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हिसार जिला के किसानों के ऊपर बैंकों के अन्याय की दास्तां है “24/11/49”

हिसार के किसानों के साथ अन्याय सिर्फ 11 करोड़ रुपये एक साल में आया मुआवजा मगर निजि बिमा कंपनी के खाते में पंहुचा 49 करोड़ का मुनाफा

> एक्टिव मोड़ में प्रशासन : बैंक दोषी कर्मचारियों की सेलरी से रिकवरी कर किसानों को करे मुआवजा का भुगतान : उपायुक्त अशोक कुमार मीणा

>उपायुक्त ने कहा फसल बीमा में बैंकों की गलती की सजा किसान नहीं भुगतेगा, मुआवजा नही दिया तो होगी पुलिस में शिकायत दर्ज: उपायुक्त

 हिसार टुडे। अर्चना त्रिपाठी

क्या आपको पता है कि फसल बीमा योजना के नाम पर हिसार जिला के किसानों के साथ किस प्रकार अन्याय हो रहा है। आखिर ऐसा क्या कारण है कि किसानों को उनके फसल का मुआवजा नही मिल पा रहा है? क्यों मुआवजा के लिए उन्हें बैंक के चक्कर पर चक्कर कटवाए जाते है? बैंक में चक्कर काटने के बाद भी उन्हें मुआवजा नही मिलता। मगर अफसोस भाजपा के राज में यह सब हो रहा है। मगर फिर भी सांसद चुप, विधायक चुप और जनप्रतिनिधि चुप।

आखिल भारतीय स्वामीनाथन आयोग संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल प्रचार ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है कि इस एक साल मे हिसार जिला से निजी बीमा कंपनी के खाते में 24 करोड़ का प्रीमियम भर गया है, यानी कि बीमा कंपनी के खाते मविन कुल 60 करोड़ आ चुके ही। जबकि मात्र 11 करोड़ रुपये ही बीमा कंपनियों ने किसानों को मुआवजा दिया और 49 करोड़ इन निजी बीमा कंपनियों ने मुनाफा कमा कर पैसे डकार लिए है। यह आंकड़ा खुद ब खुद इस कहानी कक बयान करता है कि की कितना मुनाफा बीमा कंपनियों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर हुआ, मगर जब मुआवजा की बात आती है तो यही बीमा कंपनी- बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर चुप्पी साध लेती है। और कोई न कोई कारण बताकर किसानों को फसल बीमा योजना के नाम पर मिलने वाला मुआवजा नही देते।

यही कारण है कि विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा कही हावी न हो जाये इसे लेकर सरकार चिंता में डूबी है। यही कारण है कि चुनावी माहौल के बीच हिसार के डीसी ने किसानों की लगातार आ रही शिकायत आर सख्त रुख अख्तियार करते हुए एक महत्त्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जिसके तहत उपायुक्त अशोक कुमार मीणा ने जिला के सभी बैंकों के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों में हुए नुकसान के लिए पात्र किसानों को मुआवजा देने में हो रही देरी को सहन नहीं किया जाएगा। यदि बीमा प्रक्रिया के दौरान बैंक कर्मचारी की गलती से मुआवजा देने में विलंब हो रहा है तो इसके लिए बैंक अपने कर्मचारी से इसकी रिकवरी करके किसान को भुगतान करें। ऐसा न होने पर बैंक अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

जानें पूरा मामला :

उपायुक्त अशोक कुमार मीणा ने कहा कि जिला में अलग-अलग गांवों से किसानों की शिकायतें सामने आई हैं कि उन्हें फसल खराबे का मुआवजा नहीं मिल रहा है। जिन मामलों में बीमा कंपनियों की गलतियां थीं उनका भुगतान करवाने के लिए बीमा कंपनियों को जरूरी निर्देश दिए हैं। कुछ मामलों में बीमा कंपनियों के खिलाफ पुलिस में मामले भी दर्ज करवाए जा रहे हैं। डीसी ने कहा कि जिन मामलों में बैंकों की गलती की वजह से फसल बीमा नहीं हो पाया अथवा गांव या किसान के नाम की एंट्री करने में गलती के कारण किसान मुआवजे से वंचित हैं, उनमें बैंक संबंधित कर्मचारी से मुआवजे की रिकवरी करते हुए किसानों को भुगतान करवाए। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि कर्मचारी को इस माह की सेलरी रिकवरी किए बिना जारी न की जाए। उपायुक्त ने कहा कि मैयड़ के एसबीआई ने किसानों के खाते से पैसा काट लिया लेकिन बीमा कंपनी को यह समय से नहीं भिजवाया जिससे किसान को मुआवजा नहीं मिल पाया। इस मामले में बैंक का एक साल से ड्रामा चल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।

हिसार जिला में 1 साल में बीमा कंपनी ने किसानों को दिए 11 करोड़ मुआवजा और कमाए 49 करोड़ रुपये: विकल

विकल पचार राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय स्वामीनाथन आयोग संघर्ष समिति)
विकल पचार
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय स्वामीनाथन आयोग संघर्ष समिति)

कदम उचित मगर देरी से उठाया, 4 साल से किसान फसल बीमा योजना से परेशान है। उसके मर्जी से बीमा नही कांटा जाता। जब मुआवजा देने की बात आती है तो बैंक वाले बोलते ही आपका एकाउंट अधर से लिंक नही है। और बहानेबाजी करके किसानों का मुआवजा उन्हें नही देते। वैसे अभी फसल बीमा योजना के बारे में प्रशासन जितना सख्ती दिख रहा है वह चुनावी स्टंटबाजी के अलावा कुछ नही है। सरकार की ऑडिट रिपोर्ट पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो 1600 करोड़ रुपये निजी कंपनिया फसल बीमा योजना के नाम पर कमा रही है। सरकार की फसल बीमा योजना किसान हितैषी बिल्कुल नही है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात तो यह है कि हिसार में किसानों ने इतना पैसा फसल बीमा योजना के नाम पर भर मगर उनके उतना क्लेम आया ही नही। हकीकत तो यह है कि हिसार में कृषि विभाग और बीमा कंपनी द्वारा क्रॉप कटिंग होती ही नही। जबकि सरकार को चाहिए था कि हर गाँव में क्रॉप कटिंग होनी चाहिए। ताकि किसानों के फसल का नुकसान का पता लगाया जा सके और उन्हें मुआवजा दिया सके। मगर ऐसा न करने से किसान के फसल के नुकसान का अंदाजा नही लगता। हैरत की बात है कि सिरसा में हमने संघर्ष करके सभी गांव में क्रॉप कटिंग का काम करवाया।

जबकि हिसार जिला में लॉटरी सिस्टम से बरवाला के 2 गाँव, उकलाना के 2 गाँव , अर्थात कुछ न चुने गाँव में ही विभाग मुआयना करता है। जिससे किसानों की फसलों के नुकसान के अंदाज लगाना मुश्किल हो जाता है। सरकार की कृषि विभाग और बीमा कंपनी ऐसा करके जेबे भरने का काम किया है। अगर हिसार की बात करे जो आपके डिस्ट्रिक्ट ने एक साल में फसल बीमा योजना के नाम पर 24 करोड़ प्रीमियम दिया, और किसानों को महज 11 करोड़ क्लेम दिया जबकि बीमा कंपनी के एकाउंट में 49 करोड़ का फायदा पहुँचाया गया है।

फसल बीमा योजना एक फर्जीवाड़ा, किसानों के हित के लिए लामबंद करेंगे :अनिल मान

अनिल मान राष्ट्रीय सह संयोजक, किसान कांग्रेस सेल
अनिल मान
राष्ट्रीय सह संयोजक, किसान कांग्रेस सेल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जल्दबाजी में लागू की गयी है। इस योजना के तहत सिर्फ निजी कंपनियों को ही मुनाफा कमाने का काम किया जा रहा है। मान का कहना था कि हर किसान बीमा निकलता है, मगर सरकार जब तक 5 – 10 गाँव में जब तक फसल खराब नही हो जाती किसी किसान को तब तक फसल बीमा योजना का लाभ नही मिलता। इतना ही नही जब ओले पड़ते है तो वह 50-100 एकड में पड़ते है, ऐसे में किसान की अगर फाल खराब हो जाये तब भी उन्हें फसल नुकसान का मुआवजा नही मिलता। उन्होंने आगे कहा कि इसमें बहुत सी त्रुटियां है। सरकार को चाहिए था कि निजी कंपनी को बीमा में न लेकर LIC कंपनी से किसान फसल बीमा करवाना चाहिए था। मगर सरकार ने ऐसा न कर बीमा कंपनियों को मुनाफा पहुचाया। सर्वे का सिस्टम, मुआवजा देने की प्रक्रिया हर जगह खामी रहती है। आज किसान सरकार की इस पालिसी के कारण रो रहा है। इसलिए अब हम इस मुद्दे को लेकर किसानों को लामबंद कर रहे है।

फसल बीमा योजना के हजारों किसानों का क्लेम बैंकों में अभी भी लटका हुआ है : रिढ़ाऊ

राजकुमार रिढ़ाऊ प्रदेशाध्यक्ष, जेजेपी किसान प्रकोष्ठ
राजकुमार रिढ़ाऊ
प्रदेशाध्यक्ष, जेजेपी किसान प्रकोष्ठ

जेजेपी किसान प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष राजकुमार रिढ़ाऊ ने कहा कि फसल बीमा योजना के नाम पर सरकार ने किसानों से मात्र छलावा किया है। असलियत तो ये है कि आज हजारों किसानों का क्लेम बीमा कंपनियों की लापरवाही और बैंकों में एंट्री नहीं होने के कारण लटका हुआ है जबकि सरकार इस बीमा योजना का झूठा ढिंढोरा पीट रही है। असल में फसल बीमा योजना की स्थिति ये हैं कि फसल के नुकसान की पूर्ति का मरहम नहीं लगने से अन्नदाता सिर पकड़कर बैठा है और अब फसल बीमा के चंगुल से दूर भाग रहा है। उन्होंने कहा कि जब फसल में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति की बारी आई तो किसानों के साथ सरकार और बीमा कंपनी ने मिलकर धोखा किया।

जेजेपी किसान सैल के प्रदेशाध्यक्ष रिढ़ाऊ ने बताया कि साल 2016 से प्रदेश के पांच हजार से ज्यादा किसानों का क्लेम बैंकों में लटका हुआ है और सरकार किसानों को बार-बार बैंक और बीमा कंपनियों के धक्के खिला रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने शुरु में एक संपूर्ण बीमा योजना लाने का वादा किया था, लेकिन बदले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना देते हुए किसानों की बजाय निजी कंपनियों को मालामाल कर दिया।

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