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मनोहर लाल का ‘कमाल’ ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’

बिन खर्ची-बिन पर्ची काबलियत पर रोजगार, परिवार में किसी के पास सरकारी नौकरी नहीं तो 5 नंबर अलग से देगी सरकार, सक्षम योजना के तहत युवाओं को 7500 से 9000 रुपये मासिक

महेश मेहता | हिसार टुडे

मनोहर ‘कमाल’, बिन खर्ची-बिन पर्ची काबलियत पर रोजगार, स्लोगन लिखे बोर्ड आजकल प्रदेश के हर जिले में दिखाई दे जाते है। सत्ता पक्ष का दावा है कि उन्होंने हरियाणा के इतिहास में सबसे ज्यादा 69 हजार सरकारी नौकरियां पारदर्शी और ईमानदार तरीके से दी। हालांकि विपक्ष लगातार नौकरियों में ग्रुप डी की ज्यादातर भर्ती की बात कह रहा है। लेकिन, ग्रुप-सी से एचसीएस हरियाणा सिविल सर्विस अफसर बनने की लिखित परीक्षा परिणाम एकबार फिर विपक्ष के मुंह पर ताला जड़ दिया है।
क्योंकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विशेषाधिकार होने के बावजूद लिखित परीक्षा पर जोर दिया। जिसके कारण प्रदेश से चार हजार कर्मचारी शामिल हुए, जिसमें 59 ने परीक्षा पास की। इन सभी 59 परीक्षार्थियों को 19 अगस्त को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है। बता दें कि रोजगार का मसला हमेशा मनोहर सरकार के लिए लाभदायक बनकर साबित हुआ है। जींद उपचुनाव की जीत सिर्फ रोजगार के मुद्दे पर मिली जीत आज भी मानी जाती है। मेयर चुनाव हो यह लोकसभा चुनाव यह मुद्दा हमेशा मनोहर सरकार के लिए मील का पत्थर बनकर साबित हुआ। सबसे खास बात यह है कि मनोहर सरकार के राज में नौकरी में भ्रष्टाचार के कई मामले भी निकल कर सामने आये और मनोहर सरकार के राज में काफी गैंग का पर्दाफाश हुआ है। इस बात को भले ही भ्रष्टाचार से जोड़ कर देखें, मगर जिस प्रकार से मनोहर सरकार के राज में इतने बड़े रैकेट का पर्दाफाश होना और उस रैकेट का कच्चा चिट्ठा उजागर करना किसी सरकार के साहसी कदम का खुलासा करता है। मनोहर सरकार की इसी योजना के तहत आज नौबत ऐसी है कि मनोहर राज का असर ही है कि इस विधानसभा चुनाव में सरकार 75 पार का नारा देखकर आगे बढ़ रही है। सरकार को विश्वास है कि आगामी समय में वह मुख्यतः रोजगार पर फोकस कर काबलियत के आधार पर रोजगार देने का काम करेगी।

अमेरिका की तर्ज पर रोजगार रजिस्टर के जरिये मुख्यमंत्री रखेंगे रोजगार का हिसाब

बता दें कि राज्य की मनोहर सरकार जल्द ही अमेरिका की तर्ज पर रोजगार रजिस्टर तैयार करने जा रही है। जिसमें वह कितने रोजगार नहीं दिए गए,

कितने बेरोजगार बैठे हैंए कितने कम हुए इस तरह की सारी खबरें उसमें अपडेट की जाएगी। इस रोजगार रजिस्टर में नौकरीपेशा, बेरोजगारों, सक्षम और नौकरी पाने वालों का हिसाब रखा जाएगा। योग्यता के आधार पर बेरोजगारों का वर्गीकरण होगा। साथ ही उसी के आधार पर सरकारी नौकरियां भी निकाली जाएंगी। इस तरह का काम अभी तक देश के किसी भी राज्य में नहीं हुआ है। हरियाणा ऐसा पहला राज्य है जिसमें इस तरह का कदम उठाया जा रहा है। बता दें कि इस प्रकार का हिसाब रखना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह एक प्रकार का पारदर्शी रिकॉर्ड रहेगा जो हरियाणा के तमाम वासियों को यह बता सकेगा कि वह जनता के लिए क्या कर रहे हैं? कितने बेरोजगारों को रोजगार दे चुके हैं और कितने लोगों को रोजगार दिलाया, कितने लोगों को रोजगार देने का काम किया है व सरकार कितने को रोजगार देने का विचार कर रही है।

रोजगार सिस्टम को जल्दी से जल्दी चलन में लाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने उच्च अधिकारियों के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है, रोजगार को हाल ही में शुरू की गई महत्त्वाकांक्षी योजना परिवार पहचान पत्र से जोड़ा जाएगा। जानकारी के अनुसार मनोहर सरकार ने अपने कार्यकाल में अब तक लगभग 100000 सरकारी नौकरियां युवाओं को दी हैं, जिसमें सबसे बड़ी भर्ती ग्रुप डी की रही। इसके माध्यम से 18000 से अधिक युवाओं को रोजगार दिया गया।
– मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा

लिखित परीक्षा को अनिवार्य कर लाई पारदर्शिता

बता दें, प्रदेश की पूर्व सरकारों में सीधे कर्मचारियों को इंटरव्यू के बाद सीधे एचसीएस अफसर बना दिया जाता था। इसलिए सरकारों पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद जैसे आरोप लगते थे। इस कुव्यवस्था को रोकने के लिए मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने अन्य भर्तियों की भांति 19 एचसीएस भर्ती में भी लिखित परीक्षा कराने का फैसला लिया। इसके लिए 31 जुलाई को पंचकूला में लिखित परीक्षा आयोजित की गई। जिसका परिणाम और चौंकाने वाला साबित हुए। पहली बार हुई लिखित परीक्षा में कुल 59 परीक्षार्थी पास हुए। जिसमें से 44 शिक्षक हैं, इनमें 31 जेबीटी। दूसरे विभागों के सिर्फ 15 कर्मचारी ही पहली बाधा पार कर सकें। इन विभागों में पुलिस से चार, परिवहन और लेखा विभाग से तीन-तीन, पशु पालन विभाग से दो तथा विकास एवं पंचायत, खाद्य एवं आपूर्ति तथा वन विभाग से सिर्फ एक-एक कर्मचारी ने मेरिट में जगह बना पाए हैं। चयनित कर्मचारियों को साक्षात्कार के लिए दस्तावेजों के साथ 19 अगस्त को पंचकूला बुलाया गया है। फोरमैन से लेकर बस कंडक्टर और बडी संख्या में अध्यापकों द्वारा परीक्षा क्वालिफाई करना, हर व्यक्ति का आश्चर्यचकित कर रहा है। मनोहर राज में हुई अन्य भर्तियों की भांति इस भर्ती में राजनैतिक हस्तक्षेप दिखाई नहीं दिया। न मंत्री का रिश्तेदार लगा और न ही संतरी का। सामान्य परिवारों के काबिल लोगों को अपनी काबिलियत के बल पर एचसीएस जैसे बडे पद नसीब हो रहे हैं। इसलिए सब कह रहे हैं, सभी कह रहे हैं मनोहर ‘कमाल’, बिन खर्ची-बिन पर्ची काबलियत पर रोजगार।

जिस परिवार में कोई भी सरकारी नौकरी पर नहीं तो 5 नंबर अलग से : सीएम

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से इतिहासिक फैसला लेते हुए चुनाव के पूर्व ही एक बड़ी घोषणा कर रोजगार के लिए भटकते युवाओं की कोशिशों को एक आधार देने का काम करते हुए कहा है कि सरकार ऐसे परिवारों के बच्चों को सरकारी नौकरी देते समय 5 अतिरिक्त अंक देगी जिनके परिवार में एक भी सरकारी नौकरी नहीं है। बता दें कि हरियाणा के इतिहास में भाजपा पहली ऐसी सरकार होगी जिसने शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार न पाने वाले युवाओं को सक्षम योजना के तहत 7500 से 9000 रुपये मासिक प्रदान किए हैं।

भ्रष्टाचार को लेकर सीएम का वार “न खाऊंगा न खाने दूंगा”
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने ईमानदारी से अपना फर्ज निभाया है, प्रदेश से भ्रष्टाचार को खत्म करने की नई पहल की है। हमारी नीति है न खाऊंगा-न खाने दूंगा और जिन्होंने खाया है उनसे भी वापस लेकर आऊंगा। केंद्र व प्रदेश सरकार की ईमानदार नीतियों के कारण ही पहले नगर निगम में, फिर जींद उपचुनाव में और फिर लोकसभा चुनाव में जनता ने भाजपा प्रत्याशियों को भारी-भरकम जीत दिलवाई। उन्होंने कहा कि जनता के आशीर्वाद से अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 75 से अधिक सीटों पर जनता विजयी बनाएगी। मुख्यमंत्री को पता है कि यही मुद्दा इस बार विधानसभा चुनाव में उनकी सबसे मजबूत चुनावी मुद्दा बनकर साबित होगा।

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