टुडे विशेष

हुड्डा की रोहतक रैली से “OUT” राहुल और सोनिया की दुबारा एंट्री

विधानसभा में अभय और हुड्डा के बीच जमकर दिखी अंडरस्टैंडिंग , क्या महागठबंधन से भाजपा को खौफ , क्या बंसीलाल और भजनलाल की राह पर चल रहे हुड्डा

महेश मेहता | हिसार टुडे

इन दिनों हरियाणा में चर्चा है उस पोस्टर की जिसने इस बात की तरफ कहीं न कहीं संकेत दिए हैं कि प्रदेशाध्यक्ष की कमान पाने के लिए लगता है हुड्डा पार्टी हाईकमान से सीधे सीधे भिड़ने के मूड में है।

यह बात इसलिए उठ रही है क्योंकि हाल में भूपेंद्र सिंह हुड्डा 18 तारीख को महापरिवर्तन रैली के माध्यम से बड़े बदलाव की तरफ इशारा कर चुके है। माना जा रहा है कि हो सकता विधानसभा चुनाव के पूर्व हुड्डा इस महापरिवर्तन रैली के जरिये खुद की नयी पार्टी बना सकते है। नई पार्टी का जिक्र आज इसलिए क्योंकि हाल में इस महापरिवर्तन रैली के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा के 4 तारीख को नयी अनाज मंडी रोहतक में कार्यकर्ता सम्मलेन का आयोजन करने जा रहे है। इसी कार्यक्रम को लेकर कुछ पोस्टर सोशल मीडिया के साथ भूपेंद्र सिंह हुड्डा के फेसबुक प्रोफाइल में भी डाले गए है, मगर इन पोस्टरों में से राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और गुलाम नबी आजाद OUT हो गए हैं।

अब इन पोस्टरों में सिर्फ भूपेंद्र सिंह हुड्डा के तस्वीर के अलावा सिर्फ कांग्रेस के हाथ का निशान है। इस पोस्टर से यह कयास लगाए गए की हुड्डा ने अलग पार्टी बनाकर कांग्रेस से बगावत का मूड बना लिया। उसी के बाद से भूपेंद्र सिंह हुड्डा की हो रही किरकरी के बाद आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पोस्टरों में अचानक “राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी” ने कमबैक किया है।
गौरतलब बात है कि प्रदेशाध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल चुके भूपेंद्र सिंह हुड्डा चाहते हैं कि प्रदेशाध्यक्ष की कमान उन्हें मिले। इसी कोशिश में वह टिकट के मजबूत दावेदारों के साथ वर्तमान कांग्रेस विधायकों के समर्थन पर ही पार्टी हाईकमान से भिड़ने को तैयार है। इतना ही नहीं हुड्डा पर उनके समर्थित विधायकों का दबाव भी है कि अगर 18 तारीख तक पार्टी ने कोई फैसला नहीं लिया तो वह ही कोई फैसला ले ले। ऐसे में अब देखने योग्य बात होगी कि क्या पोस्टर से आउट “राहुल और सोनिया” की एंट्री के साथ उन्हें उनका साथ मिलेगा या आगे चलकर हमेशा-हमेशा के लिए वह हुड्डा के पोस्टरों से गायब हो जाएंगे।

हुड्डा और अभय में क्या पक रही खिचड़ी

बता दें कि हाल में विधानसभा सत्र के दौरान अभय चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा के बीच अंडरस्टैंडिंग साफ़ दिखाई दे रही थी। उनकी यही बात राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गयी है। बता दें कि शून्यकाल के दौरान दोनों की एक अलग सी घनिष्ठता नजर आई। उनकी इसी स्थिति को देखते हुए महागठबंधन की चर्चाओं को और हवा मिल गयी है। अभय व हुड्डा ने आपस में करीब तीन मिनट बातचीत की। बता दें कि ओमप्रकाश चौटाला पर सीबीआइ के शिकंजा कसने का आरोप भी अभय चौटाला ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर लगाते रहे हैं। हालांकि जब लोकसभा चुनाव में पार्टी का बुरी तरह प्रदर्शन के बाद अचानक जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में ओमप्रकाश चौटाला जेल से बाहर आए और उन्होंने रोहतक में दीपेंद्र सिंह हुड्डा की हार पर आश्चर्य जताते हुए उन्हें अच्छा लड़का बताया था। यही कारण है कि तब से शुरू सुगबुगाहट के बाद अब हुड्डा और अभय के इस चर्चा के भी महागठबंधन को लेकर मायने निकाले जा रहे है। इतना ही नहीं शायद आपको याद होगा कि ओमप्रकाश चौटाला ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसा कुछ होगा कि बाकी पार्टी उनके पास गठबंधन के लिए आएंगी।

क्या हुड्डा दिखाना चाहते थे कि उन्हें राहुल और सोनिया की जरुरत नहीं

बता दें कि जिस प्रकार पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी शर्तो पर चलकर बिना किसी दबाव में कांग्रेस की सत्ता को संभाल कर रखे हुए है। ठीक उसी प्रकार भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी यह चाहते है कि कांग्रेस पार्टी हाई कमान भी उन्हें ऐसी ताकत दे। मगर हुड्डा के कारण प्रियंका गाँधी के पति रोबर्ट वाड्रा फंसे और उनका नाम जमीन घोटाले में आया इसलिए उसके बाद से राहुल और गाँधी परिवार हुड्डा से खफा है और वो उन्हें किसी भी हाल में प्रदेश की कमान सौपने को तैयार नहीं। ऐसे में अशोक तंवर को बदलने के लिए हुड्डा ने पार्टी को आखिरी अल्टीमेटम दिया और साथ ही कहा है कि 18 तारीख को अगर पार्टी कोई निर्णय नहीं लेगी तो वह किसी नई पार्टी का संकेत देने के साथ ही अपने चुनाव लडऩे वाले कार्यकर्ताओं, समर्थकों, पूर्व विधायकों तथा मौजूदा विधायकों को एक्टीवेट (सक्रिय) कर सकते हैं।

पूर्व सीएम बंसीलाल व भजनलाल की राह पर भूपेन्द्र सिंह हुड्‌डा

बता दें कि चर्चा यह भी है कि क्या पूर्व सीएम बंसीलाल और भजनलाल की तरह ही हुड्डा नयी पार्टी बनाएंगे और अगर बनाते है तो उनका हश्र भी कही बंसीलाल और भजनलाल की पार्टी की तरह न हो जाये। स्वर्गीय बंसीलाल ने कांग्रेस में रहते 1991 हरियाणा विकास पार्टी बनायी थी, वही पूर्व सीएम भजनलाल ने 2007 को हजकां पार्टी का गठन किया था। बाद में यह दोनों ही पार्टियों का कांग्रेस में विलय हो गया। ऐसे में हुड्डा अगर नयी पार्टी बनाते है तो उस पार्टी के भविष्य को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है।

क्या महागठबंधन की चर्चाओं से डर रही भाजपा?

संसदीय कार्यमंत्री रामबिलास शर्मा ने हाल में विधानसभा में हुड्डा और अभय की जुगलबंदी के बीच चुटकी ली। अभय से मुखातिब होते हुए रामबिलास शर्मा ने कहा कि उनके (अभय) भीतर स्वर्गीय ताऊ देवीलाल का डीएनए है। देवीलाल ने राजनीतिक परिस्थितियों के चलते मुस्लिम लीग से तो समझौता कर लिया था, लेकिन कांग्रेस को कभी स्वीकार नहीं किया। रामबिलास ने अभय को नसीहत देते हुए कहा, मेरी सलाह मानो तो कांग्रेस के साथ मत जाना। शर्मा जी इन दोनों पर टिप्पणी करने से यहां भी बाज नहीं आये उन्होंने कहा कि आज राजनीति के मायने बदल रहे हैं, कहीं ऐसा न हो कि आज अभय चौटाला व भूपेंद्र सिंह हुड्डा जहां बैठे हैं, हो सकता है अगली बार यह दर्शक दीर्घा में नजर आएं।

राहुल और सोनिया की पोस्टर में हुयी दुबारा एंट्री

बता दें कि पोस्टर से बेदखल करने के बाद जब यह मामला तूल पकड़ा तो आज भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पोस्टरों में राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी की छोटी ही सही मगर एंट्री जरूर नजर आयी।

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