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बेटी बचाने में ‘हम’ आगे

2019 में आंकड़ा 1000 लड़कों के पीछे लड़कियों की संख्या 918

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे

हरियाणा में एक ऐसा कलंक जिसके कारण हरियाणा का नाम बदनाम था। वो समस्या थी “भ्रूण हत्या और इसके कारण लिंगानुपात में असंतुलन।” इस अभिशाप से हरियाणा को बाहर निकालने का काम और किसी ने नहीं बल्कि प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा में शुरू इस अभियान को हरियाणा में सफलता से लागू करने वाले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को जाता है।

जिन्होंने हरियाणा को इस अभिशाप से मुक्त करने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। यह सभी जानते हैं कि हरियाणा इसके पहले कोख में ही बेटियों को मौत के मुंह में सुलाने की वजह से देशभर में ‘बदनाम’ रहा था। इस कारणवश उसकी पूरे देशभर में निंदा हुआ करती थी। मगर जैसे ही 2014 में मनोहर लाल सरकार का गठन हुआ उसके बाद 2015 को वो इतिहासिक दिन नहीं भुलाया जा सकता जब हरियाणा में पानीपत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान की शुरुवात कर इस ज्वलंतशील मुद्दे को गंभीरता से लिया और इसका शुभारम्भ हरियाणा से किया। जहां भ्रूण हत्या के कारण लिंगानुपात में भरी अंतर की विकट समस्या थी। आखिरकर इतने सालों की कोशिश रंग लायी और आज प्रदेश में 1000 लड़कों के पीछे बेटियों की संख्या 918 पहुंच गई है। इस वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा 920 होने की उम्मीद जताई जा रही है।

2014 तक प्रदेश में 1000 लड़कों के पीछे लड़कियों की संख्या 871 थी, 2015 में 876, 2016 में 900, 2017-18 में 914 थी। वहीं जून 2019 तक यह संख्या 918 है। परियोजना निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने बेटियों को बचाने के लिए किए गए बेहतर प्रदर्शन के लिए पंचकूला, हिसार, यमुनानगर, नारनौल और अंबाला जिला प्रशासन की सराहना की। साल के अंत तक इस आंकड़े को 920 के पार पहुंचाने का लक्ष्य है।

गर्व है मुझे कि बदल रही समाज की सोच

प्रदेश में लिंगानुपात को लेकर जो भी आंकड़े आये हैं उसे देखकर यह वाकई एक महिला होने के नाते मुझे गर्व है कि यह गौरवान्वित पल हरियाणा को देखने को मिला। क्योंकि अब तक हरियाणा पर जो बदनुमा दाग था उसे धोने का काम न केवल सरकार बल्कि उस समाज ने भी किया है जिन्होंने अपनी पुरानी रूढ़िवादी सोच को बदल कर यह समझा कि बेटा और बेटियों में कोई भी अंतर नहीं है। आज बेटियां हर फील्ड में आगे है, बेटियां न केवल घर संभालने बल्कि देश के लिए मैडल तक ला रही है। पहले तो बेटियों को जन्म लेने के पहले के मौत के घाट उतार दिया जाता था, प्रदेश का नाम बदनाम हो रहा था, मगर अब इस बात की खुशी है कि वह अंधकार भरे दिन छट गए और आज उम्मीद की नयी किरण हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम मनोहर लाल खट्टर ने दी। उन्होंने जिस बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहीम की शुरुवात की थी। उस मुहीम को जिस समाज ने अपना अभियान समझा यह जीत आज उनकी है। आज धीरे-धीरे हमारा समाज इस कलंक से बाहर निकल रहा है यह किसी गर्वान्वित पल से कम नहीं।

नमो और मनो ने दिखा दिया देश बदल रहा है…

हमारी यह पहले से कामना थी कि बेटियों का स्थान ऊंचा हो और उसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव न रखा जाए। आज तक हरियाणा में जिस प्रकार बेटा-बेटी में भेदभाव किया जाता था उसका परिणाम ही था कि लिंगानुपात में भयंकर असमानता के कारण हरियाणा पर एक बदनुमा दाग लगा था। मगर मैं आज पूरे गर्व के साथ कहती हूं कि आज जिस प्रकार से आंकड़े सामने आ रहे हैं उसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम मनोहर लाल को इसका श्रेय जाता है। जिन्होंने बेटियों की अहमियत को समझकर “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान को देश भर में सफल बनाया। जिसका नतीजा आज हमें आंकड़ो के जरिये दिखाई दे रहा है। मैं सिर्फ यही कहना चाहूंगी “बेटा-बेटी एक सामान, यही है मेरे देश की पहचान।” वीना मानती है कि यह आंकड़े इस बात को प्रदर्शित करते हैं कि देश बदल रहा है और समाज की सोच भी।

समझ चुका समाज, आ रहा है बदलाव कि बेटियां बोझ नहीं

पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम मनोहर लाल ने “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” के माध्यम से जिस प्रकार बेटियों को मान-सम्मान देने का काम किया, उसी का नतीजा ही है कि आज लड़कियों की जनसंख्या बढ़ रही हैं। जो लोग पहले लड़कियों को बोझ समझते थे, बेटियों से ज्यादा बेटों को श्रेष्ट समझते थे। आज ऐसी गन्दी सोच निचले स्तर पर जा रही है और अच्छी सोच आगे आ रही है जो बेटियों को मान सम्मान और समानता का दर्जा देते है। मुझे खुशी है की सरकार ने ऐसे ऐसे कदम उठाये जहां उन्होंने एक मौका भी नहीं छोड़ा बेटियों को सम्मान देने का और इस बात का मुझे गर्व है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के माध्यम से सरकार ने पुरे प्रदेश ही नहीं बल्कि पुरे देश में बेटियों की छवि को बदलने का काम किया है।

बच्चियों को जीवनदान देने के लिए धन्यवाद!

आज यह हमारे हिसार के लिए ही नहीं बल्कि प्रदेश के लिए भी बेहद गौरवान्वित पल है। जो हरियाणा बेटियों भ्रूण हत्या जैसे अभिशाप से जूझ रहा था। आज उस अभिशाप को धोने का काम हमारे सम्मानीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रयासों से धुलने जा रहा है। अगर मोदी सरकार इस गंभीर मुद्दे की तरफ ध्यान न देती और “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” मुहीम को एक सक्रीय आंदोलन की तरह न लेती तो शायद आज स्थिती बेहद विकट होती। मगर मुझे खुशी है कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से बेटियों को जिस प्रकार से जीवनदान मिला है। भ्रूण हत्या रुकी है, उससे आज प्रदेश के लिंगानुपात में सुधार आया है और यह बात किसी गौरव से कम नहीं। एक व्यवसायी होने के साथ एक महिला के रूप में भी मुझे इस बात की खुशी है की बेटियों को अब और बढ़ावा मनोहर लाल सरकार के राज में मिल रहा है।

“बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” नारा नहीं, बल्कि अपील है, जिसे सभी सामाजिक संस्थाओं को अपनाना चाहिए

जब हमें इस बात का पता चला कि एक बच्ची सिर्फ इलाज के पैसों के खर्च के लिए अस्पताल में दाखिल है, यह घटना हमारे लिए किसी पीड़ा से कम नहीं। यही कारण है कि हमने अपनी जिम्मेदारी समझी और हमारे “HUM” एनजीओ के माध्यम से हमने 11,100 रूपए इक्कट्ठा कर बच्ची के पिता को दिए। मेरा मानना है कि सरकार कहती है कि “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” मगर यह नारा या योजना नहीं बल्कि एक सन्देश है समाज के लिए। इसके माध्यम से सरकार यह चाहती है कि इस सन्देश को समाज का हर नागरिक अपनाये और बच्चियों के मदद के लिए आगे आये। आज सरकार ने बच्चियों के लिए इतनी सारी योजनाए लायी है, मगर इन योजनाओं से आज भी काफी परिवार अवगत नहीं है। अगर सरकार इन योजनाओं को और गंभीरता से जमीनीस्तर तक पहुंचाये तो समाज में बदलाव निश्चित है।

बच्चियों को अच्छा जीवन देने के लिए सभी का आगे आना जरुरी

मुझे लगता है कि कोई भी गरीब बच्चा पैसों के लिए इलाज से कभी मरहूम नहीं रहना चाहिए और उन्हें स्वस्थ का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। जब भी ऐसी बच्चियों को देखें, उनकी और उनके माँ -बाप की पीड़ा देखें तो हम एनजीओ और रितु जैसी सामाजिक संस्था और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आगे आना चाहिए। वह आगे आयें। इससे बड़ी खुशी और लोगों के समक्ष आदर्श और कुछ नहीं हो सकता। इन सबके प्रयास से ही किसी न किसी बच्ची को नया जीवन मिल सकता है और उनका इलाज हो सकता है।

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