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नलवा में दलबदलू नेता, कट्टर कार्यकर्ता व अभिनेत्री के बीच टक्कर, कौन मारेगा बाजी

नाम, फेम व अच्छे रसूख के कारण मिल सकता है सोनाली फोगाट को टिकट

हिसार टुडे। अर्चना त्रिपाठी

कहते हैं कि लालच को देखकर अच्छों अच्छों का मन डोल जाताहै। चाहे वो लालच पैसों का हो या टिकट का। जी हां, लोकसभा चुनाव से जिस प्रकार एक पार्टी से दूसरे पार्टी में पलटीमार खेल चल रहा है, उसका असली मजा तो इस बार विधानसभा चुनाव में देखने को मिलने वाला है। बेचारे किन अरमानों के साथ आये कि पार्टी में शामिल हुए तो टिकट मिल जाएगी। हिसार लोकसभा चुनाव के दौरान हरि सिहं सैनी और नलवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक रणबीर गंगवा का नाम यहां प्रमुखता से लिया जा सकता है। 2008 में अस्तित्व में आये इस विधानसभा क्षेत्र में सर्वप्रथम 2009 में कांग्स रे नेता संपत सिहं ने हजकां पार्टी प्रत्याशी और स्वर्गीय भजनलाल की पत्नी जस्मा देवी को 10,901 वोटों से हरा कर नलवा के विधायक बने, मगर उन्हें अगले विधानसभा चुनाव में इनलो के तत्कालीन प्रत्याशी रणबीर
गंगवा ने सम्पत सिहं और स्वर्गीय भजनलाल के बेटे चंद्रमोहन को चुनाव में शिकस्त दी थी। मगर अब गंगवा भाजपा का दामन थाम
चुके हैं ऐसे में इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। क्योंकि उन्हें भूलना नहीं चाहिए कि इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के ताकत को  बलवान करने के लिए उन्ही के पार्टी के कट्टर कार्यकर् सुजीत कै ता मरी काफी वर्षों से अपना जनसम्पर्क बढ़ाने का काम करते आ रहे हैं। वहीं यहीं से लोकसभा चुनाव में टिकट की प्रबल दावेदार सोनाली फोगाट भी पार्टी हाईकमान के सामने अपनी इच्छा पहले ही जाहिर कर चुकी हैं। नलवा विधानसभा चुनाव में यही 3 प्रबल दावेदार हैं जिनके बीच इतनी कड़ी टक्कर होने जा रही है जिसका अंदाजा पार्टी हाईकमान को पहले ही हो चुका है।

भाजपा के पुराने व कट्‌टर कार्यकर्त्ता हैं सुजीत

लगातार दो बार जिला महामंत्री की दावेदारी संभालने वाले भाजपा महामंत्री सुजीत कुमार पार्टी हाई कमान के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के स्हनाे माने जाते हैं। भाजपा के समक्ष 2002 से हिसार में पार्टी संघटन का काम करने वाले सुजीत कुमार हिसार के साथ इस बार 4 सालों से नलवा विधासभा क्षेत्र में भी पार्टी संघटन की ताकत मजबूत करने का काम कर रहे है। राजकीय पंडितो का मानना है कि नलवा में सुजीत कुमार के विकासशील कार्यों के साथ बेहतर जनसम्पर्क के बलबूते भाजपा की ताकत वहां और मजबूत हो चुकी हैं। आकड़े बताते है कि ऐसी काफी विकासशील परियोजना है जिन्होने नलवा में लाने में सुजीत कुमार का उल्लेखनीय
कार्य रहा है। इन्हीं कार्यों के कारण उन्हें पार्टी ने 2002 में अर्बन मंडल हिसार के उपाध्यक्ष,
2003 में वे हिसार जिला उपाध्यक्ष, 2004  मीडिया प्रमुख, हिसार विभाग, 2004-2006 प्रदेश कार्यकारी मीडिया प्रमुख, हरियाणा, 2006-2008 प्रदेश उपाध्यक्ष, युवा मोर्चा हरियाणा, 2008-2010 प्रदेश कोषाध्यक्ष, युवा मोर्चा हरियाणा, 2010-2012 प्रदेश उपाध्यक्ष, युवा मोर्चा  हरियाणा, 2013- अब तक जिला महामंत्री, हिसार की जिम्मेदारी सौंपी है जो उन्होंने बखूबी निभाई है। मगर हर बार बाहरी होने का खामियाजा सुजीत कुमार को झेलना पड़ा, मगर इस बार सुजीत ने नलवा में इतनी मेहनत कर दिखाई है जिसका अंदाजा पार्टी को भी है। खुद मुख्यमंत्री को उन्होंने अपने नलवा विधानसभा क्षेत्र में बुलवाकर बड़ी सभाएं भी की हैं। भाजपा के सभी नेताओं से अच् सम छोवन्ध होने के साथ सोशल मीडिया में एक्टिव सुजीत
को मेयर चुनाव को लेकर अपनी दावेदारी की उम्मीद थी, मगर उस दौरान उनके सामने मेयर और नलवा विधानसभा से टिकट का विकल्प था। इसी के चलते उन्होंने मेयर चुनाव से पहले ही अपनी दावेदारी से पीछे हटकर नलवा पर ध्यान लगाया। इसलिए दशकों से पार्टी की सेवा के बदले उन्हें उपहार स्वरुप पार्टी यहां से दावेदारी दे भी सकती है।

नाम, फेम व अच्छे रसूख के कारण मिल सकता है सोनाली फोगाट को टिकट

सोनाली फोगाट के मामले में कहा जाता है कि वह अभिनेत्री होने के साथ लगभग कई वर्षों से भाजपा की एक कट्टर कार्यकर्ता के तौर पर काम करते आ रही है। जाट चेहरा होने के नाते हिसार लोकसभा के जाट बहुल इलाके में पार्टी को उनके चेहरे का फायदा मिला वहीं ठीक दूसरी तरफ उनके सौम्य आचरण ने भी उन्हें एक कुशल नेत्री के रूप में स्थापित किया है। नलवा विधानसभा क्षेत्र में सोनाली फोगाट का गांव हरिता पड़ता है। सोनाली का मानना है कि वहां से उनका इतना लगाव है कि वह इस बार विधानसभा चुनाव वहां से जरूर लड़ेगी और पार्टी के सामने अपनी दावेदारी पेश करेंगी। फिलहाल सोनाली को पार्टी हाईकमान ने क्षेत्रीय निदेशक कला परिषद हिसार की महत्वपूर्णजिम्मेदारी उन्हें सौपी गयी है। बता दें कि इस के अलावा सोनाली सिंह फोगाट बीजेपी के राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति मोर्चा की प्रभारी भी रही हैं। सोनाली पिछले एक दशक से बीजेपी में एक्टिविस्ट के तौर पर काम कर रही है। इसके अलावा उन्होंने झारखंड और मध्यप्रदेश के आदिवासी और गरीबों के लिए भी काम किया है। बता दें कि सोनाली करीब 10 साल पहले हरियाणा में दूरदर्शन की एंकर भी रह चुकी है। मगर अभी वह हरियाणा कला परिषद के माध्यम से यहां के कलाकारों को मंच मुहैय्या करवाने का काम कर रही है। सोनाली के मामले में कहा जाता है कि उनका केंद्र में सभी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ अच्छे रिश्ते हैं और हाईकमान तक मजबूत पकड़ है जिसका लाभ उन्हें तब हुआ जब इस बार लोकसभा सीट में टिकट की दावेदारी में उनका नाम हाई कमान तक गया था। मगर वह अंतिम समय में इससे चूक गयी। ऐसे में जानकारों का मानना है कि सोनाली नलवा से अपनी दावेदारी पेश करेंगी तो शायद पार्टी हाई कमान भी उनके तरफ सकारात्मक भूमिका अख्तियार करे।

रणबीर गंगवा की डगर है कांटो भरी, आदमपुर से उतार सकती है भाजपा

दल-बदल कर भाजपा में शामिल रणबीर गंगवा के सामने चुनौतियां कहीं अधिक हैं। रणबीर गंगवा इनेलो में रहते हुए वर्ष 2000 में हिसार जिला परिषद के सदस्य चुने गए थे। 2005 में दोबारा हिसार जिला परिषद के सदस्य चुने गए और उन्हें परिषद का वाइस चेयरमैन बनाया गया। 2009 में इंडियन नेशनल लोकदल की टिकट पर उन्होंने नलवा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के संपत सिंह से चुनाव हार गए। इनेलो ने 2010 में उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया। 2014 में गंगवा ने राज्यसभा से इस्तीफा देकर नलवा विधानसभा क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव लड़े और उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन बिश्नोई सहित पूर्ववित्तमंत्री संपत सिंह को करीब 12, हजार मतों से हराया। राज्यसभा सदस्य रहते हुए रणबीर गंगवा ने हिसार लोकसभा क्षेत्र में ढाणियों पर रहने वाले किसानों के लिए बिजली पहुंचाने का काम किया था। बता दें कि वर्ष 2008 में परिसीमन उपरांत नलवा विधानसभा अस्तित्व में आई थी, जिसमें पश्चिमी हिसार, आदमपुर के कुछ गांव व हांसी हलके के  कुछ गांवों को शामिल किया गया था। कांग्रेस के दिग्गज नेता चौधरी भजनलाल का घर भी इसी विधानसभा का हिस्सा है। वर्ष 2014 के चुनाव में गंगवा गांव निवासी रणबीर सिंह प्रजापत इनेलो की टिकट पर हजकां के चंद्रमोहन को हराकर विधायक बने थे। ऐसे में गुंजाईश यही जताई जा रही है कि हो सकता है रणबीर गंगवा को आदमपुर में भजपा कुलदीप बिश्नोई के खिलाफ मैदान में उतार सकती है। ऐसे में गंगवा जो खुद नलवा के विधायक हैं उनके सामने मुसीबत और बड़ी होने जा रही है।

दलबदल कर आने वाले यह न सोचे उनको टिकट मिलेगी

^बता दें कि इस दिनों मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कार्यकर्ताओं और पन्ना प्रमुखों पर फूलों की बरसात कर यह दिखा रहे है कि कट्टर
कार्यकर्ता ही उनकी ताकत हैं, ऐसे में टिकट के लालच में न दूसरी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वालों की भरमार सी लगती जा रही है। इसीलिए मुख्यमंत्री के साथ हाल में सुभाष बराला ने भी एक बयान दिया था कि दूसरी पार्टी से भाजपा में आने वाले नेता यह उम्मीद न करें कि उन्ही को टिकट मिलेगी। ऐसे में अब भाजपा कार्यकर्ताओं को संतोष है कि पार्टी उनपर ध्यान दे रही है।

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