माइ ड्रीम सिटीहिसार

आजादी में सांस लेने का लड़कियों को भी है अधिकार

                                       रुपाली तिवारी छात्रा, दयाननद कॉलेज

Hisar News

मैं हिसार के दयानन्द कॉलेज की द्वितीय वर्ष की छात्रा हूं। मैं तो अपने मां बाप के सहयोग से अपनी शिक्षा ग्रहण करने के लिए घर से कॉलेज और कॉलेज से घर जाती-आती हूं। मेरे परिवार वाले जानते हैं कि बेटियों का पढ़ना या शिक्षा ग्रहण करना कितना जरुरी है। हालांकि अब मुझे महसूस होता है कि क्या हम सुरक्षित हैं? क्या सभी अपनी बच्चियों के बारे में ऐसा ही सोचते हैं? शायद नहीं। आज भी हमारे समाज में ऐसे कई परिवार हैं जो लड़कियों को बाहर भेजने से हिचकिचाते हैं।लड़कियों पर तरह तरह की बंदिशे डालकर रखते हैं। काफी जगह पर तो लड़कियों की कम उम्र में ही शादी कर दी जाती है। खुली हवा में सांस लेना सबका अधिकार है और सबको अपने सपने पूरा करने का भी अधिकार है।

आज हर लड़की को इतनी तो छूट होनी चाहिए कि वह अपनी मर्जी से कोई काम कर सके खुशी से जी सके, तभी वह अपनी जिंदगी में सफल हो सकती हैं। लेकिन अभी भी कहीं ना कहीं लड़कियों को अपने सपने पूरे करने की आजादी नहीं है। लड़कियों को अभी भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वे पढ़ाई से वंचित रहती है। उन्हें डर-डर के अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। मेरी सभी अभिभावकों से यही गुजारिश है कि वह अपने बच्चियों को आगे बढ़ने और पढ़ने के लिए प्रेरित करें।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close