुल, पटवार भवन के पास लगातार पानी की लीकेज के कारण लोगों तक पानी नहीं पहुंच पाता। मैंने खुद सेंसेक्स के दस्तावेज इन अधिकारियों को दिए हैं।                                                                           नरेंद्र शर्मा, पार्षद

मख्य मार्ग में बसे घरों को नहीं मिल रहा पानी

सोमबीर श्योराण,प्रधान,आज़ाद नगर व्यापार मंडल
सोमबीर श्योराण,प्रधान,आज़ाद नगर व्यापार मंडल

इन लोगों ने कम क्षमता वाली पानी की मोटर बिछा रखी हैं। इतना ही नहीं पानी का वॉल भी कम खोलते हैं, जिस वजह से यहां के लोगों को पूरे प्रेशर से पानी नहीं मिलता। हालत आज यह हैं कि मुख्य मार्ग तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, मजबूरन लोगों को घरों में खुद की मोटर लगाकर पानी भरना पड़ता हैं। इस बाबत अनेकों बार शिकायत करने के बावजूद आजाद नगर की समस्या अभी भी ज्यों की त्यों बनी हुई है।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close