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मनोहर राज में भ्रष्टाचार पर लगाम

510 बसों के टेंडर प्रक्रिया: सरकार ने लगाई घोटाले पर मुहर, अफसरों-कर्मचारियों पर गिरेगी गाज

हिसार टुडे  | 

मनोहर लाल खट्टर सरकार ने आखिरकार भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने के अपने वादे को साकार करने के लिए हाल में निजी बसों को हायर करने के लिए सरकार द्वारा बनाई गई किलोमीटर स्कीम योजना के अंतर्गत 510 बसों की टेंडर प्रक्रिया के दौरान हुई घपलेबाजी का पर्दाफाश कर माना कि इसमें घोटाला हुआ है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यह भी स्वीकार कर लिया है कि इस योजना के अंतर्गत 510 बसों की टेंडर प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। इसी के चलते 510 निजी बसों को हायर करने संबंधी टेंडर को उन्होंने रद्द कर दिया। उधर, सरकार इन दिनों विजिलेंस की जांच रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने साफ कर दिया है कि इस घपलेबाजी में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कर्मचारी हो, अधिकारी हो या कोई ठेकेदार।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यह भी स्वीकार किया कि 510 निजी बसें हायर करने के रेट और बाद में 190 बसों के टेंडर के दौरान आए रेट में भारी अंतर पाया गया, जो इस घपलेबाजी का मुख्य आधार बना है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि विजिलेंस रिपोर्ट के अध्ययन के बाद सरकार इस संदर्भ में हाईकोर्ट में चल रहे केस में भी जवाब देगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी करेगी।

गौरतलब बात है कि विजिलेंस की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि जांच के दौरान में जब टेंडर के आवेदन करने वाले कंप्यूटर का आईपी एड्रेस खंगाला तो सामने आया कि हाउसिंग बोर्ड और पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों के कंप्यूटर से भी यह आवेदन किए गए थे। विभाग की वेबसाइट में आवेदन का समय भी कुछ समय तक ही खुलना सामने आया है। यानी ऑपरेटरों की सुविधा के अनुसार यह रहा। ताकि दूसरा कोई बसों के लिए आवेदन न कर सके। बता दें परिवहन विभाग की ओर से 510 बसों के टेंडर 37 से 41 रुपए प्रति किमी के रेट से किए। बाद में 190 बसों के टेंडर हुए तो 21-22 रु. प्रति किमी रेट सामने आए। सीएम ने जांच विजिलेंस को सौंपी। मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा। बताया जा रहा है कि यदि स्कीम सिरे चढ़ जाती तो सरकार को एक साल में करीब 90 करोड़ रु. से ज्यादा नुकसान होता। जबकि इस योजना के तहत 10 साल का एग्रीमेंट किया गया था। ऐसे में सरकार को करीब 900 करोड़ रु. की चपत लगना तय था। यह नुकसान 190 बसों के कम आए रेट और 510 बसों के रेट में आए अंतर के हिसाब से आंका जा रहा है। मनोहर लाल के राज में इसका खुलासा होना यानी भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने का मुख्यमंत्री का प्रयास माना जा रहा है, मगर इसमें सफलता तभी मिलेगी जब दोषियों पर कार्यवाई की जाए।

“किलोमीटर आधार पर बस खरीद की विजिलेंस जांच में घोटाले का किया खुलासा”

^किलोमीटर स्कीम में अनियमितता सामने आई है। इसलिए 510 बसों के टेंडर रद्द कर दिए गए हैं, लेकिन 190 बसों के हुए टेंडर मान्य रहेंगे। उसमें रेट सही आया है। गड़बड़ी करने वाले कर्मचारी-अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। – मनोहर लाल, मुख्यमंत्री हरियाणा।

रद्द नहीं होगी योजना

190 बसों के टेंडर रेट में अनियमितत के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना रद्द नहीं होगी और 190 निजी बसों हायर करने के दूसरे टेंडर के अंतर्गत ठेकेदारों से मोलभाव करके कम दर के लिए बातचीत की जा रही है। उन्होंने कहा की, 510 बसों के टेंडर में खामियां सामने आई हैं, लेकिन योजना गलत नहीं है। 190 बसों के दूसरे टेंडर में पहले टेंडर की तरह खामियां न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया है। बता दें कि रोडवेज की 510 निजी बसों का भविष्य अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिका हुआ है। सीएम ने कहा कि यदि हाईकोर्ट कहता है कि ये टेंडर पूरी तरह खारिज समझा जाए, तो सरकार पीछे हट जाएगी और यदि 510 बसें खरीद चुके ठेकेदारों के पक्ष में हाईकोर्ट कोई फैसला सुनाता है, तो सरकार इन प्राइवेट बसों को खरीदकर अपने रोडवेज का बेड़ा बढ़ा लेगा।

विजिलेंस जांच में खुलासा : टेंडर के आवेदन में दूसरे विभागों के कर्मचारियों के कंप्यूटर हुए इस्तेमाल

प्राइवेट ऑपरेटरों ने पूल सिस्टम अपनाया। यानी ज्यादातर ने आपस में बात कर रेट दर्ज किए। सबसे निचले रेट पर विभाग को टेंडर जारी करना था। ऑपरेटरों ने पहले ही रेट ज्यादा भर दिए। जांच में टेंडर के आवेदन करने वाले कंप्यूटर का आईपी एड्रेस खंगाला तो सामने आया कि हाउसिंग बोर्ड और पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों के कंप्यूटर से भी यह आवेदन किए गए थे। विभाग की वेबसाइट में आवेदन का समय भी कुछ समय तक ही खुलना सामने आया है। यानी ऑपरेटरों की सुविधा के अनुसार यह रहा। ताकि दूसरा कोई बसों के लिए आवेदन न कर सके।

आएंगी 867 नई बसें

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा हरियाणा रोडवेज के बेड़े में 867 नई बसें और आएंगी। 500 बसों का टेंडर जारी हो चुका है और 367 का टेंडर अभी जारी होना है। अभी रोडवेज के बेड़े में बसों की संख्या 3850 है, जोकि प्रदेश की आबादी के लिहाज से बहुत कम है।

योजना रद्द करने की जिद पर अड़ा महासंघ, सरकार को दिया अल्टीमेटम

बता दें कि हरियाणा कर्मचारी महासंघ ने किमी स्कीम योजना को रद्द न करने के सरकार के फैसले का विरोध किया और दस दिन का अल्टीमेटम दिया है। जिसके चलते अब प्रदेश स्तर पर कर्मचारी हर जिले में मुख्यमंत्री के नाम जिला उपायुक्तों के माध्यम से ज्ञापन भेजेंगे और अगर सरकार फिर भी नहीं मानी तो बहुत बड़ा आंदोलन करने की बात रोडवेज कर्मचारी और महासंघ करने की योजना बना रहा है।

ऐसे हुआ शक

परिवहन विभाग की ओर से 510 बसों के टेंडर 37 से 41 रुपए प्रति किमी के रेट से किए। बाद में 190 बसों के टेंडर हुए तो 21-22 रु. प्रति किमी रेट सामने आए। सीएम ने जांच विजिलेंस को सौंपी। मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा। बताया जा रहा है कि यदि स्कीम सिरे चढ़ जाती तो सरकार को एक साल में करीब 90 करोड़ रु. से ज्यादा नुकसान होता। जबकि 10 साल का एग्रीमेंट किया गया था। ऐसे में सरकार को करीब 900 करोड़ रु. की चपत लगना तय थी। यह नुकसान 190 बसों के कम आए रेट और 510 बसों के रेट में आए अंतर के हिसाब से है।

इन मुद्दों पर नहीं बनी बात

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा, धर्मबीर फोगाट, नरेश कुमार शास्त्री, राजबीर बेरवाल ने बताया कि सरकार और कर्मचारियों के बीच जिन मांगों पर सहमति नहीं बनी उनमें नई रेगुलराइजेशन पॉलिसी नहीं बनेगी, एनपीएस को खत्म कर पुरानी पेंशन बहाली नही होगी, रिटार्यड कर्मचारियों को बढ़ती उम्र पर पेंशन बढ़ोतरी नहीं मिलेगी व गर्भाशय के ऑपरेशन के लिए विशेष अवकाश पर इंकार रहेगा आदि शामिल है।
जांच में क्या आया सामने- हाउसिंग बोर्ड व पीडब्ल्यूडी के एक-एक कर्मचारी के कंप्यूटरों का भी इसके लिए इस्तेमाल हुआ।

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