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अस्पताल कर्मचारी हैं जिम्मेवार : कौशिक

गौरतलब है की सिनर्जी कंपनी को सिविल हस्पताल से बायो मेडिकल वेस्ट उठाने का ठेका दिया गया है। 2017 से 2019 तक यह ठेका उन्हें प्रदान किया गया है। सिविल अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट उठाने के लिए सिनर्जी कंपनी को बाकायदा 70,600 रूपए हर महीने दिए जातें है। बावजूद इसके सिविल अस्पताल में यह लापरवाही बेहद शर्मानक है। सिनर्जी कंपनी के सीईओ संजय कौशिक का कहना है की हमारे कर्मचारी रोजाना सिविल अस्पताल से 60 से 70 किलो बायो मेडिकल वेस्ट ले जातें है। बायो मेडिकल वेस्ट को अलग कर रखने की जिम्मेदारी अस्पताल के लोगो की है। हम तो सिविल अस्पताल में जातें है तो कचरा पड़ा हुआ मिलता है। उठाते है ले जातें है। हमारी इसमें कोई लापरवाही नहीं है।

ये बनाए गए थे नियम

  • पीली थैली :- शीशी में पैक दवाएं , ख़राब कटे हुए अंग ,भ्रूण, खून की थैलिया, मानवीय ऊतक को रखने की अनुमति है।
  • सफेद थैली : अंग काटने व सिलने की उपकरण, सुईया, सिरिंज, स्काल्पेस ब्लेड।
  • लाल थैली : बोतले , सिरिंज , दस्ताने ,ट्यूबिंग्स, कैथेटर , मूत्र की थैलियां, इंट्रावीनस ट्यूब आदि रखेंगे।
  • नीला कार्ड बोर्ड बॉक्स : टुटा हुआ और दूषित कांच , धातु के औजार, दवा की कांच की ख़राब हुई एपयूलस आदि।

क्या होगा एक्शन

नियम तो काफी बनाये गए है मगर हकीकत तो यह है की आज सरकारी अस्पताल ही इन नियमों की सबसे पहले धजिय्या उड़ाते है। हालाँकि अब देखना यही है की हरियाणा के बब्बर शेर कहे जाने वाले अनिल विज इस पर क्या एक्शन लेते है।

सिविल अस्पताल में डॉक्टरों व मुख्य आरोग्य अधिकारी के नाक नीचे कचरे में फेंका जा रहा बायोमेडिकल वेस्ट

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