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जन्म-प्रमाण पत्र के नाम पर “घोटाला”

अवैध वसूली पर चीफ रजिस्ट्रार को नोटिस

  • जांच के आदेश, सरकारी दरें अलग और नगर निगम में हो रही अवैध और मनमानी वसूली ,
  • जन्मप्रमाण-पत्र में अक्सर कर्मचारी करते हैं गलती और अभिभावकों को लगवाते हैं चक्कर ,
  • निगम में कतार पर खड़े रहने वालो से कोरियर के नाम पर भी हो रही वसूली

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे
एक तरफ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार ईमानदारी का ढिंढोरा पीट कर आगामी विधानसभा में उतरने जा रही है। मगर इसी सरकार के राज में जन्म प्रमाणपत्र के नाम पर नगर निगम के अंदर चल रही धांधली का पर्दाफाश हुआ है। हरियाणा सरकार के नियमो के अनुसार नवजात शिशु के जन्म के 21 दिन तक उनके अभिभावकों को मुफ्त जन्म प्रमाणपत्र देना अनिवार्य है, मगर बावजूद इसके जन्म प्रमाणपत्र के नाम पर अवैध उगाही का मामला सामने आया है।

हिसार विवेक नगर के निवासी आशीष जैन का आरोप है कि रेशमा देवी गोयल अस्पताल में उनके घर बेटे का जन्म हुआ। तौफीक नामक पुत्र का जन्म प्रमाणपत्र हेतु जब उन्होंने नगर निगम में आवेदन किया तो उनसे बाकायदा 75 रूपए की फीस वसूली गयी, जबकि नियमनुसार 21 दिन तक जन्म प्रमाणपत्र का पंजीकरण निशुल्क है। मगर बावजूद इसके आशीष जैन का आरोप है कि उससे न केवल अवैध तौर पर पैसों की उगाही की गई, बल्कि उनका यहां तक मानना है कि इस प्रकार की अवैध वसूली औरों के साथ भी होती आ रही है। आशीष का आरोप है कि लोग लाइन में खड़े होकर जन्म प्रमाणपत्र निकालते हैं, मगर फिर भी कोरिअर सेवा के नाम पर उनसे पैसे वसूल करके ठगी की जा रही है।

जब इस सन्दर्भ में सम्बंधित अधिकारी से उन्होंने शिकायत की उसके बावजूद भी कोई असर दिखाई नहीं दिया। यही कारण है कि आशीष जैन ने जन्म प्रमाणपत्र के नाम पर चल रहे इस बहुत बड़े “स्कैम” को लेकर न केवल सीसीएस एचएयू में शिकायत दी, मगर पुलिस ने भी इस सन्दर्भ में उनकी शिकायत लेने के इंकार कर दिया। आशीष जैन का मानना है कि जन्म प्रमाणपत्र के नाम पर चल रहे इस “महाघोटाले” के तार कइयों से जुड़े हैं। यही कारण है कि उन्होंने पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, शहरी स्थानीय निकाय, महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त (दिल्ली), नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (दिल्ली), मानवधिकार आयोग, बालसंरक्षक आयोग के पास अपनी शिकायत भेजी है।

हालांकि अब इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लेते हुए हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने चीफ रजिस्ट्रार को नोटिस भेजकर जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए रजिस्ट्रार को कहा है कि मामले की जांच की जाए और संबंधित अधिकारियों को नियमों का पालन करने के लिए सख्त हिदायत दी जाए। इसके साथ ही मामले की पूरी जांच करके, क्या एक्शन लिया गया, इसकी रिपोर्ट भी सौंपने के आदेश भी उन्होंने दिए हैं। इतना ही नहीं आशीष की शिकायत पर 26 जून को हिसार नगर निगम में मामले की सुनवाई के लिए शिकायतकर्ता को बुलाया गया है। बता दे कि अगर इस प्रकार के ऐसे कई मामले सामने आये तो इसका मतलब साफ है कि जन्म प्रमाणपत्र के नाम पर चल रहे “गोरखधंधे” को रोकने में कहीं न कहीं सरकार विफल साबित हो रही है।

इस गंभीर मसले पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की ब्रांड अम्बेसडर वीना अरोड़ा का कहना है कि 21 दिन तक तो नवजात शिशु के जन्म प्रमाणपत्र निशुल्क देना अनिवार्य है अगर ऐसा नहीं हो रहा तो मामले की कड़ी जांच करनी आवश्यक है। हो सकता है इस प्रकार का गोरखधंधा और इलाकों में भो होता हो। जरुरी है सरकार एक समिित बनाये और विभिन्न हस्पतालों में सरप्राईज विजिट करके जन्म प्रमाणपत्र को लेकर चल रही व्यवस्था और वसूली पर निगरानी करें।

इस मामले में जब मेयर गौतम सरदाना से संपर्क साधने  की कोशिश की गयी तो वह किसी बैठक में व्यस्त होने के कारण कुछ भी कहने के लिए उपस्थित न थे।  

जन्म -मृत्यु प्रमाणपत्र के नाम पर चल रहे गोरखधंधे की हो सीबीआई जांच: आशीष जैन

आशीष जैन का कहना था कि उसके बेटे का जन्म 21 अप्रैल 2019 को हुआ। 2 मई को उसने आवेदन किया और 3 मई को बेटे का जन्म प्रमाणपत्र बन गया। प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया 21 दिन के अंदर पूरी हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद निगम कर्मचारियों ने उससे प्रमाणपत्र के नाम पर 75 रुपये का भुगतान करवा लिया। जबकि 21 दिन में निशुल्क होता है। यही नहीं, प्रमाणपत्र में कई गलतियां कर दीं, जिसे ठीक करवाया गया। ठीक करवाने के बाद भी कर्मचारियों ने गलतियां छोड़ दीं और नगर निगम के चक्कर कटवाए। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि यह एक “महाघोटाला” चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में अधिकारियों से लेकर कुछ ऊपरी नेताओ की भी मिलीभगत है यही कारण है कि वह यह मांग कर रहे हैं कि इस पुरे मामले की सीबीआई जांच हो। जिसमें न केवल हिसार बल्कि पुरे हरियाणा में चल रहे इस गोरखधंधे का भंडाफोड़ किया जाए। इतना ही नहीं दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो तभी जाकर आम नागरिकों को न्याय मिलेगा।

अन्य धांधलियों का हुआ खुलासा

इतना ही नहीं केंद्र सरकार की गाइडलाईन यह भी कहती है कि अगर हस्पताल ने जन्म या मृत्यु की जानकारी रजिस्ट्रार तक पहुंच जाती है तो यह उसके लिए अनिवार्य है कि अगर अभिभाक 1 महीने में प्रमाणपत्र लेने न आये तो उनके घर में कोरियर के जरिये यह प्रमाणपत्र पहुँचाना अनिवार्य है।

निगम में बुधवार के दिन करेक्शन का काम का हवाला देकर नहीं लेते आवेदकों का जन्म प्रमाणपत्र का फार्म
तय सीमा पर सूचना देने के बावजूद लिया जाता है जन्म पंजीकरण शुल्क
अक्सर जन्म प्रमाण-पत्र बनाते हुए अधिकारी करते है त्रुटियां और गड़बड़ी।
जन्म मृत्यु अधिनियम की धारा 12 के विपरित अवैध शुल्क उगाही
बाद में त्रुटियां ठीक करने के नाम पर फिर अभिभावकों को होती है मानसिक परेशानी
सिविल रेसिसट्रेशन प्रणाली के तहत चैप्टर 3 की धरा 3.1 के खंड C के तहत एक्यूरेसी न करना
सिविल रजिस्ट्रेशन प्रणाली के तहत चैप्टर 4 की धरा 4.2 के तहत खंड D की अवहेलना
कंप्यूटर ऑपेरटर द्वारा कार्य करने से मनाही सर्विस नियम का उल्लंघन

जन्मप्रमाणपत्र पंजीकरण के नाम पर कैसे हो रहा “महाघोटाला”

शिकायतकर्ता के अनुसार जन्म-मृत्यु पंजीकरण एक्ट 1969 और रुल 2002 के नोटिफिकेशन के अनुसार 21 दिन के अंदर जन्म प्रमाणपत्र के पंजीकरण पर फीस नहीं ले सकते हैं। मगर जब हिसार टुडे की टीम ने एक्सपर्ट से इस मुद्दे पर चर्चा की तो हमें कुछ ऐसे चौंका देने वाले तथ्य मिले जिससे देखने के बाद शायद सभी के होश उड़ जाए। बता दें कि 21 दिन तक जन्म प्रमाणपत्र पंजीकरण मुफ्त है, मगर 21 से 30 दिन में अगर पंजीकरण करवाना हो तो सिर्फ 5 रूपए पेन्लटी और मात्र 2 रूपए की लेट फीस है।

वही 30 दिन से 1 साल के अंदर पंजीकरण करवाने पर 25 रूपए पेनलटी और 10 रूपए लेट फीस लगती है। जबकि एक साल तक जन्मप्रमाणपत्र का पंजीकरण न करवाने पर उसके बाद अभिभावक को 25 रूपए पेनल्टी और मात्र 10 रूपए लेट फीस लगती है। मगर हमारे नगर निगम ने क्या दरें रखी है शायद यह देख आप चौंक जाए।

मामला गंभीर, सरकार को करनी चाहिए सख्त जांच : वीना अरोड़ा

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की ब्रांड अम्बेसडर और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की बहन वीना अरोड़ा का मानना है कि यह जो दरे नगर निगम द्वारा वसूली जा रही है वो गलत हैं। जबकि सरकार की आधिकारिक वेबसाइट में दरें कुछ और हैं। 21 दिन तक निशुल्क जन्म प्रमाणपत्र देना अनिवार्य होने के बावजूद पैसे उगाही करना बिल्कुल गलत है। इस मामले की सख्ती से जांच होनी चाहिए। इतना ही नहीं सरकार को एक कमेटी का गठन कर हरियाणा में जिन जगह जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाये जाते हैं उनकी सरप्राईज विजिट करवाकर जांच करनी चाहिए और वह इस संदर्भ में सरकार से मांग भी करेगी।

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