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सोशल मीडिया बना रिपोर्टर!

फाइनेंशियल टाइम्स ने पीएम मोदी को भारत का पहला सोशल मीडिया प्रधानमंत्री दिया था करार

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे

अखबार और टीवी यह दो माध्यम ऐसे हुआ करते थे जब हमें अपने आसपास की खबरों का पता चला करता था। मगर अब दौर धीरे-धीरे बदलता जा रहा है। जब सभी खबरें जनता तक सामने नहीं आ पाती, तो जरुरी है कि यह खबरंे किसी न किसी माध्यम से लोगों तक पहुंचे। कुछ खबरें ऐसी भी होती है जो जनता के बीच पहुंचनी जरुरी होती है मगर वह पहुंच नहीं पाती। यही कारण है कई पार्टियों के नेताओं के साथ आम नागरिकों ने सोशल मीडिया को ही खबरें पहुंचने का जरिया बना लिया है।

जिस प्रकार से चुनाव नजदीक आते ही कोई अपनी अब पत्रकारों की भूमिका में सोशल मीडिया में अपने पांव पसारता जा रहा है। कोई सोशल मीडिया को अपने कार्यों के प्रचार का माध्यम बना रहा है, तो कोई सरकार की कारगुजारी की पोल खोल का। ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि समाज से जुड़ी इन खबरों का बाहर लाने वाला व्यक्ति पत्रकार और सोशल मीडिया पत्रकारिता का माध्यम बनता जा रहा है। कभी आपने गौर किया है कि जजपा नेता दुष्यंत चौटाला के फेसबुक पेज पर वह अक्सर सरकार की खामियां जो कहीं दिखाई नहीं जाती उसे अपने प्रोफाइल के माध्यम से दिखाने की कोशिश करते हैं।

5 सितम्बर का ही उदाहरण ले लीजिये उन्होंने जहां हरियाणा को बेरोजगारी के मामले में देश का नम्बर 1 राज्य की खबर दिखाने की कोशिश की तो, वहीं दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनोहन सिंह का एक बयान दिखाकर देश को यह बताने कि कोशिश कि की देश की अर्थव्यवस्था बेहद चिंताजनक है और भारत मंदी के दौर में आ चुका है। मॉब लॉन्चिंग का मामला भी सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आया था। बता दंे कि यही कारण है कि आज बड़े से बड़ा नेता भी खुद पत्रकार बनकर अपनी समस्या लोगों तक पंहुचा रहा है। जो इस बात का संकेत है कि पत्रकार की भूमिका कितनी बदली है और खबरों को जनता के सामने लाने में सोशल मीडिया अहम भूमिका निभाने वाला है।

कांग्रेस नेता दीपेंद्र ने बिगड़ती आर्थिक अर्थव्यवस्था का किया खुलासा

कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से ही देश में आर्थिक अर्थव्यवस्था का खुलासा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का बयान अपने सोशल मीडिया में शेयर करते हुए बताया था कि भारत की अर्थव्यवस्था बहुत चिंताजनक है। पिछली तिमाही में जीडीपी केवल 5% की दर से बढ़ी जो लम्बी आर्थिक मंदी की तरफ इशारा कर रही है। बता दें पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा नेता द्वारा बूथ कैप्चरिंग का आरोप लगाने वाले यह दीपेंद्र हूडा ही थे। जिन्होंने इस बात को अपने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रकाश में लाया था। अब जब मामला सोशल मीडिया में आ जाये तो जाहिर है जनता भी सोचती होगी कि यह खबर तो उन्होंने टीवी या कहीं और नहीं देखी।

दुष्यंत चौटाला सोशल मीडिया के जरिये कर रहे सरकार पर वार

5 सितंबर को दुष्यंत ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि शर्मनाक आंकड़े! बेरोजगारी के मामले हरियाणा देश में सबसे आगे नंबर 1 पर पंहुचा गया। मुख्यमंत्री खट्टर एक और तो हरियाणा की नौकरियां हरियाणा से बाहर वालों को दे रहे हैं दूसरी अोर हरियाणा में बेरोजगारी का आकड़ा देश में सबसे ऊंची दर 28.7% पर पहुंच गया। #रोजगार_मेरा_अधिकार यह पहली बार नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने ऐसे ही आंकड़े और किसानों के उपज का हाल भी सोशल मीडिया के माध्यम से बयान किया था। इतना ही नहीं वह अक्सर सोशल मीडिया में लाइव करके राज्य की चिंताजनक स्थितियों को उजागर किया। बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से ही वह कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हैं। उनकी इस भूमिका को देखते हुए कहा जाता है कि वह सोशल मीडिया में किसी पत्रकार से कम नहीं।

सोशल मीडिया की ताकत ने कराया दबंग दरोगा को सस्पेंड

सोशल मीडिया कितना कारगर साबित हो सकता है उसका उदहारण इस बात से लगाया जा रहा है, हाल में नया मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 11 हजार रूपए का चालान काटने वाले युवक ने जब एक दरोगा को बिना हेलमेट उन्होंने पकड़ा और हेलमेट के बारे तो दरोगा ने ही दबंगई दिखते हुए उस आदमी के साथ हाथापाई कर पुलिस थाने भेजा।
मगर जब यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ पुलिस ने उस दरोगा को लाइन हाजिर कर उसके खिलाफ न केवल कठोर एक्शन लिए बल्कि पीड़ित को तुरंत जेल से बाहर निकालकर उसे गुजारा भत्ता देने का आदेश भी दिया। यही ताकत है आज के रिपोर्टर “सोशल मीडिया” की।

दोधारी तलवार

ऐसा नहीं है कि हमेशा इसका असर जैसा सोचा गया, वैसा ही रहा। एक नेता के समर्थकों ने दूसरे को पप्पू और जोकर का नाम दिया तो जवाब में दूसरे के समर्थकों ने पहले नेता को फेंकू और जुमलेबाज कहा। एक ने कहा नेता छुट्टी मना रहे हैं तो दूसरे ने पलट कर कहा नेता विदेश यात्राओं में ही व्यस्त रहते हैं।

सोशल मीडिया की अहमियत

आपको याद होगा कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से राजनीति में आए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के ट्विटर पर 15 लाख फॉलोअर हैं। केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी की स्थापना से एक साल पहले नवंबर, 2011 में ट्विटर से जुड़े थे। इसके करीब दो साल बाद मोदी ट्विटर पर आए। उनके करीब 36 लाख फॉलोअर हैं। याद होगा कि यूपीए-2 के सरकार में रखते हुए केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा था कि, “अब कोई गंभीर राजनेता सोशल मीडिया की उपेक्षा नहीं कर सकता।” भारतीय राजनेताओं में हाल फिलहाल तक थरूर के सबसे ज़्यादा फॉलोअर हुआ करते थे। वह आगे कहते हैं,”सोशल मीडिया के जरिए जनता के एक खास हिस्से तक पहुंचा जा सकता है। ऐसे में इस पर ध्यान देने की जरूरत है और साफ है कि विपक्षी पार्टी भी इस पर ध्यान दे रही है।”

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