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अदालत ने सुनाई रामपाल को उम्रकैद की सजा,एक लाख रूपए जुर्माना

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Hisar News

सतलोक अाश्रम के प्रमुख रामपाल को हिसार कोर्ट ने केस नंबर 429 के तहत उम्रकैद की सुनाई है और एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ रामपाल के 15 समर्थकों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। बता दें चार महिलाओं और एक बच्चे की हत्या मामले में रामपाल समेत 15 लोगों को 11 अक्टूबर को अतिरिक्त जिला एवं सत्र कोर्ट ने दोषी करार दिया था। पुलिस-प्रशासन ने रामपाल समर्थकों के हिसार में प्रवेश करने से रोकने के लिए नाकेबंदी की गई। रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात है। हालाकि रामपाल के वकील एपी सिंह का कहना है कि अदालत के फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती देंगे।

2014 में हुअा था रामपाल समर्थकों और पुलिस में टकराव

9 से 18 नवंबर 2014 को दस दिन तक सतलोक आश्रम में पुलिस और रामपाल समर्थकों में भारी झड़प हुई, जिसमें पांच महिलाओं और 18 महीने के एक बच्ची की मौत हो गई थी। रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने पहले आश्रम की बिजली और पानी सप्लाई काट दी थी। उसके बाद आश्रम के अंदर राशन जाने के भी सारे रास्ते बंद कर दिए गए। राशन की कमी होने पर हजारों की तादाद में लोग अाश्रम से बाहर अाए। इनमें से कई लोगों का कहना था कि वे अपनी मर्जी से अंदर नहीं गए थे, बल्कि उन्हें कैद कर मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। झड़प के 10 दिन बाद 20 हजार सुरक्षाकर्मी और पुलिसकर्मी आश्रम में घुसने में सफल हुए। लेकिन पुलिस के हाथ रामपाल नहीं लगा।

29 लोगों को दोषी करार दिया था, जिसमें तीन महिलाएं शामिल

अदालत ने रामपाल व अन्‍य आरोपिताें को भादसं की धाराओं 302, 343 अौर 120बी के तहत दोषी ठहराया था। अदालत में एफआईआर नंबर 429 के मामले में रामपाल सहित 15 आरोपितों को दोषी करार दिया। वहीं, कोर्ट ने एफआईआर नंबर 430 में 14 आरोपितों को दोषी करार दिया।

झड़प के 11वें दिन हुअा रामपाल गिरफ्तार

आखिरकार, पुलिस ने जेसीबी का इस्तेमाल कर आश्रम की पिछली दीवार तोड़नी चाही तो कई लोगों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। इसमें 28 पुलिसकर्मी घायल हुए और 200 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। पुलिस को पांच महिलाओं व 18 महीने के एक बच्चे की लाश आश्रम से मिली थी। करीब 11 दिन की जद्दोजहद के बाद 19 नवंबर, 2014 की रात रामपाल पुलिस के हत्थे चढ़ा, जिसकी गिरफ्तारी के बाद सतलोक अाश्रम को पूरी तरह से सील कर दिया गया था।

2014 में रामपाल पर हुए थे 7 केस दर्ज

रामपाल पर पुलिस ने नवंबर 2014 में सात केस दर्ज किए थे। इसमें देशद्रोह, हत्या, अवैध रूप से सिलेंडर रखने आदि काफी मामले हैं। रामपाल इनमें से दो केसों में बरी हो चुका है। इन दोनों केसों में पुलिस कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी थी, जिस पर कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी। एक मुकदमे से अदालत ने रामपाल का नाम हटा दिया था, वहीं अब रामपाल दो हत्याओं के मामले में दोषी करार दिया गया है। इसके बाद भी रामपाल के खिलाफ चल रहे तीन केस लंबित पड़े हैं।

साल 1999 में हुई सतलोक अाश्रम की स्थापना

रोहतक के करौंथा गांव में बने सतलोक आश्रम की साल 1999 में हुई थी। संत रामपाल खुद को कबीर पंथ का अनुयायी कहता था। उसके भक्तों के अनुसार वह कबीर का ही अवतार है। रामपाल और कबीर पंथ के लोग मंदिर, मूर्ति पूजा, छुआछूत, व्यभिचार और अभद्र गीत व डांस को भी बुरा मानते हैं।

जानिए अाखिर कौन है रामपाल

रामपाल का असली नाम रामपाल सिंह जाटिन है। उसका जन्म सोनीपत जिले में गोहना तहसील के धनाना गांव में हुआ था। उसके पिता नंद लाल एक किसान थे और मां इंदिरा देवी एक गृहिणी थीं। रामपाल ने खुद निलोखेड़ी आईटीआई से डिप्लोमा किया और सालों तक हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम भी किया। साल 1996 में उसने नौकरी छोड़ दी और 1999 में सतलोक आश्रम की स्थापना की। रामपाल के दो लड़के और दो लड़कियां हैं।

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