टुडे न्यूज़हिसार

नगर निगम का ऑफिस बना कचरे का ढेर

> प्रधानमंत्री की ‘स्वच्छता ही सेवा’ का निगम ने उड़ाया मजाक
> सूखा-गिला कचरा मुहीम विफल, इन कचरों के विघटन की कोई व्यवस्था ही नहीं
> निगम के सफाई कर्मचारी खुद ही खुले आम जला रहे कचरा
> इस साल केवल 44 लोगो को खुले में कचरे फेकने के लिए काटा चालान

अर्चना त्रिपाठी |Hisar Today

हिसार शहर को स्वच्छता में नंबर 1 बनाने के मकसद से हाल में निगम के अधिकारियों द्वारा निकाली गयी “जिंगल का आज निगम के दफ्तर में ही झिंगालाला” निकल गया हैं। हिसार नगर निगम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर में शुरू ‘स्वच्छता ही सेवा’ मुहीम के तहत हिसार को स्वच्छ बनाए रखने के लिए निगम अधिकारियों ने जिंगल तो निकाल दिया परन्तु शहर में स्वच्छता का ढिंढोरा पीटने वाली नगर निगम का ऑफिस आज खुद ही कचरे का ढेर हो गया हैं। निगम के दफ्तर में जगह जगह पड़े निर्माणकार्य के मलबे, दीवारों के करीब फेंका कचरा, निगम के कॉरिडोर में जमीन पर पड़ी फाइलों और अलमारियों का ढेर, टूटे कुर्सी के पुर्जे, बैनरों एवं ठेलो के भंडार दफ्तर में घुसने के पहले ही दिखाई देते है। कहते हैं कि स्वच्छता की शुरुअात अपने घर से करनी चाहिए। परन्तु यहां पर निगम अधिकारियों द्वारा खुद का घर छोड़कर बाहर जाकर स्वच्छता की बात करने की घटना बेहद निंदनीय है।

हिसार नगर निगम जिस पर आज हिसार शहर के स्वच्छता की पूरी जिम्मेदारी है, उसी नगर निगम के अधिकारी खुद ही स्वच्छता की धज्जियां उड़ा रहे हैं। निगम के पास इतना बड़ा ऑफिस होने के बावजूद विभिन्न विभागों की पुरानी फाइलें रखने की उनके पास जगह ही नहीं, ऐसे में इन फाइलों को रखने का निगम ने बहुत अच्छा स्थान ढूंढा है और वो है निगम की गैलरी। यह गैलरी दोनों तरफ से कागजातों और भंगार के सामानों के ढेर से पटी हुई हैं। जहां हमेशा कचरा और धूल का अम्बार रहता है। ऐसे में अगर स्वच्छ वातावरण ही नहीं रहा तो निगम के अधिकारी काम कैसे करेंगे? अगर उनका ही घर स्वच्छ नहीं रहा तो वो दूसरों को कैसे स्वच्छता का पाठ पढ़ाएंगे? यही सवाल आज सभी के जहन से निकल कर बाहर आ रहा है।

नगर निगम में स्थित लाइट हाउस के कमरे के पास बारहों महीने कचरा फैला रहता है, खास बात यह हैं कि अब कुत्ते के बच्चे भी निगम दफ्तर के अंदर अपना घर बना बैठे है। मगर बावजूद उसके न यहां का कर्मचारी कुछ बोलने की चाह रखता है और न ही निगम के अधिकारियों को निगम की स्वच्छता की कोई परवाह है। खास बात यह है कि निगम में कुछ समय पूर्व निर्माणकार्य किया गया था, जहां का मलबा भी दिवार के सहारे पड़े अपने यहां से उठाये जाने का इंतज़ार कर रहा है। निगम द्वारा शहर में जीरो वेंडर जोन के तहत चलाई गई मुहीम के तहत पकड़े गए रेहड़ी और अवैध होर्डिंग के खिलाफ चलाई मुहिम में पकड़े गए होर्डिंग भी निगम के दफ्तर के बाहर शोभा बढ़ाने के लिए तैयार है। हर आवाजाही करने वाले लोगो की नजर हमेशा इन रेहड़ियों पर पड़ती है, जो यह कहते है कि दफ्तर का यह हाल तो शहर का क्या हाल होगा? हिसार नगर निगम आयुक्त अशोक बंसल जो एक प्रकार से शहर के मुखिया है, उनको सफाई अभियान खुद अपने दफ्तर से चलना चाहिए था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वच्छता ही सेवा” मुहीम के तहत निगम ने अपना दायित्व 15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक कैसे निभाया हिसार टुडे की रिपोर्ट पोल-खोल के लिए काफी हैं। निगम का दफ्तर तो दूर शहर में भी कचरों का अंबार निगम कि विफलताओं की कहानी बयान करने के लिए काफी है।
निगम द्वारा बड़े जोशो-खरोश के साथ निकाली सूखा-गिला कचरा मुहीम भी आज विफल साबित हुई है। लगभग 1 साल से चली आ रही सूखा-गिला कचरा अलग करने की मुहीम हिसार में आज कही भी 100% सफल नहीं है, इसी बात का खुलासा एएसआई रोहित ने करते हुए कहा कि अभी मॉडल टाउन, डीसी और एमसी कॉलोनी एरिया में यह महिम चल रही है, मगर सूखा-गिला अलग रखने का अभी कोई प्रावधान नहीं हैं, उसके लिए कंपोस्टिंग प्लांट बनाया जा रहा है। हिसार नगरनिगम का सफाई को लेकर यह हाल यह साबित करने के लिए काफी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता ही सेवा मुहीम का ढिंढोरा पीटने से ज्यादा जरुरी है खुद का घर साफ करके हिसार की जनता के समक्ष मिसाल साबित करना।

कचरा उठाने के लिए 500 सफाई कर्मी व 32 टाटा ऐस गाडि़यों की है कमी

हिसार नगर निगम ने हिसार शहर को स्वच्छता में नंबर 1 का शहर बनाने का बीड़ा तो उठा लिया, परन्तु इस काम को पूरा करने वाले सफाई कर्मियों की उनके पास बेहद कमी है। निगम को इस मुहीम को सफल बनाने के लिए 1200 सफाई कर्मियों की जरुरत है, मगर अभी तकरीबन 700 सफाई कर्मियों के साथ शहर के स्वच्छता की जिम्मेदारी निभाई जा रही है। सिटी टीम लीडर जसबीर सिंह के अनुसार हिसार में सूखा-गिला कचरा उठाने के लिए उनके पास मात्र 8 टाटा ऐस, और 20 ई-रिक्शा हैं, जबकि हिसार ने रोजाना निकलते 180 मैट्रिक टन कचरा उठाने के लिए उनको और 32 टाटा ऐस गाडी की जरुरत है। इतना ही नहीं हिसार का कचरा उठाने के लिए निगम 12 ट्रैक्टर/ट्रॉली के साथ 140 ट्राई-सायकल की भी मदद ले रहा है।

सफाई कर्मी द्वारा खुले में जलाया जा रहा कचरा

हैरत की बात है की बढ़ते प्रदुषण के चलते बरसात व ठंड के मौसम में हरियाणा सरकार ने पराली जलाने वालों पर दंड का प्रावधान रखा है, मगर निगम के सफाई कर्मी अपने मन से आते-जाते हुए काफी दिनों तक गलियों के चक्कर भी नहीं लगाते। इतना ही नहीं कई बार यह सफाई कर्मी इन कचरों को जलाते हुए भी पाए गए है, मगर निगम के अधिकारियों को इसकी कोई सुध नहीं।

शहर स्वच्छता की सभी मुहीमें फेल

निगम ने हिसार को साफ़ रखने के लिए नियम तो काफी बनाये, मगर उनमें सख्ती नहीं बरती। इसलिए चाह कर भी शहर की सफाई नहीं हो पा रही हैं। निगम ने खुले आम कचरा फेकनें वालों पर 100 रूपए दंड का प्रावधान किया है, मगर 10 महीनों में निगम के कार्मचारियों ने केवल 44 लोगो के खिलाफ कार्यवाई की। जबकि खुले में शौच और पेशाब करने वालों के खिलाफ इस बार कोई कार्यवाई नहीं की गई। इस पर अधिकारियों की दलीलें है कि अगर कोई शिकायत करे तो हम कार्यवाई करते मगर हम बाहर रहते हैं और चालान का बुक भी हमारे पास नहीं रहती इसलिए इस बार 2018 में अब तक हमने किसी के खिलाफ कार्यवाई नहीं की।

सूखा-गिला कचरा मुहीम विफल

सर्वोच्च न्यायलय के आदेश है कि हर राज्य को अपने शहर में सूखा -गिला कचरा अलग करना होगा। केंद्र की स्मार्ट सिटी शहर में भी उन्हीं शहरों को शामिल किया जाता हैं जो सूखा-गिला कचरा अलग रखे। मगर हिसार में यह मुहीम भगवान भरोसे चल रही हैं। हिसार का ऐसा कोई भी पूरा एक एरिया नहीं जहां सूखा-गिला कचरा उठाने का कांसेप्ट सफल रहा हो। केवल प्रायोगिक तत्व में मॉडल टाऊन में सूखा- गिला कचरा उठाया जा रहा हैं, मगर यह कचरा उठाने के बाद दौबारा एकत्रित करके कचरे के डिब्बे में फंेका जाता है। अब तक निगम ने इन कचरों को अलग कंपोस्ट करने की कोई व्यवस्था नहीं बना रखी है।

निगम का दफ्तर बना कबाड़ रखने का स्थान

निगम के दफ्तर के बाहर रेहड़ी और बैनरों की भरमार पड़ी है, इतना ही नहीं दफ्तर के अंदर गैलरी का इस्तेमाल डिपार्टमेंट की पुरानी फाइलें और कबाड़ रखने के लिए किया जा रहा है। गैलरी के दोनों तरफ अलमारी, टूटी हुई कुर्सियां और उन पर जमी धूल-मिट्टी बीमारियों के साथ गन्दगी को निमंत्रण दे रही है।

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