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प्रधानमंत्री ‘नमो’ की राह पर ‘मनो’

नमो के स्वछता अभियान की तरह मनो का पौधागीरी अभियान मिल का पत्थर

हिसार टुडे । महेश मेहता 

यह बात किसी कार्यकर्ता या किसी पार्टी के नेता को बोलने की जरुरत नहीं। यह हकीकत है कि नेता बड़ा वही होता है जो समाज के अंदर चल रही बुराइयों को न केवल समझे, बल्कि वह यह समझे कि उसका दायित्व है कि अगर वो समाज का सच्चा सेवक है तो वह उन बुराईयों से लड़े और उसे दूर करने की दिशा में बहुमूल्य भूमिका अदा करे। समाज में ऐसी एक बुराई है जिसकी वजह से हरियाणा का नाम कितना बदनाम था वह बुराई थी लिंगानुपात में भारी अंतर।

बता दें कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे जिन्होंने समाज की इस विषमता को न केवल समझा बल्कि हरियाणा से “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” मुहीम की शुरुवात कर दिखा दिया कि अगर मन में कुछ बदलने का कर गुजरने का संकल्प है तो नामुमकिन कुछ भी नहीं। यही कारण है कि पीएम नरेंद्र मोदी के उस कदम से हरियाणा में अभिशाप के रूप में माने जाने वाले “लिंगानुपात” में बेहद कमी आयी है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो यह समस्या हरियाणा से हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी और हमारी आने वाली पीढ़ी यही कहेगी कि भाजपा ऐसी पार्टी है जिसने राजनीति नहीं समाज के विषय में भी संज्ञान लिया।

भाजपा ने एक और मुहीम को सफलता से निभाने का दायित्व उठाया और उसमें सफलता पायी वह है “स्वछता अभियान”। आज भारत में मील का पत्थर बनकर साबित “स्वछता अभियान”, जिस तरह से देशवासियों के जीवन का अहम हिस्सा बनकर साबित हुआ है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग भी स्वछता अभियान में किसी न किसी प्रकार से जुड़ा है। जिसके चलते ऐसा माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के इस कदम को आज ही नहीं बल्कि युगो-युगो तक याद किया जायेगा। क्यूंकि यह एक ऐसी मुहीम बनकर साबित हुयी जिसमें पुरे भारत के नागरिकों ने अपना योगदान दिया। आज अगर मुंबई की ट्रेन में आपको कभी सफर करने का मौका मिले तो खुद देखना महिलायें हों या पुरुष कचरा डालने वाले साथियों को न केवल टोकते हैं, बल्कि उन कचरों को इक्कठा करके स्टेशन में उतर कर कचरे के डिब्बे में डालते हंै। ठीक उसी प्रकार हरियाणा में पीएम नरेंद्र मोदी की भांति मनोहर लाल ने भी हरियाणा में ऐसी कई मुहिमों की शुरुवात करने का ढांढस दिखाया है जिसके चलते उनका काम की पहचान मोदी से की जा रही है। देश में बदलाव की दिशा में आगे ले जाते नमो की तरह हरियाणा को आगे ले जाने का काम मनो ने किया है।

नमो के स्वछता अभियान की तरह मनो का पौधागीरी अभियान मिल का पत्थर

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अभूतपूर्व मुहीम जिनके क्रियान्वन के कारण आज हरियाणा में “मनो” की ही चर्चा है और वह मुहीम है वृक्ष संवर्धन की दिशा में बहुमूल्य कदम उठाये हैं, भ्रष्टाचार को लगाम, मनोहर के महत्वपूर्ण कदम में उन्होंने जनभागीदारी को सुनिश्चित किया है। चूंकि आप भी इस बात से अवगत होंगे कि आज पर्यावरण को लेकर कितनी समस्या है। बढ़ती गर्मी से जूझने वाले पुरे देश के साथ हरियाणा में भी इसके विपरीत प्रभाव भुगतने पड़ रहे हैं। यही कारण है कि नमो की तरह मनो ने हरियाणा में “पौधागीरी” नामक मुहीम की शुरुवात की है। बता दें कि इस पौधागीरी मुहीम के तहत मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा के हर नागरिक को इसमें शामिल किया है।

मनोहर लाल खट्टर ने इस राज्य स्तरीय पौधागीरी कार्यक्रम के माध्यम से हरियाणा में पर्यावरण और संस्कारों को सुरक्षित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को महापुरुषों, दादा-दादी, माता-पिता, गुरुजनों और अपने नाम से कम से कम एक पौधा लगाने का सन्देश दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि इन पौधों को लगाने से लेकर बड़ा होने तक सुरक्षित रखने का संकल्प भी लेना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस साल बरसात के मौसम में तकरीबन शिक्षा विभाग एवं कार्यालय परिसरों में 20 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के इस विशेष मुहीम की जनभागीदारी में हजारों स्कूली विद्यार्थियों को भी इसमें शामिल किया है। जिन्हे कम से कम 3 साल तक पौधे की देखभाल का संकल्प लेने के लिए कहा गया है। बता दें कि हाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने युवाओं को धरती मां की यही पुकार, बच्चे कम और पेड़ हजार का संदेश देते हुए कहा कि आज पर्यावरण और भूजल स्तर को बचाने के लिए पौधे लगाना आवशयक है। इस बात से शायद आप भी वाकिफ होंगे कि हरियाणा में कई ऐसे गांव है जिसका भूजल स्तर डार्क जोन में आ चुका है। क्यूंकि ऋग्वेद का कथन है कि वृक्ष लगाओ इनकी सुरक्षा करो, ये जल स्त्रोत की रक्षा करते हैं। जैसे दस कुंओं के बराबर एक बावड़ी होती है, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब होता है, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र है और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है।

नमो की तर्ज पर मनो ने दिया युवाओं को कौशल प्रशिक्षण का पिटारा

युवा देश होने के नाते देश और दुनिया में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। आज भारत की 65 फीसद आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक भारत की औसत आयु 29 वर्ष होगी, जबकि चीन व अमेरिका में 37 वर्ष तथा यूरोप में 45 वर्ष होगी। 10 से 24 साल की उम्र के 35.6 करोड़ लोगों के साथ भारत सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश है। यह भारत के लिए बेहतर अवसर और बड़ी चुनौती है। अवसर इसलिए है कि हम अपने युवाओं को हुनरमंद बनाकर देश को दुनिया के मानव संसाधन का गढ़ बना सकते हैं। लेकिन, इसके विपरित बड़ी चुनौती ये भी है कि भारत आजादी के 72 साल बाद भी युवा शक्ति की ताकत को पहचान नहीं पाया।

इस युवा ताकत में तादाद अकुशल या अर्धकुशल युवाओं की है। श्रम ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार भारत में महज 3.5 फीसद कुशल कार्यबल है। अब तक सरकारें यह सोच रहि थी कि युवाओं का भविष्य सिर्फ मैटिक, इंटर, ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट करने वालों में व्यावसायिक शिक्षा एक ऐच्छिक कोर्स ही है। मगर नरेंद्र मोदी ने इन युवाओं के हुनर और उस हुनर के सही इस्तेमाल की जरूरत को समझा और मोदी सरकार ने 2015 में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधीन कर काम शुरू किया। देश में पहला कौशल विश्वविद्यालय हरियाणा में खोला गया। हरियाणा में भी भाजपा सरकार है अर्थात मनो की सरकार। हरियाणा सरकार ने पहल करते हुए हरियाणा कौशल विकास मिशन का गठन किया। जिसके माध्यम से अलग-अलग 12 विषयों पर युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

जून 2019 तक 59,137 युवाओं ने इस योजना से लाभाविंत हुए। खुद मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने युवाओं को सबल और सक्षम बनाने के लिए नवंबर 2016 को सक्षम युवा योजना 49540 युवाओं को 100 घंटे का काम मुहैया कराया गया। मनोहर सरकार ने अपने पौने पांच साल के कार्यकाल में 24 सरकारी और 135 निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोलकर कौशल विकास को बढावा दिया। सबसे बडी बात ये है कि 2018 में यमुनानगर के साढौरा स्थित आईटीआई को देश के टॉप टेन में 7वां स्थान मिला। युवाओं को रोजगार देने के लिए मनोहर सरकार अब तक 346 रोजगार मेलों का आयोजन कर चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर युवा आबादी को अर्थव्यवस्था के लिए वरदान कहते रहे हैं। इसलिए युवाओं में नई तकनीक के अनुसार कौशल विकास में जान फूंकनी बेहद जरूरी और समय की मांग है। यह बात मनोहर लाल ने हरियाणा में कार्यान्वित करके दिखायी है।

नमो के अभियान को मनो ने बनाया सफल, लिंगानुपात में जबरदस्त सुधार

बता दें कि हरियाणा के लिए अभिशाप बनकर साबित हुए लिंगानुपात के अंतर को कम करने के मकसद से पीएम मोदी ने हरियाणा ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत से “ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” की मुहिम की शुरुआत की गई। पीएम मोदी के मकसद को पूरा करते हुए मनोहर लाल ने हरियाणा में अपनी पूरी टीम के साथ ऐसा काम कर दिखाया जिसका गवाह आज उसके आंकड़े दे रहे हैं। एक जमाना था जब हरियाणा में 2001 में 819 लिंगानुपात था वह 2011 में 834 पर पहुंचा, मगर 2014 में 871 के मुकाबले 207 में 914 का जन्म लिंगानुपात पहुच गया। जो सीधे तौर पर 43% अंक की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। आंकड़े बताते हैं कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत कर मनो सरकार ने हरियाणा अमें 20,000 बच्चियों की जान बचाई है।

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